मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 5 – तीसरा दिन, बुधवार की रात

पिछला भाग: मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 4

रूबी ने बात जारी रखी “और कल रात जो उसने तेरे लंड के साथ किया, उसके बाद तो मुझे ये बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा कि मैं 36 साल की अधेड़, शादी शुदा एक बच्चे की अम्मा तो चुदाई के मजे लूं और वो उसी घर में रह रही उन्नीस बीस साल की सुन्दर जवान कुंवारी लड़की लंड के लिए तरसती रहे”?

“बात रूबी की तर्कसंगत थी – बिलकुल कामयाब वकील कि तरह”। अब मुझे भी लग रहा था कि अब इंकार कि कोइ गुंजाइश नहीं थी।

मैंने कहा ,”रूबी अब दुबारा अपने आप को अधेड़ मत बोलना। मेरे लिए तू अभी भी सोलहं सत्रह साल वाली रूबी है जिसको घर्मपुर छोड़ कर मुझे बैंगलोर जाना पड़ा था।

रितु खाना बना चुकी थी। आज तंदूरी चिकन बाहर से मंगवा लिया था। मैं और रूबी बार में बैठे अपने अपने ड्रिंक्स के मजे ले रहे थे।

दो दो ड्रिंक्स के बाद मन चंचल होने लगा। ज़रा जरा सी बात पर रूबी मुझे छू रही थी। मेरा लंड कुलबुलाने लगा था। रूबी बार बार अपनी चूत पर हाथ लगा रही थी

रितू आई और बोली, “मैडम डिनर तो तैयार हो गया है”।

रूबी बोली, “ठीक है जा तू बाथ रूम जा कर फ्रेश हो जा, बड़ी देर से किचन में काम कर रही है, कपड़ों में से किचन के मसालों की गंध आ रही होगी “। रितू जाने लगी तो रूबी ने दुबारा आवाज दी, “और सुन, नीचे के बालों का भी ध्यान कर लेना “। रितू शर्माती हुई चली गयी।

“मैंने सोचा कितनी छोटी छोटी बातों का ध्यान रखती है ये रूबी। तभी एक इतनी कामयाब वकील है – वो भी फौजदारी की, जहां एक छोटी गलती की भी गुंजाइश नहीं होती – एक छोटी गलती भी मुवक्किल पर भारी पड़ सकती है “।

आधे घंटे के बाद रितू आयी, नहा धोकर। हमारे पास आयी और पूछा, “मैडम कुछ चाहिए आपको ” ?

रितू में से बढ़िया शैम्पू की खुशबू आ रही थी। “चूत के बार भी साफ़ कर लिए होंगे तभी आधा घंटा लग गया”।

हम तीसरा पैग खत्म कर चुके थे। रितु के पूछने पर रूबी बोली, “नहीं रितु कुछ नहीं चाहिए” I रूबी ने चौथा पैग गिलास में डाला “, फिर मेरा हाथ पकड़ कर बोली, चल विक्की “। रितू जो वहीं खड़ी थी, उसे भी रूबी ने कहा, “चल रितू तू भी चल Iऔर वो वाइब्रेटर भी ले आना “।

“वाइब्रेटर “? क्या करने वाली है ये रूबी ? रितू आ गयी, हाथ में दो प्लास्टिक के बॉक्स थे। “जरूर एक में लंड होगा दुसरे में वाइब्रेटर”।

रूबी ने रितु से कहा ,”चल रितु विक्की के कपडे उतारने में उसकी मदद कर “। रूबी ने एक बड़ा ही तगड़ा चुंबन लिया मेरे होठों का, “मेरा विक्की “।

रितु खड़ी रही आगे नहीं बढ़ी। रूबी ने कहा, “अरे रितु शर्मा क्या रही है जा ना, जा कर कपड़े उतरने में विक्की की मदद कर। ये शर्माता बहुत है, अपने आप नहीं उतारेगा “।

रितु मेरी और बढ़ने ही लगी की मैंने उसे रोक दिया,”नहीं नहीं मैं उतार लूंगा “। रूबी जोर से हंसी और अपने कपड़े उतार दिए और सोफे पर बैठ गयी।

रूबी ने रितु से कहा, “चल रितु विक्की का लंड चूसले, रात को तो नहीं चूस पायी थी”।

मैं अपने कपड़े उतार चुका था। रितु फर्श पर बैठ कर मेरे लंड को मुंह में लेने लगी तो मैंने उसे कंधों से पकड़ कर उठाया और बेड के किनारे पर बिठा कर अपना लंड उसके मुंह के आगे कर दिया।

रितु ने रूबी की तरफ देखा, मगर कहा कुछ नहीं। रूबी ही बोली, “क्या हुआ रितु, बहुत बड़ा है क्या ? मजा लेगी तू पूरा आज “।

रितु ने मेरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी। बहुत जोर लगा लगा कर चूस रही थी जैसे अंदर का सारा कुछ जो भी लंड के अंदर है खींच लेना चाहती हो।

बहुत ही अच्छी चुसाई कर रही थी। लंड तन चुका था। रितु भी लगता है गरम हो चुकी थी। अब वो बेड पर बैठी अपनी चूतड़ हिला रही थी।

रूबी समझ गयी की लड़की लंड मांग रही है। रूबी ने रितु को बेड से खड़ा किया और उसके कपड़े उतार दिए। उन्नीस साल की रितु का नंगा जिस्म देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए ,”इतना सुन्दर कड़क जिस्म” ?

तनी हुई एकदम सख्त चूचियां, छोटे छोटे से निप्पल, भरे भरे चूतड़ – गोर चिट्टे। चूत पर एक बाल नहीं – केवल एक लाइन दिखाई दे रही थी।

“इस सुन्दर जवान लड़की को चोदने वाला हूं आज मैं ? अपनी ही किस्मत से ईर्ष्या होने लगी”।

तभी रितु रूबी से बोली, “मैडम पहले आप कर लीजिये “।

रूबी ने कहा, “हम बाद में कर लेंगे रितु। कोइ फर्क नहीं पड़ता I तू जा और चुदाई के मजे ले बड़ा मस्त चोदता है मेरा विक्की “।

रितु ने मेरी और देखा जैसे पूछ रही हो, ” बताओ क्या करूं कैसे लेटूं, कैसे चोदना है “।

मैं उसकी आखों की भाषा समझ गया। मैंने उसे बेड की साइड पर ही लिटा दिया। चूतड़ों तक का आधा जिस्म बेड पर और टांगें हवा में। मैं घुटनो के बल फर्श पर बैठ गया और रितु की टांगें चौड़ी कर उस की चूत में जुबान घुसा दी। रितु की चूत का तो पानी ही बड़ा स्वाद था। मैं जोर जोर से पानी चाटने लगा और जो भी पानी निकल रहा था पीता जा रहा था ।

“कोरी फुद्दी पानी छोड़ भी बहुत रही थी”।

रितु ने चूतड़ हिलाने शुरू कर दिए – चुदाई मांग रही थी। मेरा लंड इतना कड़ा हो चुका था फटने को था। मैं खड़ा हो गया। रितु को वैसे ही रहने दिया और टांगें खोल कर अपना लंड उसकी अधखुली चूत पर रख दिया।

“इस पोज़िशन में लंड पूरा चूत की गहरायी तक जाता है “।

मैंने लंड थोड़ा अंदर की तरफ दबाया। उन्नीस – बीस साल की रितु चुदी हुई तो थी – चूत की सील फट चुकी थी, मगर फुद्दी अभी टाइट ही थी। अगर मोटा लंड एकदम से अंदर धकेला जाए तो लड़की को दर्द भी हो सकता था और थोड़ा खून भी निकल सकता था।

“ऐसी मर्दानगी दिखाने का ना मेरा कोइ इरादा था ना शौक”।

मैंने चूत के छेद पर ही लंड को कुछ देर रगड़ा। अपने हाथ के अंगूठे से रितु की छूट के दाने को सहलाया। चूत खूब लेसदार पानी छोड़ रही थी । मैंने धीरे धीरे लंड अंदर धकेलना शुरू किया। चूत सच में टाइट ही थी। आधा लंड डाल कर मैं जरा सा रुका।

रितु ने मेरी और अधखुली आँखों से देखा जैसे पूछ रही हो “क्या हुआ,रुक क्यों गए”।

मैंने रितु की टांगें घुटनों से पकड़ी और एक ही बार में सारा लंड अंदर डाल दिया। रितु के गले से एक सिसकारी निकली …..”आह”।

रितु की चूत की टाइट मांसपेशियों के कारण मेरा लंड चूत के अंदर जकड़ा पड़ा था। मैंने जब धक्के लगाने शुरू किये तो मेरे लंड का ऊपर की चमड़ी इस जकड़न में कारण आगे पीछे हो रही थी । मैंने सोचा रितु की चूत की क्या हालत होगी, उसमें भी खूब रगड़े लग रहे होंगे।

ऐसे रगड़ाई वाली चुदाई में रितु के जल्दी झड़ने का पूरा अंदेशा था। अगर मैं भी 37 साल की इस उम्र बहुत सारी चूतें ना चोद चुका होता तो मेरा भी जल्दी झड़ना पक्का था।

धक्के शुरू हो चुके थे। हर धक्के के साथ – जब लंड टट्टों तक अंदर बैठता था तो रितु सिसकारी लेती थी ……आह …..आह …..आह। निश्चय ही ये मजे की सिसकारी थी।

मैंने रूबी की तरफ देखा। उसकी नज़रें लंड को अंदर बाहर जाता देख रही थी और एक हाथ से वाइब्रेटर को चालू कर के अपनी चूत के दाने को सहला रही थी और लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी।

मैंने धीरे धीरे धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। रितु नीचे से चूतड़ों को घुमा रही थी, हिला रही थी, ऊपर नीचे कर रही थी। आठ दस मिनट की चुदाई के बाद रितु के गले से सिसकारियां निकलने लगीं…..आआआह… आआह… ऊऊऊह…आआह…उह…उह…आई…आई I “क्या रितु झड़ने वाली थी” ?

मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी – रितु का होने वाला था, वो झड़ने वाली थी। तभी रितु ने जोर की सिसकारियां ली…..उई मां…..ये क्या हो रहा है आआआह….ऊऊओह्ह….ऊऊओह्ह….अअअ ह….मैडम गयी मैं….आआह….ऊऊह….आआईई ….इये….इये…इये….आआह….मैडम….. मैडम…. और रितु एकदम ढीली पड़ गयी। रूबी जोर जोर से वाइब्रेटर अपनी चूत के दाने पर घुमा रही थी।

“मेरे लंड के आस पास चिकना लेसदार पानी भरा पड़ा था”।

झड़ने के दौरान रितु ने चूत को ऐसे टाइट किया की लंड हिलाना मुश्किल हो गया। नई जवान फुद्दी थी, फुद्दी की मांसपेशियों में अच्छा खासा दम था। लेकिन मेरे लंड की रितु की चूत के अंदर ऐसी जकड़न ने तबीयत खुश दी।

“मैं झड़ने के आस पास भी नहीं था”।

मगर मैंने अब रितु की चुदाई नहीं रोकी। उन्नीस बीस साल की पता नहीं कितने हफ्तों या महीनों बाद चुद रही फुद्दी के अंदर मैं अपने लंड का गरम गरम पानी ना छोडूं ? “इतनी खुदगर्ज़ भी नहीं था मैं”।

मैं जानता था की इस नई नई चुदाई करवाने लड़की की चूत अभी धक्के ना रोके गए तो ये जल्दी ही फिर से अगली चुदाई के लिए तैयार हो जाएगी। मैंने ना धक्के रोके, ना ही धीरे किये। रितु की चूत का पानी चूत से बाहर तक आ रहा था। गीली चूत पर जब लंड का आख़री हिस्सा टकराता था तो आवाज़ आती थी फच्च….तच्च । फच्च फच्च फच्च…..तच्च तच्च तच्च की आवाजों के साथ चुदाई हो रही थी।

फिर वही हुआ। रितु ने नीचे से फिर चूतड़ हिलाने शुरू कर दिए। मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी, साथ ही पूरा लंड बाहर निकाल कर चूत के अंदर झटके के साथ डालने लगा।

“रितु चुदाई के लिए फिर तैयार थी, इस बार मैं भी रितु की चूत को मलाई से भरने के लिए तैयार था”।

“ऊँह..ऊँह..की आवाज़ों के साथ मैं धक्के लगा रहा था। रितु आयी…आयी..आआआह…आआह……उउउइइ…. आआह… आवाजें निकाल रही थी और जोर जोर से चूतड़ हिला रही थी। अचानक से रितु ने एक लम्बी सिसकारी लिए उउउउउइइ…. गयी मैं…. आआआह…. होगया मेरा… आए ….गयी मैं… आआआह… आआह … और उसने शरीर ढीला छोड दिया। एक लम्बी हुंकार आहःरररर के साथ मैंने भी रितु की फुद्दी अपने गरम पानी से भर दी।

“इस बार भी रितु ने मेरे लंड को अपनी चूत में कस के भींच लिया”।

कोइ एक मिनट मैं इसे ही खड़ा रहा – लंड रितु की चूत के अंदर डाले हुए। जब लंड निकलने लगा तो रूबी उठ कर आ गयी और घुटनों के बल रितु की फुद्दी के सामने बैठ गयी।

जैसे ही मैंने लंड निकला, रूबी ने रितु की फुद्दी के फांकें चौड़ी कर के फुद्दी को चाटना शुरू कर दिया सपड़..सपड़…… सपड़…सपड़…। एक एक बूंद मेरे सफ़ेद लेसदार पानी और रितु की चूत के नमकीन पानी को चाट गयी रूबी।

मैं सोफे पर बैठ गया। थक सा गया था मैं। थोड़े आराम की ज़रूरत थी, अभी तो रूबी को चोदना था। रूबी भी मेरे पास आ कर बैठ गयी और बड़े प्यार से मेरा लंड हाथ में ले लिया। पांच सात मिनट के बाद रितु ने आंखें खोली और उठी। मेरे तरफ देखा बड़ी ही मस्त नजरों से जैसे कह रही हो, “सर मेरी चूत को स्वर्ग के दर्शन करवाने के लिए थैंक यू “।

थकी हुई रितु कपड़े उठा कर बाहर की ओर लगी तो रूबी बोली, “रितु कपड़े रहने दे। पेशाब आया है क्या “?

रितु ने हां मैं सर हिलाया। रूबी अपने कमरे के बाथ रूम की तरफ इशारा कर के बोली, ” जा वहां चली जा और आ कर यहां बैठ जा। अपनी मैडम की चुदाई नहीं देखेगी ? चुदाई देखने में भी चुदाई करवाने जैसा ही मजा आता है”।

रितु ने कपड़े रख दिए और बाथ रूम में चली गयी। पंद्रह मिनट बाद आयी। कुछ ठीक लग रहे थी। आ कर खड़ी हो गयी। रूबी बोली, इधर आ जा मेरे पास बैठ जा “।

रितु को रूबी ने मेरे और अपने बीच बिठा लिया। रूबी ने रितु के नंगी जांघों पर हाथ फेरते हुए रितु की चूत को छूटे हुए कहा कैसी चुदाई हुई रितु, अच्छी हुई “? रितु ने हां में सर हिला दिया। रूबी बोली “अरे शर्मा क्यों रही है बोल के बता ना “।

रितु बोली, “मैडम बहुत अच्छे से चोदा सर ने। स्वर्ग के दर्शन करवा दिये। ऐसी मस्त चुदाई तो कभी नहीं हुई मेरी “। और रितु ने रूबी की चूचियों पर अपना सर रख दिया – जैसे रूबी का धन्यवद कर रही हो।

रूबी ने रितु का हाथ पकड़ा और मेरे लंड को उसके हाथ में पकड़ा दिया, “रितु जरा खड़ा कर इसको, मैं भी लूं इसको अपने अंदर”।

रूबी बाथ रूम चले गयी। “वाइब्रेटर से रगड़ते रगड़ते चूत में पानी भर गया होगा, पेशाब भी आया हुआ होगा”।

पांच मिनट बाद जब रूबी आयी तो रितु फर्श पर बैठी मेरा लंड चूस रही थी। रूबी मेरे पास ही बैठ गयी और रितु की पीठ पर हाथ फेरने लगी। रितु ने बड़े ही ख़ास अंदाज़ से मेरे लंड को चूसा, जैसे पहले चूसा था। रितु की चुसाई और उसकी चुदाई का ध्यान आते ही से लंड फिर छलांगें मारने लगा।

मैंने रितु के मुंह से लंड निकला और रूबी की तरफ देख।

रूबी बोली, “बढ़िया रितु, तूने तो बिलकुल तैयार कर दिया विक्की का लंड “।

मैंने सोचा, “ये सब इस इस लड़की की मस्त चुसाई का कमाल है क्या ज़ोर लगा कर चूसती है”।

रूबी उठ गयी और बेड के किनारे पर लेट गयी। चूतड़ों तक शरीर बेड पर – जैसे रितु लेती थी। चौड़ी की हुई टांगें हवा में। “फुद्दी का छेद दिखाई दे रहा था”।

मैं लंड रूबी की चूत में डालने के लिए उठा ही था की रितु उठी और बैठ कर अपनी मैडम रूबी की चूत चाटने लगी, चूसने लगी।

पांच मिनट की चुसाई के बाद उठी और एक तरफ हो गयी, और मेरी तरफ देखा।

मतलब, “फुद्दी तैयार है सर, जाईये लंड मैडम की लंड की प्यासी फुद्दी के अंदर डालिये और चुदाई शुरू करिए “।

मैंने रूबी की टांगें थोड़ी और खोली, रूबी के चूत के छेद पर लंड रक्खा । रितु ने चूस चूस कर पानी निकाल दिया था रूबी की चूत का। मुलायम चिकनी हुई पड़ी थी। मैंने एक झटका लगाया और लंड फच्च के आवाज़ के साथ पूरा अंदर बैठ गया।

मैं ऊपर और रूबी नीचे थोड़ा सा हिले, लंड को फुद्दी में ठीक से बिठाया और मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिये। पचीस मिनट आधा घंटा मैंने धक्के लगाए – लगातार। रूबी नीचे से चूतड़ उठा उठा कर हिल रही थी और साथ ही अपनी चूत के दाने को भी बीच बीच में रगड़ रही थी।

रितु अपनी चूत के दाने पर वाइब्रेटर चला रही थी। इस आधे घंटे की रूबी की चुदाई के दौरान रितु दो बार पेशाब करने जा चुकी थी। लग तो ऐसे रहा था जैसे पक्का ही था की दो बार पानी छोड चुकी थी।

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अगला भाग: मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 6

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