सेठ की बीवी की चुत गांड की चुदाई- 1

मालिक की वाइफ की सेक्स कहानी में मेरी नजर अपने सेठ की सेक्सी गदराये बदन वाली बीवी पर थी. वो मेरे साथ बड़े प्यार से बोलती थी तो मेरा लंड खड़ा हो जाता था.

फ्रेंड्स, मेरा नाम रोहित है और मैं आजकल मुंबई में रहता हूँ.
आप सबने मेरी पिछली सेक्स कहानी
एक अनजान भाभी से ट्रेन में लंड चुसवाया
बहुत पसंद की.
उसके लिए मैं आप सबका बहुत आभारी हूँ.

दोस्तो, आज मैं एक और सच्ची घटना आपके सबके साथ साझा करना चाहता हूँ.
आशा करता हूँ मेरी ये मालिक की वाइफ की सेक्स कहानी भी आप सबको पसंद आएगी.

एक बार फिर से सभी भाभियों और बहनों को मेरा खड़े लंड से सलाम.
यह बात उन दिनों की है, जब मैं रोहतक में रहता था.

दोस्तो, जैसा कि मैंने अपनी पिछली स्टोरी में बताया था कि बचपन में ही मेरे पापा की एक कार एक्सिडेंट में मृत्यु हो गयी थी.
पापा के जाने के बाद मेरे ऊपर भी ज़िम्मेदारी आ गयी और मुझे अपनी पढ़ाई दसवीं के बाद छोड़नी पड़ी.

मैं रोहतक के बाजार में एक कपड़े की दुकान में काम करने लगा.

जिस दुकान में मैं काम करता था, उसके मालिक का नाम अरविन्द (नाम बदला हुआ) था.

अरविन्द भैया की वाइफ का नाम नीतू (नाम बदला हुआ) था.
भैया की उम्र कोई 40 साल की थी और भाभी की उम्र कोई 35-36 साल की थी.

उनके घर में अरविन्द भैया, नीतू भाभी और उनकी मम्मी रहती थीं.
अरविन्द भैया के दो बड़े भाई थे. एक दिल्ली में रहते थे और दूसरे अहमदाबाद में.

अरविन्द भैया की एक बहन भी थीं, जिनका नाम मिशु (नाम बदला हुआ) था.
मैं उन्हें दीदी कह कर बुलाता था.

वो भी रोहतक में रहती थी.
वो शादीशुदा थीं और अपनी ससुराल में रहती थीं. उनकी ससुराल, अरविन्द भैया के घर से थोड़ी ही दूरी पर थी.

अरविन्द भैया का घर और दुकान पास-पास ही थे.
तो मैं रोज़ सुबह उनके घर पर जाता और दुकान की चाभी लेकर दुकान खोलता, साफ सफाई करता.
अरविन्द भैया बाद में दुकान पर आ जाते थे.

एक दिन जब मैं सुबह दुकान की चाभी लेने उनके घर पर गया तो नीतू भाभी ने दरवाज़ा खोला.
भैया उस वक़्त कहीं गए हुए थे.

भाभी ने मुझे चाभी देते हुए पूछा- तेरा नाम क्या है?
मैंने कहा- मैडम मेरा नाम रोहित है.

उन्होंने पूछा- और तेरा सरनेम क्या है?
मैंने कहा- मैडम, मेरा सरनेम अरोरा है.

इस पर उन्होंने कहा- अरे वाह … हमारा सरनेम भी अरोरा है, तो तू आज से मुझे मैडम नहीं, भाभी कह कर बुलाया कर!
मैंने कहा- ठीक है मैडम.

उन्होंने कहा- फिर मैडम!
मैंने कहा- सॉरी मैडम, मेरा मतलब भाभी.

इस बात पर हम दोनों हंस दिए और मैं चाभी लेकर दुकान पर चला गया.

नीतू भाभी देखने में बहुत सुंदर थीं. भाभी का बदन बहुत गदराया हुआ था. लाल लाल होंठ, काली आंखें, काले घने लंबे बाल, गोल गोल दूध, पतली कमर और कमर के नीच सुडौल गोल गोल चूतड़ और भारी भारी जांघें.
उनका फिगर ऐसा था कि कोई भी मर्द उन्हें देख कर गर्म हो जाए. मतलब वो उन्हें चोदने की ना सोचे, ऐसा हो ही नहीं सकता था.

भाभी एक अमीर मां-बाप की औलाद थीं, तो अमीरी का रौब भी उनके हसीन चेहरे पर झलकता था.

मैं रोज़ ऐसे ही दुकान की चाभी लेने घर पर जाने लगा था.
कभी भैया उस समय सोए होते थे तो मैं भाभी से चाभी लेकर दुकान पर आ जाता.

दिन ऐसे ही बीतते गए.
मेरी और भाभी की अच्छी दोस्ती सी हो गयी.
वो दिन में मुझे किसी ना किसी काम के बहाने घर पर बुला लेती थीं.

उनका घर बहुत बड़ा और तीन मंज़िल का था.
सबसे ऊपर वाली छत खुली थी और वहां पर एक बहुत बड़ा जेनरेटर रखा हुआ था.

जब भी घर की लाइट गुल हो जाती, तो भाभी जेनरेटर स्टार्ट करने के लिए दुकान पर फोन करके मुझे बुला लेतीं.

अब भाभी दिन में भी मुझे 2-3 बार किसी ना किसी काम के लिए बुला ही लेती थीं.
कभी जूस लाने के लिए तो कभी भैया का खाना लेने के लिए … और बाद में झूठे बर्तन वापिस घर पर लाने के लिए!

जो अरविन्द भैया की बहन थीं, मिशु दीदी … वो भी अक्सर घर पर आ जाती थीं.
उनकी एक एक साल की बेटी थी, जो मेरे साथ बहुत खेलती थी.

दोस्तो, मिशु दीदी भी देखने में एकदम माल थीं, वो हाइट में मुझसे थोड़ी लंबी थीं और भाभी से थोड़ी पतली थीं.
पर जब वो चलती थीं, तो उनके दोनों चूतड़ बड़े ही लय में थिरकते थे.
जो भी उनको एक बार देख ले, उसका लंड खड़ा होना लाजिमी ही था.

दीदी बहुत गोरी थीं और बला की खूबसूरत थीं.
उन दोनों को नजदीक से देख देख कर मेरे दिन ऐसे ही कट रहे थे.

नीतू भाभी मुझ पर बहुत मेहरबान रहती थीं.
जब भी वो मुझे घर बुलाती थीं, वो मुझसे मेरी पसंदीदा मिठाई के बारे में पूछती थीं या कोई अन्य पसंदीदा आइटम के बारे में जानने की कोशिश करती थीं.

मैंने उन्हें बता रखा था कि मेरी पसंदीदा मिठाई बर्फी और रसगुल्ला है.

वो हमेशा मेरे लिए फ्रिज में बर्फी और रसगुल्ले रखती थीं … और जब भी मैं उनके घर पर होता, वो मुझे बोलतीं कि मैंने तेरे लिए फ्रिज में बर्फी और रसगुल्ले रखे हैं, जा जाकर निकाल ले और खा ले.
मुझे भी उनका, बहाने से मुझे अपने घर बुलाना अच्छा लगता था क्योंकि नीतू भाभी एक तो बहुत सुंदर थीं और मुझे खाने को भी देती थीं.

भाभी सच में इतनी सुंदर थीं कि मैं तो हर वक़्त उन्हें ही देखता रहता और सोचता कि काश नीतू भाभी मुझे सिर्फ़ एक बार चोदने के लिए मिल जाएं.
वो जब चलती थीं तो उनके चूतड़ बड़े ही मादक अंदाज में थिरकते थे, उनको देखते ही मेरा तो लंड खड़ा ही हो जाता था.

ये बात भाभी ने भी बहुत बार नोटिस की थी.
लेकिन उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा बल्कि मेरी ज़िप को देखते हुए वो मुझसे इधर उधर की बातें करने लगती थीं.
इससे मुझे भी मज़ा आने लगता और मैं उनको दिखाते हुए जानबूझ कर अपने लंड पर हाथ फेर देता.

वो मुझे रसोई में खाना बनाती हुई अपने पास बुला लेतीं और कहतीं कि वो टिफिन उठा, वो रोटी उसमें डाल.
ये सब काम करते हुए कई बार मेरे हाथ भाभी के चूतड़ पर, कभी उनके दूध पर लग जाते.

शुरू शुरू में तो मैं बहुत डर जाता, लेकिन जब मैंने देखा कि भाभी ने कभी ऐतराज़ नहीं किया तो मेरे अन्दर का डर निकल गया.
फिर एक दिन ऐसे ही नीतू भाभी ने दोपहर के वक्त भैया को फोन करके मुझे घर बुला लिया.

भाभी- रोहित को बोलो कि मेरे लिए जूस लेकर आए.
अरविन्द भैया ने मुझे पैसे देते हुए कहा- जा, अपनी भाभी के लिए जूस लेकर घर चला जा.

मैं खुशी-खुशी जूस लेकर उनके घर पर चला गया.
उस दिन भाभी ने मुझसे कहा.

नीतू भाभी- रोहित, अगर तू बुरा ना माने तो एक बात पूछूं?
मैंने कहा- हां हां भाभी पूछो ना, मैं भला क्यों बुरा मानूँगा!

भाभी- तेरी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
तो मैंने शर्माते हुए कहा- नहीं भाभी, मेरी तो कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.

भाभी- क्यों, तू तो इतना क्यूट है … तेरी कोई गर्लफ्रेंड क्यूँ नहीं है?
मैंने मायूस होकर कहा- भाभी मैं बहुत गरीब हूँ ना, गर्लफ्रेंड तो अमीरों की होती है.

भाभी- ऐसी कोई बात नहीं है. प्यार पैसे को देख कर नहीं किया जाता.
मैंने कहा- भाभी सब आपके जैसे नहीं होते.

भाभी- क्या तू फ्रेंडशिप करना चाहता है?
मैंने कहा- हां भाभी, दिल तो बहुत करता है … पर क्या करूँ?

भाभी- तू टेंशन मत ले. मेरी एक फ्रेंड है, जो मॉडल टाउन में रहती है, मैं उससे तेरे बारे में बात करूँगी.
मैं मन ही मन बहुत खुश हो गया.

फिर कुछ दिन ऐसे ही निकल गए और भाभी ने कुछ जवाब नहीं दिया.

एक दिन दोपहर को जब भाभी ने मुझे घर पर जूस लाने के लिए बुलाया तो मैंने उन्हें गर्लफ्रेंड वाली बात याद दिलाई.
उन्होंने एकदम से याद करते हुए कहा- अरे हां, मैंने उससे पूछा था.

मैंने खुश होते हुए पूछा- तो क्या कहा उसने?
भाभी- अरे यार क्या बताऊं, उसने मना कर दिया.
मेरा दिल टूट गया.

ये देख कर भाभी ने कहा- तू दिल छोटा मत कर, मैं ज़रूर तेरी गर्लफ्रेंड बना कर दूँगी. अपनी भाभी पर विश्वास कर.

मैं आपको बता दूं कि अरविन्द भैया हर रविवार पास के एक गांव में जाते थे जहां पर उनकी बहुत ज़मीन थी.
खेती-बाड़ी का हिसाब करने के लिए उन्हें हर रविवार वहां जाना पड़ता था.
हमारी दुकान रविवार को बंद रहती थी.

मैं रविवार को कभी कभी घर के काम में भाभी की सहायता करने के लिए भैया के घर पहुंच जाता था.
ये सब भैया और मम्मी को अच्छा भी लगता था. इससे मैं और भी सबका पसंदीदा बन गया था.

मैं जब भी भाभी से मूवी देखने के लिए पैसे मांगता, तो वो मुझे 100-200 रुपये दे देती थीं.
इन सारी बातों से मुझे लगता था कि हो ना हो, भाभी भी मुझे लाइक करती हैं, पर मेरी उनसे कुछ कहने के हिम्मत नहीं पड़ती थी.

ऐसे ही एक दिन शाम को लाइट चली गयी तो भाभी ने भैया को फोन करके जेनरेटर स्टार्ट करने के लिए मुझे घर पर बुला लिया.
भाभी उस दिन घर पर अकेली थीं, मम्मी कुछ दिनों के लिए दिल्ली वाले भैया के घर गयी हुई थीं.

मैं जेनरेटर स्टार्ट करने के बाद जाने लगा.
अचानक मेरे दिल ने कहा कि आज भाभी अकेली हैं, यही मौका है. उनसे अपने दिल की बात कह देना चाहिए. पर कहूँ कैसे, वही समझ नहीं आ रहा था.

पहले तो मुझे भाभी के दिल को टटोलना था कि उनके दिल में ऐसा कुछ है भी या नहीं. जैसा मैं उनके बारे में सोचता हूँ, क्या वो भी मेरे लिए सोचती हैं.

बहुत सोचने के बाद मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया.
उन दिनों मार्केट में सीडीआर नया आया था और वो बहुत महंगा भी था.

सिर्फ़ अमीर लोग ही खरीद पाते थे.
भाभी के पास एक सीडीआर था.
तो मैंने भाभी से कहा- भाभी, मेरा मूवी देखने का बहुत मन कर रहा था.

भाभी ने अपने पर्स में से 200 रुपये निकाले और मुझे देकर कहा- जा, जो मूवी देखनी है, देख ले.

मैं- भाभी मुझे ये वाली नहीं, वो वाली मूवी देखनी है.
भाभी- वो वाली … कौन सी वाली?

मैं- भाभी, अब कैसे कहूँ, आप खुद ही समझ जाओ ना!
भाभी- पहेलियां मत बुझा, जो कहना है साफ़ साफ़ बोल, मुझे ऐसे समझ नहीं आता.

मैंने डरते डरते कहा कि भाभी पहले प्रॉमिस करो कि आप बुरा नहीं मानोगी.
भाभी- प्रॉमिस, मैंने आज तक तेरी किसी बात का बुरा माना है, जो आज मानूँगी?

मैं- भाभी … मुझे व..वो … गंदी वाली फिल्म देखनी है.
भाभी कुछ देर चुप रहीं और फिर उन्हें समझ में आ गया.

वो बोलीं- अच्छा, अडल्ट फिल्म!
मैंने थोड़ा रिलॅक्स होते हुए कहा- हां भाभी, मुझे वही वाली फिल्म देखनी है.

भाभी- तो उसमें क्या प्राब्लम है. कल संडे है, तेरे भैया तो गांव जाएंगे, तो तू घर पर आ जाना. मैं अपनी फ्रेंड से एक सीडी मंगवा लूँगी.
मैं- पर भाभी, मेरी एक शर्त है.

भाभी- क्या शर्त है?
मैं- आपको भी मेरे साथ वो गंदी वाली फिल्म देखनी पड़ेगी.

भाभी थोड़ा सा मुस्कुराती हुई बोलीं- ओके ठीक है, मैं भी तेरे साथ अडल्ट फिल्म मूवी देख लूँगी.
इतना सुनते ही मेरे लंड ने एक ज़ोर का झटका खाया और मेरी पैंट में ही तन गया.

पैंट में लंड की जगह एक उभार बन गया.
भाभी ने भी इस बात को नोटिस किया और थोड़ी देर तक उसे देखती रहीं.

ये बात मैंने भी नोटिस कर ली.
मैं समझ गया था कि जैसा मैं सोचता हूँ, भाभी के दिल में वही चल रहा है.

मुझे भाभी के दिल की थाह मिल गई थी.
अगले दिन मैं सुबह 10 बजे भाभी के घर पर पहुंच गया.

जैसा कि मुझे पता ही था, भैया अपने खेतों को देखने गए थे और भाभी घर पर अकेली थीं.
जैसे ही भाभी ने दरवाज़ा खोला, मैं उन्हें देखता ही रह गया.

भाभी ने लाल रंग की खुले गले वाली नाइटी पहनी थी. जिसमें से उनके मम्मे आधे से भी ज़्यादा दिख रहे थे … और उनकी ये नाइटी घुटनों से थोड़ी ऊपर तक की थी.
मैंने उस वक़्त एक निक्कर और टी-शर्ट पहनी हुई थी.

मैंने जान बूझकर अन्दर कच्छा नहीं पहना था.
मैंने सोच रखा था कि आज तो भाभी को अपना लंड पकड़ा कर ही रहूँगा.

चूंकि हमारा प्लान एडल्ट मूवी देखने का था, तो मैं थोड़ा सा फ्री रहना चाहता था और भाभी को अपना लंड दिखाना चाहता था.
लेकिन हुआ उसका उल्टा.

मैं तो उन्हें देखता ही रह गया और उन्होंने एक कातिलाना स्माइल के साथ मेरा स्वागत करते हुए कहा- क्या हुआ, कहां खो गए?
मैं- क..कुछ नहीं भाभी … बस ऐसे ही.

भाभी- नहीं, कुछ तो बात है. जो तुम्हारा मुँह खुला का खुला रह गया. तुम तो आज मुझे ऐसे देख रहे हो, जैसे पहले कभी देखा ही नहीं. सच सच बताओ क्या बात है?
मुझे समझ आ रहा था कि ये ड्रेस भाभी ने मुझे गर्म करने के लिए ही पहनी है.
तो मैंने भी खुल कर भाभी को कह दिया- भाभी असल में आज आप बहुत सुंदर लग रही हो और …

भाभी- और?
मैं- और … और …
भाभी- और और ही करता रहेगा या कुछ आगे भी बोलेगा?

मैं- भाभी आप बहुत सेक्सी लग रही हो.
भाभी- अच्छा अच्छा अब अन्दर भी आएगा … या दरवाज़े पर ही खड़ा रहेगा!

मैं अन्दर आने लगा, तो भाभी सामने से हटी ही नहीं. उसी वजह से मेरा सीना भाभी के मम्मों पर टच हो गया.
दोस्तो, भाभी के दूध को टच करने में मुझे बहुत मज़ा आया था.

मैं- तो भाभी आपने सीडी मंगवा ली?
भाभी- अरे सॉरी यार, मैंने सरोज (भाभी की सहेली, जिसे मैं सरोज दीदी कहता था) से कहा था कि एक पॉर्न मूवी की सीडी दे दे. पर उसने कहा कि उसके पास जो अडल्ट मूवी की सीडी थी, वो खराब हो गयी है.

ये सुनते ही मेरा तो चेहरा उतार गया, मुझे लगा कि सारी प्लानिंग चौपट हो गयी.
भाभी ने मुझे देखा, तो उन्हें भी बहुत बुरा लगा. पर उसके बाद उन्होंने जो हरकत की, वो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोची थी.

वो मेरे दाईं ओर खड़ी थीं. उन्होंने वहीं से मेरे कंधे पर अपनी दोनों बांहें, एक आगे से … और एक पीछे से रख दी. फिर एकदम से मेरे करीब आकर मेरे गालों पर एक किस कर दी.
मैं हक्का-बक्का रह गया.

भाभी मेरे साथ चिपक कर खड़ी थीं और उन्होंने मुझसे कहा- सॉरी रोहित, मैं तेरी ये तमन्ना पूरी नहीं कर पाई.
और भाभी के बदन के स्पर्श से मेरे रोम रोम खड़ा हो गया, उनकी नर्म नर्म चूचियां मेरी पीठ पर चिपकी हुई थीं और उनकी जांघें मेरे चूतड़ों को स्पर्श कर रही थीं.

अचानक से उन्होंने अपनी टांगों को कुछ अलग तरफ से हिलाया.
अब उनकी एक जांघ मेरे एक चूतड़ को पीछे से स्पर्श कर रही थी और दूसरी जांघ मेरी दूसरी जांघ के आगे की तरफ आकर मुझसे चिपक गई थी.

मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से झटके खाने लगा. मेरे निक्कर में टेंट बन गया.
ये भाभी ने देख लिया.

उन्होंने मेरे कंधों से मुझे पकड़ा और मुझे अपनी तरफ घुमा लिया.
अब मेरा लंड भाभी की दोनों जांघों के बीच में आ गया था और उनकी चुत को टच करने लगा था.

मेरी हालत खराब होने लगी थी.
भाभी के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गयी.

उन्होंने कहा- अगली बार मैं तेरी ये तमन्ना जरूर पूरी कर दूँगी.
मैंने भी अपनी दोनों बांहें उनकी कमर में डाल दीं और भाभी से एकदम से चिपक कर खड़ा हो गया.

मैंने कहा- मेरी प्यारी भाभी, कोई बात नहीं. लेकिन आपको मेरी यही तमन्ना नहीं … और भी कुछ तमन्ना पूरी करने पड़ेगी.
भाभी ने कहा- हां बाबा पक्का. चल अब नाश्ता करते हैं, बहुत जोरों की भूख लगी है.

फिर हम दोनों ने एक साथ सोफे पर बैठ कर नाश्ता किया.
भाभी मेरे साथ एकदम चिपक कर बैठी थीं. उनकी नर्म नर्म जांघें मेरी जांघों से चिपक हुई थीं और उनका एक दूध मेरी कोहनी से बार बार रगड़ खा रहा था.

मेरा नशा बढ़ता ही जा रहा था.
शायद भाभी के साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा था क्योंकि मैंने महसूस किया कि उनकी सांसें भारी होने लगी थीं और उनके दूध ऊपर नीचे को हो रहे थे.

उधर निक्कर में मेरा लंड खड़ा होकर निक्कर से बाहर निकलने को तैयार था.

आगे बहुत कुछ होने की स्थिति बन रही थी. उसे मैं विस्तार से सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूँगा.
आप मुझे मेल करें कि आपको यह मालिक की वाइफ की सेक्स कहानी उत्तेजक लग रही है ना!
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मालिक की वाइफ की सेक्स कहानी का अगला भाग: सेठ की बीवी की चुत गांड की चुदाई- 2

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