रजनी की चुदाई उसीकी जुबानी-7

पंकज की गांड वाले बातें सुन कर मेरी तो गांड में ही खुजली मचने लग गयी।

मन कर रहा था की अभी बोल दूं पंकज को, “मार साले मेरी गांड, रगड़ मेरी गांड को अभी की अभी आग ठंडी कर इसकी – पर फिर ख्याल आया रजनी भी तो है “।

जब मैंने बार बार गांड की बात की तो पंकज बोल ही पड़ा। “आभा क्या बात है आज तुम गांड की बात कुछ ज़्यादा ही कर रही हो, बताओ तो सही क्या गांड में लंड लेने का मन है ? बताओ मुझे मुझसे क्या छुपाना”?

पर अब मैं चुप चाप चुदाई का आनद ले रही थी । नीचे चूत में से आवाज़ें आ रही थी फच…….फच……फच…..फच…..।

अब आगे की कहानी :–

फच…….फच……फच…..फच…..।

तभी बाहर के कमरे से बातों की आवाज़ सुनाई दी। “शायद कुणाल आ गया था”। मुझे तो पता ही था।

पंकज ने पूछा, ” बाहर कोई आया है, किसी ने आना था क्या “?

“हमारे घर तो दो ही मर्द आते हैं, एक तुम और दूसरा रजनी का बॉय फ्रेंड कुणाल “। मैंने कहा।

पंकज हैरानी से बोला, “रजनी के बॉय फ्रेंड का नाम कुणाल है तुमने कभी बताया नहीं ” !!

“ये मैं क्या बोल गयी – अब क्या होगा “?

मैंने बात संभाली, “तुमने कभी पूछा ही नहीं, मगर कुणाल नाम में ऐसा क्या है जो तुम हैरान हो गए ?

“मेरा भी एक दोस्त है कुणाल, मेडिकल रिपेरजेंटेटिव है “।

मैं हैरान हो गयी, “हे भगवान ये तो फिर वही कुणाल है। अब क्या होगा” ?

फिर मैंने सोचा अब क्या हो सकता है – “अब तो वही होगा जो मंज़ूरे खुदा होगा”।

मगर इधर हमारी चुदाई चालू थी।

बाहर ड्राइंग रूम से बातों की आवाजें आनी बंद हो गई थी – मगर साथ के छोटे कमरे से सिसकारियों की आवाजें आ रहीं थी। मतलब रजनी और कुणाल की चुदाई शुरू हो चुकी थी।

मगर आज मेरे दिमाग में चूत चुदाई से भी आगे बहुत कुछ चल रहा था। गांड में लंड की एंट्री, गर्मागर्म मूत चूचियों ऊपर – मुंह पर और ना जाने कहाँ कहाँ

“एक दूसरे के ऊपर मूतने भी एक अजीब मजा है – अब किसी दिन पंकज से भी अपने ऊपर मूतवाऊंगी”।

“किसी दिन क्यों आज ही क्यों नहीं ?

मैं अब नीचे थी और पंकज मुझे ऊपर से चोद रहा था। टांगें मेरी फ़ैली और ऊपर की और उठी हुए थी, पंकज का लौड़ा पूरा मेरे अंदर था। पंकज ने कस कर मुझे पकड़ा हुआ था। जोर जोर से धक्के लग रहे थे – चूत निहाल हो रही थी – गर्मागर्म लेसदार नमकीन पानी से भरी हुई I मजा आने ही वाला था।

पंकज की एक आदत थी, जब मजा आने वाला होता था तो पूछता था, “आभा तुम्हारा होने वाला है ? मतलब मेरी चूत पानी छोड़ने वाली है क्या ” ?

और जब तक मैं हाँ ना कहूँ मेरी चुदाई जारी रहती थी। जब मैं कह देती थी की ‘हाँ अब मेरा होने वाला है’ यानी मेरी चूत में बाढ़ आने वाली है तो पंकज के धक्कों की रफ्तार दुगनी हो जाती थे मानो वो पहली बार चूत मIर रहा है – या यूं कह लो की खुद ही पूरा का पूरा चूत में ही घुस जाना चाहता हो।

उस दिन ताबड़तोड़ चुदाई करते हुए मेरे कान में फुसफसाया ,”आभातुम्हारा होने वाला है क्या – झड़ने वाली हो ? ” मेरे मुंह से हूँ हूँ की आवाज़ निकली और पंकज ने धक्को की स्पीड बढ़ा दी। लंड पूरा बाहर निकाल निकाल कर अंदर डाल रहा था। आवाज़ें आ रही थी फच फच फच और मेरी चूत से निकलता हुआ पानी छिटक मेरी जाँघों और पंकज के लंड और टट्टों पर फैल रहा था .

मैं सोच रही थी, “क्या मस्त चोदता है “।

तभी मैंने एक लम्बी सिसकारी भरी , “आअह …. आअह…. “और मेरा पानी निकल गया – झड़ गयी मैं “।

पंकज को भी पता लग गया होगा की मेरी चूत में एकदम बरसात हो गई है, उसने भी पांच सात लम्बे लम्बे तेज धक्के लगाए और सारा वीर्य मेरे अंदर छोड़ दिया।

“भर गयी मेरी चूत पंकज के सफ़ेद लेसदार गरम गरम वीर्य से ,क्या स्वर्ग जैसी अनुभूति थी “।

उधर साथ वाले कमरे से सिसकारियों की आवाज़ें लगातार आ रही थी। “रजनी की मस्त चुदाई चल रही थी “।

मैं और पंकज झड़ने के बाद बिस्तर पर ही लेट गए। पंकज बोला, “आवाजें साथ वाले कमरे से आ रही हैं, रजनी के बॉय फ्रेंड ही होगा “।

“लगता तो है “। मैं क्या कहती – मुझे तो पता ही था।

“मस्त चुदाई हो रही है रजनी की भी ” पंकज हंस कर बोला “। मैं भी हंसी, “लगता तो ऐसा ही है “।

पंकज बोला, “अच्छा एक बात बताओ आभा, इस कुणाल ने तम्हें चोदा है ” ?

“हाँ चोदा है, तुम भी तो रजनी की चूत चोदते हो। लेकिन मेरे बॉय फ्रेंड तुम ही हो, कुणाल मेरे लिए खाली मजे लेने के लिए। बॉयफ्रेंड वो रजनी का ही है।

“एक बात सोचो पंकज, जब एक घर में एक लड़की चुद रही हो तो दूसरी की क्या हालत होती होगी “।

“एक चुद रही होती है, दूसरी चूत में उंगली चला रही होती है और लंड के सपने देख रही होती है। यही कारन है की जिसका भी बॉय फ्रेंड आता है वो दूसरी की चूत की प्यास बुझाता है और चूत को ठंडा करता है I

“ये दुनिया ऐसे ही चलती है। चुदाई जितनों से भी मगर दोस्ती और प्यार एक से ही होता है। तुम मेरे बढ़िया दोस्त हो, चूत तुमसे चुदवाने में ही असली मजा मिलता है “।

पंकज ने भी हाँ में सर हिलाया। “हमारी चुदाई पूरी हो चुकी थी दोनों झड़ चुके थे ”।

” मैं चलूँ ? कुणाल रजनी की चुदाई खत्म होने से पहले निकल लेता हूँ “।

मैंने कहा,” अरे पर क्यों ? आज मिल ही लो, इसमें क्या है। अब कुछ छुपा थोड़ा है “। क्या पता वो तुम्हारे वाला ही कुणाल निकले – “मैं हंसी ”

पंकज थोड़ा हिचकिचाया, “फिर भी, अच्छा लगेगा क्या “?

मैं समझ गयी की वो कुछ असहज महसूस कर रहा है मैंने उसको थोड़ा सहज करने की कोशिश क। “देखो पंकज तुम जानते ही हो रजनी का भी एक बॉय फ्रेंड है। तुम मेरे साथ साथ रजनी को भी चोदते हो। कुणाल भी जनता है की मेरा एक बॉय फ्रेंड है, फिर भी वो जब भी आता है तो रजनी के साथ साथ मेरी चूत भी रगड़ता है। अब इसमें शर्म और हिचकिचाहट के लिए कहाँ गुंजाईश बची है “।

पंकज समझ गया और हम कपड़े पहन कर ड्राइंग रूम में आ गए।

थोड़ी देर तक सामने वाले छोटे कमरे से आवाजें आनी बंद हो गयी – लगता था चुदाई खत्म हो गयी थी । कुछ देर बाद कुणाल और रजनी भी कपड़े पहन कर बाहर आ गए।

जैसे ही पंकज और कुणाल ने एक दुसरे को देखा, वो चिल्ला पड़े ,”अबे कुणाल तू ? ……… अबे पंकज तू “?

मतलब दोनों एक दूसरे को जानते थे ?

मैंने और रजनी ने लगभग इक्क्ठे ही पूछा, “तुम एक दुसरे को जानते हो “?

“अरे हम बीएससी तक इक्क्ठे पढ़े हैं “। पंकज बोला, ” फिर ये मेडिकल लाइन में चला गया और मैं कंप्यूटर लाइन में “।

कमाल का इत्तेफाक था I मगर मैं सोच रही थी की क्या इन्होने हमारे बारे में एक दुसरे को बताया है ? क्या रजनी भी यही सोच रही थी ?

“क्या इन दोनों ने हम दोनों को चोदने की बात भी आपस में शेयर की है”?

हमे चुप देख कर कुणाल बोला क्या हुआ, तुम लोग चुप क्यों हो ? ये तो नहीं सोच रही की हम तुम लोगों के बारे में एक दुसरे से बात करते हैं की नहीं – तो सुनो हम एक दुसरे से एक दुसरे की गर्ल फ्रेंड की सारी बातें शेयर करते हैं, मगर मुझे ये नहीं पता था की आभा, तुम, इस पंकज की गर्ल फ्रेंड हो “। पंकज बोला, “और हाँ मुझे भी नहीं मालूम था की ये रजनी इस कुणाल की गर्ल फ्रेंड है ” हम तो तुम एक दूसरी के बॉय फ्रेंड का नाम तक भी नहीं जानते थे।

जब हम कुछ देर और नहीं बोली तो बात पंकज ने ही शुरू की, “देखो खुल कर बात करते हैं, छुपा छपाई का कोइ फायदा नहीं। हम ये तो नहीं जानते थे की हमारी एक दुसरे की गर्ल फ्रेंड तुम हो , मगर हम ये शेयर करते थे की हम में से जो जब भी अपनी गर्ल फ्रेंड को चोदने जाता ही तो वह उसकी सहेली को भी चोदता है”।

हमारी हिचकिचाहट दूर करने के लिए पंकज ने मेरे होंठ अपने होठों में लिए और चूसने लगा – कुणाल ने भी रजनी की चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा।

असल में तो मैं और रजनी भी यही चाहती थी आज रात दोनों को रोक कर चुदाई का फुल मजा लिया जाए, मगर इस तरह से होगा ये नहीं सोचा था। खैर पंकज और कुणाल की चूसा चुसाई ने हमारी शर्म और हिचकिचाहट कम कर दी।

कुणाल और पंकज ये जानते ही नहीं थे की हम लोगों की प्लानिंग उनको रात भर रोक कर पूरी चूत और गांड चुदाई करवाने की थी।

कुछ देर बातें करने के बाद राजन बोला, “बहुत देर हो गयी है – अब चलें पंकज ” ?

“पंकज भी बोला, “हाँ, चलो आभा, रजनी चलते हैं”।

अब रजनी ने बात संभाली, “सुनो तुम दोनों, अब जब सारी बात खुल ही गयी है तो रात यहीं रुको “।

पंकज और कुणाल ने एक दुसरे की तरफ देखा। पंकज ने कुणाल से कहा, “क्यों कुणाल,आईडिया तो बुरा नहीं ” !! कुणाल ने भी हाँ में सर हिलाया और दोनों बैठ गए।

और हम सोच रहीं थीं “दो लंड दो चूतें और दो ही गांड के छेद – क्या मज़ा रहेगा “।

“रजनी की चुदाई उसी की जुबानी ” के भाग 8 , 9 ,10 भी जल्द ही आएंगे।

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