मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 7 – रितु की कुंवारी गांड की चुदाई

पिछला भाग: मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 6

वीरवार

मेरा लंड जड़ तक रूबी की गांड के अंदर था।

रूबी ने एक ऊंची सिसकारी ली – थोड़े दर्द और थोड़े मजे की ….. “उईईई मां ….आआह …आआआह विकी क्या बात है। गया अंदर तक। गांड भर दी मेरी तेरे लंड ने” I

मैंने गांड में धक्के चालू कर दिए I जब रूबी की गांड में लंड के अंदर जाता था थो गांड के छेद की चमड़ी अंदर की तरफ जाती थी और जब लंड को बाहर की तरफ निकालो तो वही छेद की चमड़ी बाहर की तरफ आती थी। लंड मोटा होने के कारण रूबी की गांड का छेद फैल सा गया था। रितु की नजर लंड से हट ही नहीं रही थी जो रूबी की गांड में जड़ तक जा चुका था।

रूबी हर धक्के के साथ सिसकारी ले रहे थी – थोड़ी दर्द की और ज्यादा मजे की सिसकारी उउईईई…. आआह…. अअअह… उईईई… आआआह..।

मेरी नजर रितु पर पडी। वो हैरानी से कभी लंड को अंदर बाहर होते देख रहे थी, कभी मुझे देख रही थी। रूबी ने सर बेड पर रखा हुआ था और सिकारियां लेती जा रही थी आआआह….अअअह… उईईई।

मैंने रितु से धीरे से पूछा, “रितु तूने गांड चुदवाई है कभी”? रितु ने ना में सर हिलाया।

मैंने फिर धीरे से पूछा, “चुदवायेगी “?

रितु ने कोइ जवाब नहीं दिया, सलवार उतारी और सोफे पर बैठ कर अपनी चूत के दाने को रगड़ने लगी और आआह अअअ..ह करने लगी। “मजा आ रहा था उसे मैडम की गांड चुदाई देख देख कर।

इधर रूबी की गांड चुदाई चल रही थी, उधर रितु अपनी चूत के दाने को वाइब्रेटर से सहला रही थी।

बीच बीच में रितु वाइब्रेटर को थोड़ा सा चूत का अंदर भी डाल लेती थी।

रूबी की सिसकारियां बढ़ रही थी। रूबी मस्ती भरी चीखें मार रही थी – आआईईई… आआईएई….. अअअह… अअअहा…आ… मजा आ गया …विक्की मजा आ गया..।

रूबी ने अपने चूत के अंदर अपने उंगली करनी शुरू कर दी और चूत का दाना रगड़ना शुरू कर दिया “बस अब आआह …ऊओह्ह…आआएएए …अअअह….. झडूंगी अब विक्की पानी अंदर ही निकालना… आअह… आआह…. आआई…. मैं…. हो गया गइईईई…..मैं…. गइईईई…मैं… और एक ऊंची आअह के साथ इतनी जोर से चूतड़ हिलाये के मेरा लंड ही बाहर निकले लगा था। मैंने कस के उसके कमर पकड़ ली और जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।

मेरा भी झड़ने ही वाला था – कभी भी झड़ सकता था और….झड़ गया…. उन्ह ..उन्ह .. आआह.. ओह्ह्ह ..रूबी मेरी जान…ले मेरी जान मेरी जान … ले डाल रहा हूं तेरी गांड में ले ले ले रूबी मेरी रूबीईई….आआह और मैंने गर्म गर्म मलाई की पिचकारी रूबी की गांड में डाल दी। रूबी ने चूतड़ हिलाने बंद कर दिए।

मैं दो मिनट ऐसे ही खड़ा रहा।

जैसे ही मैंने लंड बाहर निकलना शुरू किया तो रितु आ गयी। लंड बाहर निकलते ही लंड से निकली सफ़ेद रबड़ी रूबी की गांड से बाहर निकलने लगी। रितु एकदम से नीचे हुई और रबड़ी चाटने लगी सपड़ सपड़ …सपड़ सपड़ । रितु तब तक गांड का छेद चाटती रही जब तक सफ़ेद गाढा पानी निकलता रहा। मैं सोफे पर ही बैठा रहा।

ना मूतने गया ना लंड साफ़ किया। मुझे मालूम था रूबी या रितु दोनों में से कोई मेरा लंड चूस के चाट के साफ़ करेगी। रूबी की गांड साफ़ करने के बाद रितु ने ही मेरा लंड भी चाट चाट कर चूस चूस कर साफ़ किया।

रूबी अभी भी वैसे ही उकडू बैठी हुई थी। लंड साफ़ करके रितु रूबी के पास गयी और उसके चूतड़ों पर प्यार से हाथ फेर कर बोली कर बोली, “मैडम”?

रूबी हिली और बेड पर ही बैठ गयी। मेरी तरफ देखा और बोली, “विक्की क्या गांड चुदाई करता है यार तू , मजा ही आ गया। फिर रितु की और देख कर बोली, “रितु आज तू भी गांड ही चुदवा ले। विक्की जैसी गांड चोदने ने वाला नहीं मिलेगा। अब गया तो अगले साल ही आएगा ये।

रितु ने कनखियों से रूबी की तरफ देख कर कहा, “दुखेगा तो नहीं मैडम “?

रूबी बोली, “अरे दुखेगा तो बोल देना विक्की को, नहीं चोदेगा। विक्की कोइ अनजान तो नहीं उन सालों की तरह जो ज़बरदस्ती करने में अपनी मर्दानगी समझते हैं”।

“इसी लिए मैं इन फुटकर चुदाई करने वालों से गांड नहीं चुदवाती I सालों को नीचे चुदवाने वाली को दर्द से चिल्लाते देख मजा आता है “। रूबी बात सटीक करती थी।

रूबी ने बात जारी रखी, “चल और एक बात बता रितु, जब उस लड़के ने तुझे पहले पहल चोदा था – क्या नाम है उस लड़के का”? रूबी ने रितु की तरफ देख कर पूछा। “लच्छी राम”, रितु ने जवाब दिया। रूबी बोली, “हां वो लच्छी राम, जब उस लच्छी राम ने तुझे पहले पहल चोदा था और तेरी चूत की सील तोड़ी थी, तब दुखा था की नहीं “?

“दुखा था “,रितु बोली। रूबी ने बात जारी रखी, “तो फिर तूने क्या चूत चुदाई करवानी बंद कर दी ? नहीं ना ? एक बार ट्राई कर ले, दुखेगा तो बोल देना विक्की को – नहीं चोदेगा तेरी गांड, मजा आया तो चुदवा लेना”। कह कर रूबी ने मेरा हाथ पकड़ा और बोली “चल विक्की बाथ रूम”। वो मेरे आगे आगे और मैं उसके पीछे पीछे – हम बाथ रूम में चले गए।

रितु भी उत्सुकतावश पीछे पीछे आ गयी।

टॉयलेट की सीट पर बैठ कर रूबी ने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी तरफ कर के बोली, “करो अब”। मैंने पूछा, “क्या करूं, पेशाब करूं “?

रूबी हंसी – वही खनखनाती हंसी, “तो और क्या इसमें से व्हिस्की निकलेगी”?

मैंने थोड़ा लंड को ढीला छोड़ा और पेशाब के धार रूबी के ऊपर छोड़ दी I

मेरा गरम मूत रूबी के मुंह पर गिर कर चूचियों से होता हुआ चूत की तरफ बह रहा था। रूबी गर्म पेशाब को अपनी चूचियों और चूत पर मल रही थी और साथ ही नीचे से मूत भी रही थी सरर्रर्ररर्र सरर्रर्ररर फर्रर्रर्रर्र फर्रर्रर्रर्र। रितु हैरानी से देख रही थी

जब हम इस मूतने से काम से फारिग हो गए तो रूबी बोली, “विक्की जा संभाल रितु को” पीछे खड़ी रितु की तरफ इशारा करके बोली I “मैं नहा कर आती हूं “।

मैं बाहर आया। रितु सारे कपड़े उतार कर सोफे पर बैठी हुई थी और बाथ रूम के दरवाजे की तरफ ही देख रही थी। एक हाथ उसका चूत पर था, दूसरा चूचियों पर – अपने चूचियों के निप्पल मसल रही थी।

मैं उसके सामने खड़ा हो गया। मेरे बैठे हुए लंड को उसने मुंह मुंह में लिया और चूसने लगी।

रितु की लंड चुसाई में जादू था। जैसे जैसे रितु लंड चूसती गयी, लंड खड़ा और कड़ा होता गया। दस मिनट की चुसाई ने लंड को बिलकुल सीधा कर दिया – एकदम तैयार। रितु ने लंड अपनी चूचियों के निप्पलों पर रगड़ा – “मजा ही आ गया”।

मैंने रितु को कंधों से पकड़ कर खड़ा किया और अपनी बाहों में ले कर पूछा, “रितु क्या चुदवायेगी, चूत या गांड”?

मेरा लंड हाथ में ले कर बोली, गांड या चूत – जो चाहे चोद लीजिये सर, आपकी मर्जी है “। फिर बोली, “सर ये इतना मोटा है”, लंड को हल्का दबा कर बोली, “गांड में चला जाएगा “?

मैंने उसके होंठ चूसे और बोला, “रूबी ने क्या कहा था रितु ? अगर जरा सा भी दुखे तो बोलना। मैंने तुम्हारी चुदाई तुझे मजा देने के लिए करनी है कुछ दुखाने के लिए नहीं “।

रितु ने लंड छोड़ा और बेड पर गांड चुदवाने वाली पोज़िशन में उकडू लेट गयी – कुहनियों और कंधों के बल चूतड़ उठा कर पीछे की तरफ कर के – जैसे रूबी लेटी थी ।

“लंड गांड में लेने के लिए तैयार”।

मैंने खूब सारी जैल रितु की गांड के छेद पर गिराई और मलने लगा। बीच बीच में उंगली भी गांड के छेद के अंदर कर रहा था। रितु की गांड बिलकुल भी नहीं चुदी थी – बिलकुल कुंवारी थी । उंगली डालने से ही पता चल रहा था की बहुत टाइट है।

एक बार को तो ख्याल आया की रहने देते हैं गांड चुदाई रितु की।

मैं सोच रहा था कि रितु की गांड चुदी नहीं थी अब तक। छेद टाइट है I कहीं गांड के छेद का सिरा मोटे लंड की रगड़ से छिल ही ना जाए। पर फिर सोचा कि मैं तो ध्यान से – प्यार से गांड चुदाई करूंगा – दर्द होगा तो चुदाई रोक दूंगा। क्या होगा अगर किसी अनजान के हत्थे चढ़ गयी ये रितु और उसने अपनी मर्दानगी दिखने के चक्कर में ज़बरदस्ती कर के इसकी गांड का कचरा ही कर दिया I

मैंने सारा कुछ धीरे धीरे करने की सोची। जैल की मालिश धीरे धीरे , उंगली गांड के अंदर धीरे धीऱे । फिर दो उंगलियां अंदर धीऱे धीरे। लंड का सुपाड़ा गांड के अंदर धीऱे धीऱे , आधा लंड गांड में धीऱे धीऱे – यानि सब कुछ धीऱे धीऱे।

बीस मिनट तक मैं रितु की गांड की मालिश ही करता रहा। फिर अपने लंड पर भी ढेर सारी जैल लगा कर लंड का सुपाड़ा रितु की गांड के छेद पर रक्खा और थोड़ा सा धकेला।

घबराहट में रितु गांड बंद कर रही थी भींच रही थी। इससे लंड अंदर जाने में और भी दिक्क्त आ रही थी।

तभी रूबी आ गयी। आ कर मेरे पास खड़ी हुई और पूछा, “तो क्या गांड चुदाई करवाएगी रितु “?

मैंने रूबी से कहा, “रूबी, रितु की गांड अब तक चुदी नहीं है, बहुत टाइट है। ये घबरा कर गांड का छेद बंद भी कर रही है जिससे लंड अंदर नहीं बैठ रहा “।

रूबी ने प्यार से रितु के चूतड़ों पर हाथ फेरा और कहा, “रितु घबरा क्यों रही है, गांड ढीली छोड़ दे और लंड को अंदर लेने की कोशिश कर। कुछ नहीं होगा। अगर दुखेगा तो बोल देना। विक्की नहीं चोदेगा।

फिर एक पल को रूबी ने कुछ सोचा और रितु के मुंह के आगे अपनी फुद्दी खोल कर लेट गयी और बोली, “ले चूस और चाट इसे। इससे तुझे मजा आएगा और तू मस्ती में आएगी और तेरी गांड अपने आप ढीली हो कर लंड मांगेगी”।

तरीका कामयाब रहा। रूबी की चूत चूसते ही रितु मस्त होने लग गयी। लंड का सुपाड़ा जो अंदर जा ही नहीं पा रहा था, अब थोड़ा अंदर गया।पंद्रह बीस मिनट की मेहनत और ढेर सारी जैल रंग लाई और लंड का सुपाड़ा अंदर बैठ गया।

अब मैंने अगले पंद्रह मिनट केवल सुपाड़ा ही अंदर बाहर किया। धीऱे धीऱे और अंदर और अंदर करता जा रहा था। आधे घंटे के कोशिश के बाद आधा लंड अंदर चला गया।

उधर आधे घंटे की चुसाई के बाद रूबी गरम हो गयी और अपनी चूत का दाना रगड़ने लगी। सिसकारियां ले रही थी आअह…आआह…आआह।

“रितु रूबी की चूत चाट रही थी, रूबी अपने चूत का दाना रगड़ रही थी और मैं रितु के गांड में आधा लंड और घुसेड़ने की कोशिश कर रहा था। रितु भी गर्म हो गयी। वो भी अपनी चूत में उंगली करने लगी और चूतड़ हिलाने लगी।

” क्या लंड लेने के लिए तैयार थी “।

मैंने सोचा अंदर धकेल कर देखते हैं। मैंने लंड पूरा बाहर निकाला। गांड के खुले छेद के अंदर जैल डाली, अपने लंड पर भी जैल मली और मुलायम हुई गांड में धीऱे धीऱे लंड अंदर डाल दिया।

रितु का मुंह रूबी की चूत में था। उसने ने छोटी छोटी सिसकारियां ली आह आह आह ऊँह ऊँह – मैंने धीऱे धीऱे करते करते ही लंड पूरा बैठा दिया।

अब जल्दबाज़ी करने की जरूरत नहीं थी। मैंने धीरे धीऱे धक्के लगाने शुरू कर दिए। रूबी झड़ने वाली थी – जोर जोर से चूतड़ हिला रही थी। रूबी की हालत देख कर रितु की चूत में भी आग लग गयी। रूबी और रितु दोनों जोर शोर से काम कर रहे थे।

रितु जोर जोर से रूबी की फुद्दी चूस चाट रही थी साथ ही अपपनी चूत के दाने को भी रगड़ रही थी। रूबी रितु के मुंह के नीचे अपने चूतड़ों को जोर जोर से हिला रही थी और अपनी चूत का दाना भी रगड़ रही थी। मैंने रितु की गांड में धक्कों की स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी।

जल्दी ही दोनों चूतें झड़ गयी आआह आआह आअह आअह की आवाज के साथ इतनी जोर से दोनों ने चूतड़ हिलाये कि मुझे अपना लंड रितु की गांड से बाहर निकलने से रोकने के लिए रूबी की ही तरह उसकी कमर कस कर पकड़नी पडी और लंड गांड के साथ चिपका कर रखना पड़ा

अब रितु की गांड में पूरे धक्के लग रहे थे और रितु अपने छोटे छोटे गोरे गुलाबी चूतड़ आगे पीछे कर रही थी।

दर्द की जगह मजे ने ले ली थी। अब रगड़ाई में रितु को मजा आने लगा था।

रूबी उठ कर दो ड्रिंक बनना कर ले आयी। एक गिलास मेरे हाथ में दिया। मैंने एक बड़ा घूंट पी कर गिलास रूबी को वापस कर दिया। रूबी जा कर सोफे पर बैठ गयी और अपना ड्रिंक पीते हुए रितु की गांड चुदाई देखने लगी।

रितु मस्त गांड चुदाई करवा रही थी। हर धक्के के साथ उसके मुंह से आवाज़ आ रही थी आआह…आआ….आआह….।

दो दो टाइट गांडें चोदने के बाद तो मेरा लंड भी दर्द करने लग गया था।

रितु चूतड़ हिला तो रही थी लेकिन इतनी जोर से नहीं जितना जोर से लड़कियां पानी छोड़ने के समय हिलाती हैं उसकी सिसकारियों में मजे के साथ साथ दर्द भी था।

मैंने सोचा,पहली बार गांड चुदवा रही है – आज के लिए इतना काफी है। कहीं गांड चुदवाने से डर ही ना जाये I वैसे भी रितु ने अपनी चूत का दाना रगड़ना शुरू कर दिया था – मतलब चूत में आग लगी हुई थी ।

मैंने एक पल के लिए कुछ सोचा और रूबी की तरफ देखा । रूबी अपने में ही मस्त थी और अपनी चूत को सहला रही थी। मैंने हाथ नीचे करके रितु की चूत की दोनों फांकें साइड में की, चूत का छेद थोड़ा चौड़ा किया और अपना तना हुआ लंड रितु की गांड में से निकल कर एक झटके से उसकी चूत में डाल दिया।

“गीली चूत में इस तरह झटके से लंड डालने में लड़की को मजा भी बहुत ज़्यादा आता है “।

फच्च की आवाज़ के साथ जैसे ही लंड पूरा अंदर गया, रितु की सिसकारी निकली आआआह सर आह्ह्ह्…. मैडम…अअअअअ….क्या मस्त लंड है सर का ।

“ये मजे की सिसकारी थी”।

रितु की चूत अभी छोटी सी टाइट फुद्दी ही थी। कभी कभी ही चुदती थी, इसी कारण अभी खुली नहीं थी I ढीली नहीं हुई थी – टाइट थी। इस लिए मोटा लंड का चूत में रगड़ खाता हुआ जाता था। ऐसी रगड़ाई लड़की को जन्नत का मजा देती है – यही रितु के साथ भी हो रहा था।

मैंने रितु की कमर पकड़ कर ज़बरदस्त धक्के लगाने शुरू किये पांच मिनट के धक्कों के बाद ही रितु झड़ गयी। झड़ते झड़ते रितु ने लंड बुरी तरह से अपनी चूत में जकड़ लिया – पहले की तरह। मजा ही आ गया।

लगता है लगता है पहली बार की गांड चुदाई से रितु की गांड थोड़ा दुखने लगी थी इस लिए मजा नहीं ले पा रही थी। “जैसे ही मैंने गांड में से लंड निकाल कर रितु की चूत में डाला उसे आनंद आने लगा “I

उसकी चूत के अंदर मेरे लंड के धक्कों ने उसकी मस्ती भरी चीखें निकाल दी सर …. मजा आ गया …..मम….ममज़ा आ गया मैडम….. हम्म्म्म्म….अअअह….अअअह…. हम्म्म्म…. आअह…. सर…. आआह मैडम…। और उसने इतनी जोर से चूतड़ हिलाये की मुझे लंड अंदर रखने में पूरे जोर के साथ उसकी कमर पकड़नी पड़ी।

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अगला भाग: मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 8

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