मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 9 – रूबी की ‘हां’ और और रितु की लंड चुसाई

पिछला भाग: मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 8

शुक्रवार:

मैंने रितु की तरफ देखा वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी। मैं भी समझ रहा था की रूबी ने क्या कहा होगा और क्यों कहा होगा “।

मैंने कहा, “नहीं रितु कुछ नहीं चाहिए”। रितु वहीं खड़ी रही।

मैंने रितु से पूछा, “क्या हुआ रितु कुछ कहना है क्या ? कुछ चाहिए “?

रितु ने हां में सर हिला दिया।

मैं समझते हुए भी अनजान बन रहा था। मैंने कहा, “हां बोलो रितु “।

रितु ने अब साफ़ साफ़ कह दिया, “सर मुझे आपका लंड चूसना है और लंड का गर्म मीठा पानी अपने मुंह में छुड़वाना है, कल रात की तरह I बहुत अच्छा था। गर्म गर्म, हल्का सा नमकीन हल्का मीठा पानी- खुशबू भी आ रही थी “।

मुझे रात की रितु की गांड चुसाई भी याद आ गयी I

रितु चूसती तो बहुत ही बढ़िया थी। ना की कोइ गुंजाइश नहीं थी। मैंने कहा, “ठीक है चलो”।

हम अंदर कमरे में आ गए। रितु ने पहल की और अपने सारे कपड़े उतार दिए। दिन की रोशनी में रितु एक परी लग रही थी। इतनी खूबसूरत ? इतना कड़क जिस्म ? मेरा मन तो किया की चोद ही दूं। मगर फिर सोचा रात भी तो है। और रूबी की पीठ के पीछे मैं रितु की चुदाई नहीं करना चाहता था I मैंने सोचा जो रितु चाह रही है इसे करने दूं।

मैंने पेण्ट की ज़िप खोल कर लंड निकल लिया और उसकी तरफ देखा।

वो बोली ,”सर ऐसे नहीं, पूरे कपड़े उतारिये। आपको नंगा देख कर मुझे कुछ कुछ होता है। लंड चुसाई का पूरा मजा लेना है मुझे “।

मैंने सारे कपड़े उतार दिए और बेड पर लेट गया। रितु आयी और मेरा लंड चूसने लगी। लंड खड़ा होने लगा। रितु लंड के सुपाड़े पर जुबान फेर रही थी और सुपाड़े के छेद पर जुबान फेर रही थी। बड़ा मजा आ रहा था। चूसते चूसते रितु चूतड़ हिलने लगी। मैंने पूछा, “रितु चुदाई का मन कर रहा है क्या”?

रितु बोली सर, “मजा लेने का मन तो कर रहा है, लेकिन आज मैंने खाली चूस चूस कर आपका गरम गरम पानी अपने मुंह में लेना है। मेरा तो रात की चुदाई के समय ही आपके लंड का पानी पीने का मन था मगर आप तो मुझे और मैडम को चोदते ही जा रहे थे I इसी लिए मैं आप के लंड का गर्म पानी चाटने आधी रात को आपके कमरे में गयी थी “।

रितु फिर मेरा लंड चूसने लगी। उसके चूतड़ जोर जोर से हिलने लग गए।

रितु फिर मेरा लंड चूसने लगी। उसके चूतड़ जोर जोर से हिलने लग गए।

मैंने फिर कहा, “रितु मेरे ऊपर आ जा और अपने चूतड़ मेरे मुंह के ऊपर करदे। तुझे तेरी चूत चूस कर मजा देता हूं। तेरे दोनों काम हो जायेंगे”।

मैं बेड पर लेट गया। लंड खूंटे की तरह खड़ा था। रितु रात की ही तरह मेरे ऊपर लेट गयी। मेरा लंड उसके मुंह में और उसके चूतड़ मेरे मुंह पर। रात की ही तरह रितु ने अपने हाथों से अपने चूतड़ खोल दिए । मतलब गांड का छेद चुसवाना था।

दिन की रोशनी में गांड का छेद दिखाई दे रहा था। गुलाब की छोटी गोल पंखुड़ी जैसे रितु की गांड की छेद के किनारे कल रात की गांड चुदाई के कारण लाल हुए पड़े थे।

रितु घूमी और अपनी चूत मेरे मुंहके ऊपर ले आयी। अब मैं रितु की गांड का लाल हुआ पड़ा छेद चूस रहा थाऔर रितु मेरा लंड चूस रही थी।

मुझे कहने में कोइ हिचकिचाहट नहीं की मेरी ऐसी ज़बदस्त लंड चुसाई कभी नहीं हुई थी और ना ही मैंने रितु की फुद्दी से अच्छी फुद्दी चूसी थी। रितु की फुद्दी का पानी अजीब ही गंध का था। एक मीठी मीठी गंध और नमकीन मीठा स्वाद। मुझे तो रितु की फुद्दी का पानी चाटने और पीने में भी सी अजीब तस्सली हो रही थी।

रितु की चूत का स्वाद और खुशबू मुझे मस्त कर रहे थे।

रितु अब जोर जो से चूतड़ घुमाने लगी। जोर जोर फुद्दी मेरे मुंह पर रगड़ने लगी जोर जोर से लंड चूसने लगी। अब रितु आवाजें भी कर रही थी उन्ह….उन्ह…उन्ह।

क्या झड़ने वाली थी? मगर मैं रितु की चूत का पानी और चाटना चाहता था पीना चाहता था । रितु दो बार झड़ेगी तो दो बार पानी छोड़ेगी और मैं दो बार रितु की चूत का पानी पियूंगा।

और तभी झड़ गयी रितु। लंड मुंह में था इस लिए सिसकारियों के आवाज़ दब रही थी उउन उउन की आवाजें आ रही थी। रितु ने अपनी फुद्दी मेरी मुंह पर दबा दी। मेरा सारा मुंह पानी से भर गया। मजा आ गया। गर्म खुशबूदार पानी कुछ मीठा कुछ नमकीन।

कुछ चुसाई के बाद रितु गर्म हुई और फिर झड़ गयी, मगर इस बार मैं भी रितु के साथ झड़ गया एक लम्बी आआआह के साथ। मेरी ये आआआह रितु की चूत में दब गयी।

रितु के चूतड़ हिलने बंद हो गए थे। उसका मुंह मेरे सफ़ेद लेसदार पानी से भरा हुआ था। लंड मेरा अभी भी रितु के मुंह में था।

मेरा लंड ढीला होने लगा, बैठने लगा। रितु ने जबान हिलाई और सारा मेरा वीर्य जो उसके मुंह में था गले से नीचे उतार लिय। रितु मेरा लंड चाट चाट कर साफ़ करने लगी।

पूरी तरह लंड चूसने और चटने के बाद रितु उठी और खड़ी हो गयी। थैंक यू सर I आप के लंड में से बहुत अच्छा खुशबू वाला गरम और बहुत सारा पानी निकलता है। मेरी तसल्ली कर दी आप ने। रितु ने मेरे होंठ चूसे और बाथ रूम की और चली गयी। मैं भी बाथ रूम गया। पेशाब किया और लंड साफ़ किया और बाहर आ कर कपड़े पहन लिए।

तीन बज चुके थे। रूबी अभी भी नहीं आयी थी। “एक बार ऑफिस चले जाओ तो निकलना मुश्किल ही होता है”।

तभी फोन की घंटी बजी। रूबी का फोन था। रितु ने फोन मुझे दिया, “मैडम ने आप से बात करनी है”।

मैंने फोन लिया। रूबी बोली, “विक्की क्या कर रहा है ? रिज पर घूमने का मन है क्या ?

मैंने कहा “घूम लेते हैं। घर में भी तो बैठे ही हैं”।

रूबी बोली, “तो ठीक है मैं गाड़ी घर भेज कर रिज पर जा रही हूं। तू रिज पर आजा। थोड़ा घूम लेते हैं। मैं तुझे चर्च के साइड पर बैठी मिलूंगी “।

मैंने फोन रितु को देकर कहा, ” मैं रिज पर जा रहा हूं रितु, रूबी मुझे वहीं मिलेगी”।

“ठीक है सर”, और ये कह कर उसने मुझे होठों पर एक तगड़ा किस किया। मैंने भी उसकी चूचियां और चूतड़ दबाये और बाहर निकल गया।

रूबी मेरा इंतज़ार ही कर रही थी।

हम ऐसे ही इधर उधर रिज पर घूमते रहे। फिर नीचे मॉल रोड पर चले गए, फिर रिज पर आ गए। “शिमला में घूमे वाले यही करते हैं “।

रिज पर आ कर हम फिर बैठ गए।

रूबी ने पूछा, “विक्की क्या किया दिन भर”? मैंने लोअर बाजार और काली बाड़ी जाने से ले कर सारी बातें बताई – रितु के लंड चूसने की भी “।

मैंने रूबी से पूछा, “रूबी तुमने कहा था रितु को मेरे साथ ये सब करने को “?

रूबी ने मेरे हाथ पर हाथ रख कर कहा, “विक्की तू शिमला आया है तो साथ सेक्स – चुदाई की मस्ती भी साथ ले कर आया है। कल मैंने तेरे लंड का पानी पीया था। रितु ने मुझे देखा होगा। आज सुबह जब मैं ऑफिस जाने लगी तो रितु मेरे पीछे पीछे आ गयी – अक्सर वो मेरे पीछे आती नहीं। मैं समझ गयी कुछ कहना चाहती है। मैंने उससे कहा, “रितु क्या बात है कुछ काम है क्या “। और वो चुपचाप खड़ी रही। मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा, “रितु बता क्या बात है “?

रितु बोली, “मैडम मैंने सर के लंड का पानी पीना है”। मैंने कहा, “रितु तू विक्की से चूत भी चुदवा चुकी है, गांड भी चुदवा चुकी है, उसका लंड भी चूस चुकी है I अब उसे बोलने में क्या परेशानी है ,विक्की को बोल दे, चुसवा लेगा लंड तेरे से “?

रितु ने कहा, ” मैडम, सर आपके हैं। जो कुछ मैंने उनके साथ किया है -चूत चुदवाई है, गांड चुदवाई है या उनका लंड चूसा है वो सब आपके सामने आप की मर्ज़ी से किया है। अगर आप घर पर नहीं हैं तो मैं कैसे सर के साथ ये सब कर सकती हूं “?

शुक्रवार की मस्त रात

“रितु ने मेरा लंड मुंह में लेने के लिए भी रूबी से इजाज़त ली। वो भी तब जब कि वो रूबी कि सामने मुझसे चुद चुकी थी” I

“रितु इतनी वफादार है रूबी तेरी “? मैं तो हैरान ही हो गया, मेरे मुंह से सिर्फ यही निकला, “कमाल है “?

रूबी बोली, “ये कमाल ही है विक्की”। आज के जमाने में ऐसे भी लोग हैं।

मैंने फिर पुछा, “तो रूबी, तूने क्या कहा “?

“मैंने क्या कहना था ? मैंने कहा कि जब तू घर आये तो वो तुझ से कहे की मैंने उसे – रितु को – तेरा खास ख्याल रखने के लिए बोला है”।

बिलकुल यही रितु ने मुझ से बोला था। तो ये रूबी की मर्ज़ी से हुआ। “महान हैं ये दोनों, रूबी भी और रितु भी”।

मैंने रूबी से कहा, “कमाल के उसूल हैं तुम्हारे रूबी। तू और ये रितु, दोनों महान हो “।

रूबी ने मेरा हाथ दबाया ,” अच्छा ? क्या तू महान नहीं है ? उस दिन जब रात को रितु तेरा लंड चूस रही थी, तू चाहता तो उसे उसी दिन चोद सकता था वो मना थोड़ा करती ? मगर तूने नहीं चोदा और मुझे बताया की वो रात को तेरे कमरे में आयी थी। उन्नीस साल की खूबसूरत कड़क जवान लड़की और टाइट चूत जब सामने नंगी खड़ी हो तो अपने आप को काबू में रखना हर एक के बस में नहीं है “।

रूबी बोलती गयी,”एक तरफ रितु है बिनब्याही – कभी कभार चुदने वाली – सुन्दर कड़क शरीर, तनी हुई चूचियां, सख्त चूतड़, टाइट फुद्दी की मालकिन, जिसको चोदने में ज़्यादा मजा ही मजा है। दूसरी तरफ मैं हूं, 36 साल की शादीशुदा, एक बच्चे की मां। अब मेरी फुद्दी भी रितु जैसी टाइट नहीं है, चोदने में भी वैसा मजा नहीं देती होगी – फिर भी तू रितु से ज़्यादा मुझे चोदने में दिलचस्पी रखता है। अब बता, तू महान नहीं है “?

रूबी की शतप्रतिशत बातें सही थी। मैं उसे धोखा नहीं दे सकता। मैं उससे प्यार करता था – वो भी बचपन से। मैंने बस उसका हाथ दबा दिया। घर पर होता तो उसे चूम लेता।

मैंने रूबी से रितु की आधी रात को कमरे में आने और लंड चुसाई वाली बात बताई।

रूबी कुछ सोच कर बोली ,”विक्की, चूत की खुजली तो रबड़ के लंड दूर कर देते हैं। अब तक हमने वो लंड गांड में नही डाले थे – अब डालेंगी”।

मगर जो गर्मी मर्द के लंड में होती है। औरत के मूड के अनुसार मर्द लंड के धक्के घटाता बढ़ाता ही और अंत में जो गर्म गाढ़ा पानी लंड में से निकलता है वो सचमें बाहर खुशबू वाला होता है। कभी सूंघ कर देखना”।

“खुशबू का मुझे मालूम है “।

रूबी ने कहा , “और टेस्ट का ? ये टेस्टी भी होता है। मैं तो जब चुदवाती रहती हूं तो ये सब करती हूं, मगर रितु नहीं कर पाती”।

फिर रूबी बोली, “दूसरी बात ये है की तू देखने में सुन्दर है साफ़ सुथरा है और तेरा लंड भी बढ़िया साइज़ का है। तू चोदता भी प्यार से है। और तेरे लंड से गाढ़ा पानी भी बहुत निकलता है। इसलिए रितु तेरा लंड चूसना चाहती होगी। और सच पूछे विक्की, मैं भी ये चाहती हूं”?

मेरे पास इसके जवाब में बोलने को कुछ नहीं था।

फिर मैंने रूबी से पूछा,”अच्छा आज का क्या प्रोग्राम है ?

रूबी ने कुछ देर सोचा,”ह्म्मम् ….आज सीधी सादी चुदाई करेंगे। पति पत्नी वाली। लड़की नीचे, गांड के नीचे तकिया चूत को ऊपर उठाने के लिए और लंड ऊपर से जाएगा चूत के अंदर”।

मैं हंसा ” बढ़िया बढ़िया”।

फिर रूबी हंस कर बोली, ” क्यों क्या बीवी की चुदाई याद आ गयी “?

मैने भी कहा, “क्यों क्या तू मेरी बीवी जैसी नहीं “?

रूबी बड़े ही प्यार से बोली, “विक्की ,मैं तेरी बीवी जैसी नहीं तेरी बीवी ही हूं, क्या हुआ अगर शादी नहीं हो सकी “।

मुझसे अब कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने कहा,”रूबी घर चलते है “।

वो भी बोली ,”चलो, मेरा मन अंदर लेने का हो रहा है “। रूबी ने हल्के से मेरे लंड को छू कर कहा I

घर पहुंच कर फ्रेश हुए और बजाए बार के बालकनी में बैठ गए। रितु वहीं हमारे ड्रिंक बना कर ले आयी और साथ कुछ ड्राई फ्रूट भी ले आयी। बातें करते करते हमने दो पेग खत्म कर लिए।

रूबी बोली, “चलो विक्की “।

मतलब चुदाई के लिए चलो। कमरे में आ कर रूबी ने कपड़े उतार दिए और बेड पर सीधी लेट गयी। मैंने रूबी की कमर के नीचे तकिया रख कर उसके चूतड़ उठा दिए। रूबी की फुद्दी उठ कर उभर गयी। रूबी ने टांगें उठा कर चौड़ी कर दी। मैंने चूत को वो तरफ से खोला I फुद्दी के अंदर के गुलाबी नजारे ने मस्त कर दिया। मैंने अपनी जुबान चूत के दाने पर फेरनी शुरू कर दी।

रूबी को तैयार होने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा। चूत तो उसकी रिज पर घूमते घूमते ही गर्म हो चुकी थी। जल्दी ही रूबी की चूत पानी से भर गयी। रूबी की चूत का पानी रितु की फुद्दी के पानी से ज्यादा नमकीन था। रूबी चूतड़ हिलने लगी।

मैं उठा और अपना लंड रूबी की चूत पर एक धक्का लगाया और फच्च की आवाज के साथ लंड पूरा फुद्दी के अंदर बैठ गया। मैंने रूबी की कमर के नीचे बाहें डाल कर रूबी को भींच लिया और धक्के लगाने शुरू कर दिए। रूबी की चूचियां मेरे सीने में दब रहीं थी।

रूबी नीचे से पूरा साथ दे रही थी। रूबी ऐसे चूतड़ घुमा रही थी, ऊपर नीचे कर रही थी की अगर मैं धक्के ना भी लगाता तो भी मेरा लंड रूबी की चूत के अंदर बाहर होता रहता।

पिछले दिनों की तरह आज रूबी जल्दी नहीं झड़ रही थी।

“अच्छा था – दोनों इक्क्ठे झड़ेंगे”।

और आधे घंटे की धुआंधार चुदाई के बाद झड़ने का टाइम आ गया। दोनों के मुंह में से सिसकारियां निकल रहीं थीं …..आआआह…..उईई….आआह। और एक लम्बी और ऊंची सिसकारी के बाद दोनों झड़ गए – निकल गया पानी दोनों का। भर गयी फुद्दी रूबी की। रूबी बोली, ” विक्की, भर दी तूने मेरी फुद्दी”।

थोड़ी देर मैं ऐसे ही लेटा रहा, फिर उठ कर सोफे पर बैठ गया। रूबी ऐसे ही लेटी रही – निढाल। जब रूबी में थोड़ी चुस्ती आयी तो उसने रितु को आवाज लगाई।

रितु आयी तो रूबी बोली, “आजा रितु, चाट मेरी फुद्दी में से अपने सर की सफ़ेद मलाई। रितु ने एकदम रूबी की चूत पर अपना मुंह लगाए दिया और सपड़ सपड़ करके सारा वीर्य चाट गयी। फिर वो उठी और मेरे सामने बैठ कर मेरा लंड चूस चूस कर चाट चाट कर साफ़ करने लगी।

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अगला भाग: मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 10

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