ससुर ने मेरी ननद की चूत में लंड पेला

ससुर बहू सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरी ननद ने मेरे ससुर के लंड की तारीफ़ की तो मेरा मन ससुर से चूत मरवाने का हो गया. मैं उनको रिझाने लगी. और एक दिन ससुर जी ने मुझे पकड़ लिया.

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Sasur Bahu Sex Kahani

मेरा नाम रेशमा बेगम है। मेरी शादी एक साल पहले हो चुकी है और इस एक साल में मैं अपनी ससुराल के सभी लोगों को अच्छी तरह जान गई हूँ; घुल मिल गई हूँ मैं सबसे!
मुझे अब ऐसा लगने लगा है कि जैसे मैं इस घर में वर्षों से रह रही हूँ।

मेरी सास और ननद तो मेरे लिए बहुत ही अच्छी हैं; उनकी जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है।

मेरी सुहागरात के दूसरे ही दिन मेरी ननद ने रात में अपने शौहर का लंड मेरी चूत में पेल दिया था।
ऐसा बहुत कम होता है जब कोई बीवी अपने ही शौहर का लंड अपने हाथ से किसी और की चूत में पेल दे।

उसका लंड मेरे शौहर के लंड से मोटा भी है और हैंडसम भी!
ननद मेरे बगल में नंगी बैठी उसका लंड पेलती रही और मेरे नंगे जिस्म पर हाथ भी फेरती रही।
वह अपने मियां के चूतड़ सहला सहला कर मेरी चूत मजे से चुदवाती रही।

उसने अपने मियां से कहा- मेरी चूत चोदी भाभी जान की चूत चोद चोद कर हलवा बना दो। फाड़ डालो इसकी चूत … जैसे तुम मेरी माँ का भोसड़ा फाड़ते हो!

तब मुझे मालूम हुआ कि मेरी ननद अपने शौहर से अपनी माँ का भोसड़ा भी चुदवाती है।
यह जानकर मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गयी।
मुझे चुदवाने में दुगुना मज़ा आने लगा।

आखिर में जब उसका लंड झड़ने लगा तो उसने मेरे साथ बड़े प्यार से झड़ता हुआ लंड चाटा।

बस उसी दिन से मैं ननद की गुलाम हो गयी, मेरी ननद से दोस्ती पक्की हो गई।

एक दिन मेरी सास आ गई।
वह बड़े मूड में थी- बहू, मैं तुमसे एक सवाल पूछ रही हूँ। जवाब सच्ची सच्ची देना?
मैंने कहा- पूछो।

वह बोली- तुम शादी के पहले चुदी हुई थी या नहीं?
मैंने कहा- चुदी हुई तो खूब थी मैं शादी के पहले सासू जी!

बस उसने मुझे गले लगा लिया और बोली- मैं चुदी हुई बहू चाहती थी क्योंकि चुदाई का मज़ा जितना चुदी हुई बहू देती है उतना बिना चुदी हुई दे ही नहीं सकती। मैं भी शादी के पहले खूब चुदी हुई थी. और तेरी ननद तो खूब जमकर चुदी हुई थी। असल बात यह है कि चुदी हुई बहू अपनी सास के भोसड़ा का और ननद की चूत का बड़ा ख्याल रखती है. चुदी हुई सास अपनी बेटी बहू को बड़े बड़े लंड का मज़ा देती है और चुदी हुई ननद अपनी माँ की चूत और भाभी की चूत खूब मजे से चुदवाती है।

सास की ये बातें सुनकर तो मैं ख़ुशी से पागल हो गई।
मुझे यकीन हो गया कि अब मुझे नए नए लंड का मज़ा खूब मिला करेगा।
तब तक मेरी ननद आ गयी।

उसको देख कर सास बोली- बहू, तेरी ननद की माँ का भोसड़ा!
ननद बोली- तेरी बहू की ननद की चूत अम्मी जान!

फिर मुझे भी जोश आ गया तो मैं बोली- तेरी माँ की बहू की चूत ननद रानी!
मैंने सास से कहा- तेरी बेटी की भाभी की चूत सासू जी!

फिर हम तीनों खिलखिलाकर हंसने लगीं।
सास बोली- मैं जानना चाहती थी कि मेरी बहू को गालियां देना आता है या नहीं … इसलिए मैंने गालियां देना शरू किया। बहू, तू तो बड़ी मस्त मस्त गालियां देती है। तू बुरचोदी सच में बड़ी मजेदार है। मैं अपनी बेटी बहू से गालियों के रिश्ते और चोदा चोदी के रिश्ते इसीलिए रखती हूँ कि मुझे अपनी बढ़ती उम्र का पता ही न चले। मेरी जवानी का राज़ है अपनी बेटी बहू के साथ लंड का मज़ा लेना, लंड पेलना और पेलवाना।

इतनी मस्ती और खुल्लम खुल्ला चोदा-चोदी की बातें करने से मुझे कुनबे के सारे लोगों के लंड के बारे में मालूम हो गया।
कुछ ननद ने बताया, कुछ सास ने बताया, कुछ मेरी जेठानी ने बताया.
और बचा खुचा वहां की मस्त जवान लड़कियों ने बता दिया।

बातों बातों में एक दिन ननद बोल भी गई- मेरे अब्बू के लंड के मुकाबले यहाँ किसी भोसड़ी वाले का लंड नहीं है.
ससुर बहू सेक्स कहानी की नींव यहीं से पड़ गयी.

यह बात मेरे दिमाग घुस गई बहनचोद कि यहाँ सबसे बढ़िया और मस्त लौड़ा तो मेरे ससुर का ही है।
बस मैं जल्दी से जल्दी अपने ससुर का लंड खाने की फ़िराक में घूमने लगी।

मुझे यह तो मालूम हो गया कि मेरे ससुर को बहू बेटियां चोदने का शौक है।
ऐसे में मुझे उसका लंड पकड़ने में कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि मैं तो उसकी बहू हूँ।
अगर उसे बहू बेटियां चोदने का शौक है तो मुझे भी अब्बू और ससुर से चुदवाने का शौक है; उनके लंड पकड़ने का शौक है।

मैं बस मौके की तलाश में थी।

एक दिन जब वह अपनी लुंगी बदल रहा था तो मुझे उसके लटकते हुए लंड की एक झलक मिल गयी।
मैंने सोचा जब लटकता हुआ इतना बड़ा और हैंडसम है तो खड़ा होने पर कितना बड़ा हो जाएगा बहनचोद!

लंड के बाहर निकले हुए गोल गोल सुपारे ने तो मेरी जान ले ली।
मेरे मुंह में पानी आ गया और मेरी चूत गीली हो गई।
बस मैं मौक़ा की खोज में घूमने लगी।
मेरे दिमाग में उसका लंड घूमने लगा।

एक दिन जब मैं रात को लगभग 12 बजे उठी तो देखा कि मेरा ससुर मेरी जेठानी की चूत में लंड पेले हुए बड़ी मस्ती से चोद रहा है।

मुझे उसे देख कर जलन होने लगी।
मैंने मन में कहा- भोसड़ी के ससुर मैं भी तेरी बहू हूँ। तू मुझे क्यों नहीं चोदता? मेरी चूत में लंड क्यों नहीं पेलता? मैं तो जेठानी से ज्यादा जवान हूँ। मेरी भी चूचियाँ बड़ी बड़ी है, मेरी भी गांड बड़ी चौकस है।

फिर मैंने सोचा कि आज वह मेरी जेठानी की चूत ले रहा है तो कल मेरी भी चूत लेगा।
मैं चुपचाप अपनी जेठानी की चुदाई देखती रही।

मेरी जेठानी भी बड़ी खूबसूरत और बड़े बड़े मम्मों वाली है।
वह अपने मियां के साथ पड़ोस के घर में रहती है।

आज ही शाम को आई थी और आज ही रात को अपने ससुर से चुदवाने लगी।
मुझे लगा कि वह ससुर से चुदवाने ही आई थी।

ससुर बोला- बहू, किसी दिन अपनी छोटी बहन को ले आना. मैं उसकी चूत में अपना लंड पेलना चाहता हूँ। वह मुझे बड़ी सेक्सी और हॉट लगती है।
जेठानी ने कहा- हां वह भी चूतचोदी ग़ैर मर्दों से खूब चुदवाती है जैसे मैं चुदवाती हूँ। अभी वह अपनी ससुराल में है. जब आएगी तब तेरे पास भेज दूँगी। वह खुद ही पकड़ लेगी तेरा लंड!

उसकी बात सुनकर मेरी झांटें सुलगने लगीं।
मैंने मन में कहा- भोसड़ी के ससुरे … तुझे जेठानी की बहन की चूत याद आ रही है लेकिन अपनी छोटी बहू की चूत याद नहीं आ रही है?

थोड़ा दूर से ही सही पर मैंने ससुर का लंड देख तो लिया।
मैंने मन में कहा- लंड तो भोसड़ी का बड़ा हक्कानी है.

फिर क्या … सारा मज़ा मेरी चूत चोदी जेठानी लेकर चली गई.
अब उसका लंड पकड़ने की मेरी तमन्ना और बढ़ गयी।

मैंने उस दिन की रात बिना लंड के गुज़ार दी।

दूसरे दिन मैं सवेरे से ही ससुर के आगे पीछे घूमने लगी, उसे अपने जिस्म का जलवा दिखाने लगी, कभी अपनी नंगी नंगी टांगें दिखाती कभी अपनी उछलती हुई चूचियाँ दिखाती और कभी अपनी मटकती हुई गांड दिखाती।

वह भी मुझे बड़े गौर से देखने लगा।

मैं कभी उससे आँखें मिलाती, कभी सेक्सी अदा से मुस्करा देती, कभी उसे तिरछीं निगाहों से देखती तो कभी उसके बदन से छू करके आगे निकल जाती।

किसी न किसी तरह मैं उसके लंड में आग लगाना चाहती थी।

रात के ११ बजे थे।
मेरी सास अपने मायके गई थी।
ननद थी, पर कहाँ थी और क्या कर रही थी, मुझे कुछ भी नहीं पता।

अचानक मेरे फोन की घंटी बज उठी।
मैं फोन पर जान बूझ कर खुल कर बातें करने लगी।

मेरा ससुर बगल में ही बैठा था; वह सब सुन रहा था।

मैं जो बोल रही थी वही उसे सुनाई पड़ा।
उधर की आवाज़ उसे बिल्कुल नहीं सुनाई पड़ी।

मैंने कहा – हां बोल भोसड़ी की रिया … क्या हुआ?
“अच्छा ऐसी बात है तो फिर पकड़ ले न उसका लंड!”
“अरे कुछ नहीं होगा पगली!”
“अपनी माँ के भोसड़े में भी पेल दे लंड … मोटा लंड सबको पसंद आता है यार!”
“ठीक है, मुझे भी कभी पकड़ा देना!”

फोन बंद हुआ तो ससुर ने पूछा- किसका फोन था बहू रानी?
मैंने कहा- मेरी फूफी की बेटी रिया का फोन था.

“रिया तुमसे खुल कर बात करती है. किसी दिन उसे बुला लो न बहू रानी!”
“हां हां बुला लूंगी। पर तुम क्या करोगे?”

वह उठा और मुझे अपनी बाँहों में भर कर बोला- मैं उसके मुंह से भी गालियां सुनूंगा बहू रानी जैसे मैंने तेरे मुंह से सुनी हैं गालियां। बड़ी प्यारी प्यारी गालियां देती हो तुम रेशमा! तुमने मेरा दिल जीत लिया। तूने तो मेरे लंड में आग लगा दी है रेशमा बहू!

“आग तो तेरी बड़ी बहू लगाती है तेरे लंड में … मैं क्या चीज हूँ?” मैंने मारे जलन के कहा।
“तुम तो उससे ज्यादा खूबसूरत हो, सेक्सी हो और हॉट हो रेशमा!”

“तो क्या करोगे तुम मेरा?”
“रानी बनाऊंगा मैं तुम्हें … रात भर के लिए बीवी बनाऊंगा मैं तुम्हें … तुम्हारे कपड़े उतार कर मैं तुम्हारे साथ नंगा लेटूँगा रेशमा!”

मैंने उसे और ललकारा- तेरे लंड में ताकत है इतनी? कुछ कर पायेगा तेरा लंड?

उसने अपनी लुंगी खोल दी और कहा- लो पहले पकड़ कर देख लो मेरा लंड, बहू रानी … तुम्हें अंदाज़ा हो जाएगा!

लंड तो मादरचोद पहले से ही खड़ा था।
मैंने हाथ बढ़ाकर पकड़ लिया लंड … तो वह और फनफना उठा।

तब मैंने मन में कहा- अब आया बहनचोद मेरे हाथ में ससुर का लंड, जिसके लिए मैं इतने दिनों से तड़प रही थी.

लंड पकड़ते ही मेरे अंदर की रंडी जाग उठी।
मेरी अम्मी जान ने एक बार कहा था- बेटी रेशमा, हर औरत अंदर से एक रंडी होती है उसके मन में गैर मर्दों से चुदवाने की इच्छा जरूर होती है और मौक़ा पाकर वह चुदवा भी लेती है। दुनिया में ऐसी कोई औरत नहीं जो पराये मर्दों से चुदवाना न चाहती हो.

अम्मी जान ने यह भी कहा था कि हर औरत को ग़ैर मर्दों से चुदवाने का हक़ है। मैं भी गैर मर्दों से चुदवाती हूँ। मुझे भी ग़ैर मर्दों के लंड बहुत पसंद हैं।

यह ख्याल आते ही मैंने ससुर का लंड बड़े प्यार और मजबूती से पकड़ लिया; पकड़ कर उसे हिला हिला कर मस्ती करने लगी।
उसने मुझे नंगी करके अच्छी तरह दबोच लिया।

मेरा पूरा नंगा बदन उसने अपने नंगे बदन से चिपका लिया।
लेकिन मैंने उसका लंड नहीं छोड़ा, मैं लंड मुट्ठी में लिए हुए सहलाती रही।

मेरे ससुर का नाम है ताहिर!
वह 48 साल का हट्टा कट्टा गोरा चिट्टा मर्द है।
जैसा मैंने उसके लंड के बारे में सुना था वैसा ही पाया।
मोटा तगड़ा लंड बड़ा शानदार था.
मैं मन ही मन बड़ी खुश हुई और लंड की बड़े प्यार से कई चुम्मियाँ ले लीं; पेल्हड़ भी मजे से चूमे।

मैं मस्ती में चूर हो गयी।
मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी।

वह भी भोसड़ी वाला मेरे नंगे जिस्म से खेलने लगा, मेरे मम्मे दबाने लगा, मेरी चूत पर उंगलियां फिराने लगा; मेरे चूतड़ों पर, मेरी गांड पर हाथ फेरने लगा; मेरे गाल, मेरे होंठ चूमने लगा.

फिर बोला- रेशमा बहू, तुम बड़ी बहू से ज्यादा खूबसूरत हो, ज्यादा हसीन हो और ज्यादा अच्छी लंड पकड़ती हो। तुम्हारा जिस्म बड़ा सेक्सी है. मुझे तुम्हारी ही जैसी बहू बेटियों को चोदने में मज़ा आता है जिनका नंगा जिस्म बिल्कुल तुम्हारे नंगे जिस्म की तरह हो.

तब मुझे पक्का मालूम हो गया कि मेरे मादरचोद ससुर को बहू बेटियां चोदने का शौक है।

फिर मैंने उसे नीचे जमीन पर लिटा दिया और अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी।
वह मेरी चूत चपर चपर चाटने लगा और उसका लंड चाटने लगी।

मुझे लंड का टोपा चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
बिना झांट का एकदम चिकना चिकना लंड बड़ा हैंडसम लग रहा था।

कल यह भोसड़ी का लंड मेरी जेठानी के कब्जे में था, आज यह मेरे कब्जे में है।

उत्तेजित वह भी था और उत्तेजित मैं भी थी।

इतने में वह उठा और मेरे बूब्स फिर से मसलने लगा।
मैं भी उसके मरदाने जिस्म का मज़ा लेने लगी।

फिर उसने मुझे नीचे लिटा दिया, मेरी टांगें फैला दीं.
तो उसके सामने मेरी चूत एकदम खुल गयी।

उसने लंड उसी पर टिका दिया और फिर एक ही धक्के में पूरा लंड पेल दिया अंदर!
मैं तो चुदी हुई थी इसलिए दर्द तो हुआ नहीं … पर चिल्ला पड़ी- भोसड़ी के ससुरे … तूने इतना बड़ा लंड पेल दिया मेरी छोटी सी चूत में! तुझे रहम नहीं आया? बहुत बड़ा हरामजादा है तू … तेरी बहन का भोसड़ा … यह मेरी चूत है, तेरी जागीर नहीं … ज़रा संभल कर चोद न … प्यार से चोद न, मज़ा ले ले के चोद! मैं कहीं भागी जा रही हूँ क्या?

फिर वह सच में बड़ी मस्ती से चोदने लगा मुझे!
और मैं भी अपनी चुदाई का भरपूर मज़ा लेने लगी।

इतने में अचानक मेरी ननद एकदम नंगी हमारे सामने गई।
उसे देख कर मैं समझ गई कि वह किसी से लगी हुई थी; किसी के लंड का मज़ा ले रही थी।
पर कौन था यह मुझे मालूम नहीं।

मेरे ससुर ने उसे इस अवस्था में देखा तो उसका मन डोल गया।
उसने ननद का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो वह खिंचती चली आई।

ससुर ने उसे चित लिटा कर गच्च से पेल दिया अपना लंड उसकी चूत में!
मैं यह देख कर चकित रह गयी कि एक बाप ने अपनी ही बेटी की चूत में लौड़ा घुसा दिया।
लेकिन फिर सोचा कि यह तो होता ही रहता है हमारे यहाँ!

मेरे मुंह से निकला- ससुर जी यह क्या हो रहा है? यह क्या किया तुमने? मेरी ननद तेरी बेटी है।
वह बोला- मैं तेरी ननद की चूत चोद रहा हूँ बहू रानी! मेरे लंड के सामने जो भी चूत आएगी, उस चूत में मेरा लंड घुस जाएगा. वह कोई भी हो, वह चाहे जिसकी चूत हो … इससे मेरे लंड को कोई फर्क नहीं पड़ता।

तब तक पीछे से आवाज़ आई- हां यार ताहिर, तुम ठीक कह रहे हो। मेरे भी लंड के सामने जो चूत आती है मेरा लंड बे रोक टोक के उसी में घुस जाता है।

मुझे नंगी देख उसने मेरी चूत में लंड पेल दिया बिना कोई देर लगाये!
वह बोला- अब देख न, तेरी बहू की चूत मेरे सामने है तो मैंने लौड़ा पेल दिया तेरी बहू की चूत में, ताहिर!

तब मुझे मालूम हुआ की वह मेरी ननद का ससुर है साहिर।
इसका मतलब की ननद चूत चोदी अपने ससुर से चुदवा रही थी।

साहिर बोला- देख यार ताहिर, मैं तेरी बहू चोद रहा हूँ, तुम मेरी बहू चोद रहे हो. कितना मज़ा आ रहा है। तेरी बहू बड़ा मज़ा दे रही है।

मेरा ससुर बोला- तेरी बहू भी बड़ा मज़ा दे रही है।
ननद बड़ी मस्त होकर अपनी कमर हिला हिला कर चुदवा रही थी।

मज़ा मुझे भी बहुत आ रहा था ननद के ससुर से चुदवाने में!
वह भी बड़ा शातिर बन्दा था चूत चोदने में … खूब हचक हचक कर चोद रहा था; छक्के छुड़ा रहा था वह मेरी चूत में!
मैं समझ गयी आखिर कार मेरी ननद माँ की लौड़ी अपने ससुर के लंड के पीछे पीछे क्यों लगी रहती है.

हम दोनों अगल बगल लेटी हुईं थीं।
मेरा मुंह उसकी गांड की तरफ था और उसका मुंह मेरी गांड की तरफ।
मैं उसकी चुदती हुई चूत देख रही थी और वह मेरी चुदती हुई बुर!

उधर वो दोनों ससुरे एक दूसरे की बहू चोदने का मज़ा ले रहे थे।
पहले दोनों ने अपनी अपनी बहू की चूत चोदी, अब एक दूसरे की चोद रहे हैं।
अम्मी ने सही कहा था कि बेटी रेशमा लंड जब खड़ा होता है तो वह किसी की भी चूत में घुस जाता है फिर वह चाहे बेटी की चूत हो चाहे माँ की चूत! इसी तरह जब चूत जब गर्म हो जाती है, चुदासी हो जाती है तो वह किसी का भी लंड पेलवा लेती है फिर वह लंड चाहे बाप का हो चाहे बेटे का!

उस समय हम दोनों की खूब घपाघप चुदाई हो रही थी; धच्च धच्च, भच्च भच्च, फच्च फच्च आवाज़ें चारों तरफ फ़ैल रहीं थी।

जितनी बेशर्मी से दोनों ससुर चोद रहे थे, उतनी बेशर्मी से हम दोनों बहुएं भी चुदवा रही थीं।

आखिर में हमने जब झड़ते हुए लंड चाटे तो उसका मज़ा ही कुछ और था।
उसके बाद हम सब नंगे नंगे ही बैठ कर सुस्ताने लगे।

लगभग आधे घंटे में फिर दोनों लंड टनटना उठे।
चुदाई फिर शुरू हो गई और फिर रात भर होती रही।

अगले दिन मेरी ननद बोली- अरे रेशमा भाभी जान, तेरी चूत चोदी ननद बड़ी चुदक्कड़ हो गई है।
तब तक उधर से आवाज़ आई- अरे बहू रानी, तेरी ननद की माँ भी भोसड़ी वाली बड़ी चुदक्कड़ है।
यह आवाज़ मेरी सास की थी।

उसने मुझसे पूछा- कैसा लगा तुम्हें अपनी ननद के ससुर का लंड, रेशमा बहू?
मैंने कहा- लंड तो बड़ा जबरदस्त है उसका सासू जी! किसी दिन तेरे भोसड़े में पेलूँगी।

वह बोली- तुम किसी दिन पेलोगी लंड मेरी चूत में … मैं तो आज ही पेलूँगी तेरी चूत में अपने देवर का लंड!

फिर क्या … रात में हम तीनों सास बहू ननद ने एक दूसरे की चूत में लंड पेल पेल कर खूब लिया सामूहिक चुदाई का मज़ा।

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