मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 13 – रितु की मर्ज़ी की चुदाई

पिछला भाग: मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 12

रूबी के सवाल के जवाब में रितु ने कहा, “सभी तरह की चुदाईयां अच्छी थी मैडम”।

रूबी ने फिर कहा,”शर्मा मत रितु, खुल के बता। सर से अब कैसी शर्म। चल बता जल्दी। फिर हम ने भी तैयार होना है “?

रितु कुछ पल रुकी और फिर बोली, “मैडम वो वाली, सीधा लेट कर, नीचे तकिया रख कर करने वाली “।

“रितु ने भी वही चुदाई का तरीका सब से बढ़िया बताया जो रूबी ने बताया था, लेकिन शर्मा कर – बिना चूत, लंड, चुदाई जैसे शब्दों का प्रयोग कर के “।

रूबी कहां छोड़ने वाली थी। उसे रितु से सेक्सी बातें कर के मजा आ रहा था, “क्यों, उसमें – उस वाली चुदाई में क्या ख़ास बात है”।

रितु ने जवाब दिया, “मैडम उसमे जब सर ने नीचे तकिया रख कर इसको ऊपर किया और टांगें चौड़ी कर के इसको चूसा …….” रूबी ने बीच में ही बात काट दी ,” इसको किसको रितु ? तू शरमा किससे रही है? चल इधर आ “।

रितु रूबी के पास चली गयी। रूबी ने रितु के होंठ चूसे और चूचियां दबा दी। सर का लंड देखेगी “?

रितु की नज़र मेरी पेंट पर चली गयी। रूबी बोली “विक्की निकाल अपना लंड और दिखा रितु भी को और मुझे भी “।

रितु की ख़ूबसूरती और इस ख्याल भर से कि मैं इस जवान कड़क लड़की को चोदता रहा हूं, और आज भी चोदना है, मेरा लंड सख्त होने लग गया था।

मैंने लंड पायजामे में से बाहर निकाल लिया। रूबी और रितु दोनों ने एक सिसकारी ली …….आअह। दोनों लंड की तरफ ही देख रही थी

रूबी बोली , ” हां रितु अब बता आज कैसे चुदाई करवानी है। कौन सी चुदाई सब से अच्छी लगी “।

रितु ने अब साफ़ शब्दों में जवाब दिया ,” मैडम वो जो बेड पर सीधा लिटा कर चूतड़ों के नीचे तकिया रख चूत को ऊंचा कर देते है और टांगें चौड़ी कर के जिस तरह सर फुद्दी चूसते है, उसमें बड़ा मजा आता है। फिर टांगें थोड़ा और चौड़ी कर के लंड चूत के अंदर डालते हैं तो मैडम क्या बताऊं क्या होता है”।

“और जो पीछे हाथ डाल कर जकड़ते हैं, मेरी चूचिया सर के सीने में ही घुस जाती है। सर की चुदाई के बीच जब मैं चूतड़ घुमाती हूं तो सर का लंड मेरी चूत के आख़री सिरे टकराता है “।

रितु से और नहीं रहा गया ,उसने एक बार रूबी के होंठ चूसे और मेरे आगे बैठ के मेरा लंड चूसने लगी। मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था।

रूबी भी चुप बैठी थी।

रूबी ने ही चुप्पी तोड़ी। “रितु उठ चल अंदर चल। आओ विक्की। एक एक चुदाई कर के ही चलते हैं”।

तीनो अंदर आ गए। रूबी रितु से बोली, “चल रितु उतार कपड़े और लेट जा। और फिर मुझसे बोली, “जा विक्की टाइट फुद्दी तुझे बुला रही है।

रितु ने बिना कुछ कहे कपड़े उतारे और लेट गयी। रूबी ने रितु की चूतड़ों के नीचे तकिया डाल कर उसकी चूत ऊंची कर दी और टांगें चौड़ी कर के चूत चाटने लगी ,”रितु ये तो भरी पड़ी है चिकने पानी से। लंड मांग रही है “।

रितु धीमी आवाज़ में बोली। “जी मैडम, ये तो तभी तैयार हो गयी जब आपने पूछा था की कैसी चुदाई अच्छी लगती है और सर के लंड को देख कर तो चुदाई ही करवाना चाहती थी “।

रूबी मुझ से बोली ,”अजा विक्की चोद इस कड़क लड़की को, ठंडी करदे इसकी चूत “।

मैंने रितु की टांगें फैलाई और फच्च के आवाज के साथ पूरा लंड अंदर डाल दिया। रितु ने एक धीमी सिसकारी ली आआआह और चूतड़ हिला कर पूरा लंड अंदर बिठा लिया। मैंने पीछे हाथ डाल कर रितु को जकड़ लिया – रितु ने मेरे पीछे हाथ डाल कर मुझे जकड लिया। रितु ने अपनी टांगों से मेरी कमर भी जकड़ ली। अब हम केवल एक ही तरह हिल सकते थे आगे पीछे – या कह लो ऊपर नीचे।

मैंने धक्के शुरू किये तो रितु ने इतनी जोर से चूतड़ हिलाने लगी की आनंद ही आ गया। रितु चूचियों को मेरे सीने के साथ मसल रही थी और मेरी कमर पर टांगें टाइट कर रही थी।

रूबी बैठी अपनी चूत का दाना रगड़ रही थी।

रितु के साथ ऐसी धुआंधार – नॉन स्टॉप धक्कों वाली चुदाई ने मेरा दिमाग ही सुन्न कर दिया। रितु जोर जोर से चूतड़ हिला रही थी। आअह आह आह की आवाजें निकल रही थी। ऐसी चुदाई मैंने कभी नहीं की थी। मैं रितु को ऐसे चोद रहा था मानो अब जिंदगी में कभी चूत ही नहीं मिलेगी।

रूबी भी हमारी चुदाई हैरानी से देख रही थी और अपनी चूत का दाना जोर जोर से रगड़ रही थी और रितु की ही तरह आअह आअह आह कर रही थी।

पंद्रह मिनट की चुदाई के बाद रितु ने सिसकारियां लेनी शुरू कर दी अअअअअह आआआह उउइइ। मैंने रितु के होंठ अपने होठों में ले लिए। रितु की सिसकारियां दब गयी थी मगर रूबी की चालू थी।

रितु ने बंद होठों से ह्ह्ह्हम्मम्मम…. ह्ह्ह्हहम्म्म्म की आवाजें निकली और जोरदार धक्कों के बाद झड़ गयी। उसके चूतड़ हिलने बंद हो गए। रितु की टांगों ने मेरी कमर छोड़ दी। उसने अपनी बाहें मेरे पीछे से हटा दी,तकिया अपने चूतड़ों के नीचे से हटाया और ढीली हो कर लेट गयी I रितु की चूत की तृप्ति हो गयी थी।

उधर रूबी की सिसकारियां चालू थी। वो या तो लंड मांग रही थी या झड़ने वाली थी। रितु के साथ की चुदाई में मैं झड़ा नहीं था इस लिए मेरा लंड खड़ा ही था।

मैंने रूबी को बुलाया, और दुसरे कमरे की तरफ इशारा कर के कहा, “रूबी चलें”।

“कहां जाना है विक्की, यहीं करेंगे”। रूबी उठी और आ कर लेट गयी। सब कुछ वही हो रहा था जो रितु के साथ चुदाई के दौरान हुआ था। चूतड़ों के नीचे तकिया, चूत की चुसा। मैंने बहून से रूबी को जकड़ लिया – रूबी ने मुझे जकड़ लिया और टांगें मेरी कमर पर कैंची की तरह डाल ली।

सब तैयार था। बस अब चुदाई होनी थी।

रूबी के साथ मेरी चुदाई रितु की चुदाई से भी ज्यादा धुआंधार थी। चुदाई का तजुर्बा रूबी का ज्यादा था। रूबी का नीचे से चूतड़ घुमाने का तरीका ही कमाल का था। थच्च फच्च थच्च फच्च थच्च फच्च की ऊंची आवाजों के साथ चुदाई हो रही थी। रूबी जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी। मैंने अपने होठों से रूबी के होठ बंद कर दिए जैसे रितु के किये थे। बंद होठों से रूबी की सिसकारियां ह्ह्ह्हम्म्म्म ह्ह्हहननन आ रही थी।

यकायक रूबी के चूतड़ जोर जोर से हिले लगे – रूबी झड़ने वाली थी। मेरा भी लंड रूबी की चूत में गरम लेस छोड़ने तैयार थ।

रूबी की हम्म्म्म ह्ह्हह्हं के सिसकारी और मेरे लंड में से वीर्य निकलने के मजे की आवाज उनंनंह उनंनंह उनंनंह के साथ हम दोनों झड़ गए, मैंने रूबी के होठों से अपने होठ हटा लिए।

रूबी के पहले शब्द थे, “बड़ा गर्म है विक्की तेरा पानी। भर दी मेरी चूत। काश मैं तेरी होती तो रोज तुझ से ऐसी ही चुदवाती “।

मैंने धीरे से लंड चूत मैं से बाहर निकला और उठ कर सोफे पर बैठ गया। थक गया था मैं दो दो चूतों की ऐसी चुदाई कर के।

रूबी ने टांगें चौड़ी की और मेरा वीर्य अपनी चूत से अपने हाथ से निकाल कर चाटने लगी। रितु भी आंखें खोल चुकी थी और रूबी को मलाई चाटते देख रही थी। रूबी नें दुबारा हाथ अपनी चूत पर रखा और जोर लगाया। सफ़ेद पानी उसकी उंगलियों पर आ गया। इस बार रूबी ने उंगलियां रितु की तरफ कर दी। रितु पूरी तरह से लेस रूबी की उंगलियों से चाट गयी।

चार पांच बार ऐसा कर के रितु ने सीधा मुंह रूबी की चूत पर लगा दिया और सारा पानी चाट गयी। फिर वो उठी और मेरे सामने बैठ कर मेरा लंड चूसने लगी।

रूबी भी उठ गयी। मुझ से पूछा ,”विक्की पेशाब लग रहा है “?

मैंने कहा, “बड़ी जोर का”।

“तो चल, आ जा रितु गर्म गर्म स्नान करें”।

रितु ने लंड मुंह मैं से निकाला – तक कर सोया ही हुआ था। बाथ रूम जा कर दोनों चूतड़ से चूतड़ सटा कर बैठ गयी और मेरे लंड की तरफ देखने लगी की कब मैं गर्म मूत की धार छोडूं।

मैंने पेशाब की धार उनके ऊपर छोड़ दी। लंड ऐसे इधर उधर कर रहा था की मेरा मूत दोनों के ऊपर जा रहा था। नीचे से उन दोनों का मूत निकल रहा था शरररररर सररररर की संगीतमयी आवाज के साथ।

पूरा मूतने के बाद दोनों खड़ी हो गयीं। रितु बोली, “सर आप कितनी मस्त और जोरदार चुदाई करते हो। रगड़ रगड़ कर चूत से झाग निकल देते हो। अगर शादी के बाद मुझे आप जैसी जोरदार चुदाई करने वाला मर्द ना मिला तो मैं घर से भाग कर आपके पास आ जाऊंगी”।

“तुझे कैसे पता चुदाई में झाग निकाल देते हैं। तूने देखी है क्या झाग “? रूबी ने रितु पुछा।

“मैडम मैंने अपनी तो नहीं आपकी चुदाई के बाद आपकी चूत झाग से भरी देखी है, और उस झाग को चाटा भी है। हल्की खट्टी, हल्की नमकीन। बड़ी टेस्टी होती है। आप ही बताईये I मैडम अगर सर की चुदाई आप की चूत की झाग छुटा देती है तो मेरी चूत की भी तो सर की चुदाई मेरी चूत का भी तो वही हाल करती होगी।

“रितु बंद कर अपनी ये बक बक नहीं तो माल रोड तो जाएगा भाड़ में, अभी के अभी फिर से चुदाई करवानी पड़ जाएगी”। फिर रूबी ने रितु के नंगे चूतड़ों पर जोरदार चपत लगाई, “और सुन चिंता ना कर लड़की बढ़िया चोदू मिलेगा तुझे भी चुदाई कर कर के चूत में से झाग निकलने वाला । बस सोमवार के व्रत रखा कर” I

मैं और रूबी रितु की बात पर हंस पड़े I

तैयार हो कर नीचे माल रोड की तरफ चल पड़े। रूबी ने भी हल्के जमुनी रंग की सलवार कमीज पहनी हुई थी। रूबी और रितु ने दोनों ने स्पोर्ट्स जूते पहने थे।

पहाड़ की लड़कियां इसी बात से पहचानी जाती हैं। ऊपर की ड्रेस कुछ भी हो पैरों में स्पोर्ट्स शूज़ ही होते हैं। पहाड़ी रास्तों पर चढ़ने उतरने के लिए आरामदायक और सुरक्षित।

माल रोड का ट्रिप बढ़िया था।

माल रोड से नीचे की तरफ सीढ़ियां उतर कर प्रेम की छोले भटूरे की दूकान है। प्रेम तो शायद स्वर्ग सिधार चुका होगा। अब तो उसका नाम ही है दूकान पर। रूबी को देखते ही दूकान का मालिक भाग कर आया
और रूबी के सामने हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया ,”नमस्ते मैडम, इतने दिनों बाद ? आईये “।

हमने प्रेम के स्वादिष्ट छोले भठूरे खाए और घूमते घूमते स्कैंडल पॉइंट से होते हुए रिज की तरफ चल पड़े। रितु हमारे साथ ही चल रही थी। रितु इतनी सुन्दर लग रही थी कि पास से गुजरने वाले टूरिस्ट लड़के उसकी तरफ नज़र डाले बिना नहीं जाते थे।

वक़्त हमने ऐसे की टाइम गुज़ार दिया। रिज से लक्क्ड़ बाजार, फिर स्कैंडल पॉइंट होते हुए माल रोड और फिर वापस रिज।

छः बजे हम वापस चल पड़े।

घर पहुंच कर रूबी ने रितु को कॉफी बनाने को कहा और फ्रेश हो कर झीनी नाईटी डाल कर बालकनी में आ गयी। अभी सात भी नहीं बजे थे और रूबी ने ब्रा और चड्ढी के बिना नाईटी डाली हुई थी। चूचियों के हल्के ब्राउन निप्पल और गौर से देखने के बाद चूत भी दिखाई दे रही थी।

मैं भी बालकनी में आ गया। रूबी को इस ड्रेस में देख कर रूबी से पूछा रूबी ये क्या ? अभी से तैयार ?

रूबी बोली, “नहीं विक्की, थकी हुई थी। सोचा थोड़ी देर में तो कपड़े उतारने ही हैं। यही काम रह गया है क्या – पहले कपड़े पहनो फिर उतारो फिर पहनो। इसी आलस के मारे नाईटी डाल ली “।

मैंने हंस कर कहा,” नहीं रूबी, मैंने तो ऐसे ही पूछ लिया। बढ़िया फब्ती है तुझ पर। बड़ी सेक्सी लग रही है नाईटी में “।

रितु कॉफी ले आयी। रूबी से कप पकड़ कर बोली। ” रितु तेरे पास भी तो हैं ऐसी नाइटियां हैं । जा तू भी पहन आ। विक्की मुझे कह रहा है मैं इस नाईटी में बड़ी सेक्सी लग रही हूं। तो भी सेक्सी बन के दिखा दे”।

“मैडम नाईटी तो है, मगर काम पड़ा है। काम निबटा के फ्रेश हो के पहनती हूं “। फिर रितु ने पुछा , “मैडम आज क्या बनाऊं”।

रूबी बोली, “आज कुछ नहीं बनाना तुझे, ना तुझे किचन में मसालों को हाथ लगाना है। सब कुछ बाहर से मंगवा ले वो भी अभी। विक्की को फिश फ्राई पसंद है। फिश फ्राई मंगवा ले साथ में दाल, फ्राइड राइस और रायता बस। अब जा आर्डर कर के दो पेग बना के यहीं ले आ और जैसे ही खाना आ जाये तैयार हो के आजा और अब जा और सेक्सी सेक्सी बन के आजा “।

रितु खाने का आर्डर कर के दो पेग बना लाई।

दूसरा पेग अभी हाथ में ही था की खाना आ गया। “लगता है रितु ने जल्दी लाने के लिए बोला होगा”।

रितु फ्रेश हो कर रूबी जैसी ही झीनी नाईटी डाल कर आ गयी। देख कर मेरे तू होश उड़ गए। चूचियां दिख रही थी हल्की झलक चूत की भी मिल रही थी और चूतड़ों की लाइन – मेरा तू मन किया यहीं लिटा कर चोद दूं। मधु बाला, हेमा मालिनी, माधुरी दीक्षित सब फेल थी रितु के आगे – इतनी सुन्दर !!! मैं तो देखता ही रह गया।

रूबी बोली, “रितु तू तो हीरोइन लग रही है। इधर आ “।

रितु जब रूबी के पास गए तू रूबी ने रितु के चूतड़ पकड़ जोर से भींचे और उसके होठों को अपने होठों में पकड़ कर चूस लिया”। फिर बोली, ” जा अपने सर को भी एक चुम्मा दे आ “।

रितु मेरे पास आई, मैंने नाईटी में हाथ डाल कर उसकी कड़क चूची हल्के से दबाई और होंठ चूसने लगा। रितु भी मेरे होंठ चूसने लगी। मैंने धीरे से रितु को अलग किया मुझे लगा कहीं मेरा लंड ही न पकड़ ले”।

रूबी बोली, “विक्की, रितु तो लगता है चुदाई के लिए बेचैन है “। फिर रितु की तरफ देख कर बोली ,”क्यों रितु”?

रितु बोली, “मैडम मन तो कर ही रहा है “।

रूबी बोली, “जा एक छोटा वोडका का पेग अपने लिए भी बना ला। तेरी भी थकान उतर जाएगी”।

रितु एक हल्का सा पेग बना कर ले आयी और खड़ी हो गयी।

रूबी बोली, “बैठ जा रितु खड़ी क्यों है। आराम से पी “।

फिर रूबी ने मुझसे पूछा, “विकी अब कैसे करना है। अब की चुदाई तू इस बार की आखरी चुदाई होगी। साल में दो बार आया कर विक्की”। फिर रितु से पूछा , “क्यों रितु “?

रितु बोली, “जितनी बार मर्ज़ी आएं सर, हम तो चुदने के लिए तैयार ही मिलेंगी “।

रूबी बड़े जोर से हंसी, “देखा विक्की, ये भी यही चाहती है”।

मैंने कहा, “रूबी एक बार तो पक्का ही है। एक से ज्यादा बार आना काम पर डिपेंड करता है। इस साल मेरा भुवनेश्वर का ट्रिप लगना है काम के सिलसिले में। हाथ का बना सामान – हैंडीक्राफ्ट – एक्सपोर्ट करने का इरादा है। वीना शायद न जाये। अगर हो सके तो तुम दोनों प्रोग्राम बना लेना। मस्ती रहेगी “।

रूबी बोली, “चलो, वो भी देख लेंगे, ये बताओ आज कैसे चुदाई करनी है “।

मैंने, कहा, ” वही कल वाली चुदाई – असली लंड गांड में और नकली लंड चूत में। बस तरीका थोड़ा बदलना है”।

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अगला भाग: मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 14

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