मेरी रूम मेट के पिताजी के साथ- 2

हॉट अंकल आंटी फक स्टोरी में मैं अपनी सहेली के पिता को अपने साथ सेक्स के लिए उकसा रही हूँ. हालांकि वे आंटी के साथ बहुत कामुक हैं पर वे मेरे साथ सेक्स से कतरा रहे थे.

कहानी के पहले भाग
अंकल आंटी की चुदाई का नजारा
में आपने पढ़ा कि सहेली के माता पिता को सेक्स में रत देख कर मैं अंकल के लंड का मजा लेना चाहती थी.

मैं ब्लू फिल्म देखते देखते अपने ही बदन के साथ खेलने लगी।

कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरी मुनिया में से कुछ गीला गीला चिकना सा पदार्थ टपक रहा है और मेरा शरीर अपने आप ही ढीला हो गया।
ऐसा लगा जैसे जीवन के सबसे बड़े सुख की प्राप्ति हो गई हो।

अब आगे हॉट अंकल आंटी फक स्टोरी:

यह कहानी सुनें.

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मैं वहां से उठी बाथरूम में जाकर अपनी मुनिया को धोकर साफ किया और फिर से अपने बिस्तर में आकर लेट गई।

मैंने पुनः वही ब्लू फिल्म चलाई जो थोड़ी देर पहले देख रही थी.

फिर से वही सब दृश्य मेरे सामने थे अंकल जैसा दिखने वाला व्यक्ति फर्श पर लेटा हुआ था और आंटी जैसी दिखने वाली महिला उस व्यक्ति के मोटे काले लिंग को पकड़ कर उसके ऊपर अपनी मुनिया रखकर ऊपर बैठ गई।
पूरा लिंग आंटी की मुनिया में चला गया।

मैं कल रात और आज दिन वाले अंकल आंटी के दृश्य को याद करने लगे सोचने लगी कि अंकल का लिंग कैसा है, मैं उसको देखना चाहती थी.

पर शायद मैं वह नहीं देख पाई थी.
तो मैं जुगत लड़ाने लगी कि अंकल का लिंग कैसे देखा जाए.

यह तो मुझे आभास हो गया था कि अंकल और आंटी बहुत रोमांटिक हैं और हम लोगों की अनुपस्थिति में सारा दिन हमारे फ्लैट में फ्लैट में बस इन दोनों की काम क्रीड़ा ही चलती है।
परंतु यह भी मुझे मालूम था कि अगर मैं कल ऑफिस नहीं गई और घर रुक गई तो ये लोग यह सब बिल्कुल नहीं करेंगे।

सोचते सोचते मैं कब सो गई पता भी नहीं चला।

सुबह उठने के बाद मैंने ऑफिस थोड़ी देर से जाने का निर्णय किया और पूर्वी के जाने का इंतजार करने लगी।

9:00 पूर्वी मेरे कमरे में आई और पूछा- दीदी, ऑफिस नहीं चलना क्या?

मैं बोली- बाबू, आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है, पहले डॉक्टर के पास जाऊंगी, वहां से ऑफिस आऊंगी। अभी तू चली जा, हम सीधे ऑफिस में ही मिलते हैं।
पूर्वी मुझे बाय बोल कर चली गई।

अब मैं अपने दिमाग से कुछ अजीब अजीब जुगत लगा रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने एक बहुत छोटी सी निक्कर निकाली, जिसमें मेरी पूरी टांगें दिखाई दें.
और ऊपर बहुत झीना सा सेंडो पहना जिसमें मेरे दोनों निप्पल दिखाई दें.

मैं जानबूझकर बाहर निकल आई।

अंकल और आंटी अपने कमरे में थे.

मैं सोचने लगी कि कैसे उन दोनों से मिला जाए।

कुछ देर इंतजार करने के बाद मैंने उन लोगों का कमरा खटखटाया तो आंटी वही नाइटी पहने हुए बाहर आई।

अंदर की तरफ झांक कर मैंने देखा अंकल बिस्तर में पड़े थे, उन्होंने चादर ओढ़ रखी थी।
जहां तक उन्होंने चादर ओढ़ रखी थी, वहाँ से ऊपर का बदन उनका आज भी नग्न था।

अब चादर के नीचे उन्होंने कुछ पहना था या नहीं उसका मुझे आभास नहीं था।
पर सोचकर ही मेरे निप्पल फिर से कड़े होने लगे।

आंटी ने जैसे ही दरवाजा खोला, मैं जानबूझकर दरवाजे को धक्का देते हुए उनके कमरे में चली गई और उनके बिस्तर पर ही बैठ गयी।

अंकल ने मुझसे पूछा- बेटा, तबीयत कैसी है? अगर डॉक्टर को दिखाना है तो मेरे साथ चलो।

मैंने जवाब दिया- अंकल, कल से बहुत बेहतर है, पर आज मैं ऑफिस नहीं जाऊंगी। कहीं बाहर घूमकर आऊंगी तो मूड फ्रेश हो जाएगा।

आंटी ने कहा- ठीक है, मैं भी तेरे साथ चलती हूं।
अंकल बोले- तुम लोग जाओ, मैं तो आराम करूंगा।

अंकल की यह बात सुन जैसे मेरी तो योजना फुस्स हो गई।

आंटी ने कहा- तुम तैयार हो जाओ, मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बनाती हूं।
और वे किचन की तरफ चली गई।

इधर मैं देखना चाहती थी कि अंकल ने चादर के नीचे कुछ पहन भी रखा है या वे आज भी बिल्कुल नंगे ही हैं।

मैंने अंकल को बोला- चलो अंकल, आप तैयार हो जाओ, डॉक्टर के पास चलते हैं।
तो अंकल ने मुझसे कहा- तुम अपने कमरे में चलो, मैं तैयार होकर आता हूं।

मैंने कहा- अरे अंकल, अब मैं कहीं नहीं जाऊंगी। आपके साथ ही चलूंगी। आप जल्दी से उठ जाओ। बिस्तर छोड़ दो और तैयार हो जाओ।

पर अंकल मुझे मेरे कमरे में भेजना चाहते थे.
उसी से मैं समझ गई अंकल आज भी चादर के नीचे बिल्कुल नंगे पड़े हैं।

हे भगवान, कितना उत्साह है इन दोनों में!
मैं सोचने लगी।

मैंने भी जिद कर ली- नहीं अंकल, मैं नहीं जाऊंगी। आप उठ जाओ!
ऐसा बोलकर मैं जानबूझकर अंकल की तरफ इस तरह झुकी कि मेरी झीनी सी सैंडो के अंदर के निप्पल अंकल को दिखाई दें।

हालांकि मुझे भी यह नहीं समझ आ रहा था कि मैं जो कर रही थी वह सही था या गलत!
और मैं ऐसा क्यों कर रही थी.

पर अंदर से मेरा मन था कि जैसे मैंने अंकल के नग्न बदन को देखा है, ऐसे अंकल भी मेरे बदन को देखें।

मैं जानबूझकर अंकल की तरफ इस अंदाज से झुकी … और अंकल की नजरें मुझ पर पड़ी भी … उनकी निगाहें सीधे मेरे निप्पल तक भी गई।
पर उन्होंने वहां से तुरंत नजरें घुमा ली और वे बाथरूम जाने के लिए बिस्तर से उतरने लगे।

उन्होंने अपना एक पैर नीचे रखा, तभी उन्हें अहसास हुआ कि उन्होंने कुछ नहीं पहना है और उनके कमरे में मैं बैठी हूं।

तो उन्होंने तुरंत वह पैर फिर से चादर के अंदर कर लिया।

अब अंकल ने बिस्तर पर बैठे-बैठे ही चादर को अपनी कमर के चारों तरफ लपेटा और उठकर वॉशरूम चले गए।
मैं अपने द्वारा की गई शरारत पर खुद ही हंस पड़ी।

आंटी किचन में नाश्ता बना रही थी।
मैं भी उठ कर अपने कमरे में गई और बहुत तेजी से तैयार होकर बाहर आ गई क्योंकि मुझे अंकल के साथ डॉक्टर के पास जाना था।

मैंने जानबूझकर मिनी पहनी थी.
मुझे अंकल के साथ जाना अच्छा लग रहा था।

हम दोनों ने जल्दी से नाश्ता किया और नीचे आकर डॉक्टर के पास चले गए.

ऑटो में भी मैं अंकल से चिपक कर बैठी थी।
हालांकि अंकल बड़े संतुलित तरीके से बैठे थे और वे कोई भी ऐसी हरकत नहीं कर रहे थे जिससे मैं यह समझ सकूँ कि उनका झुकाव मेरी तरफ कुछ है।

डॉक्टर के यहां से दवाई लेने के पश्चात मैंने अंकल से कहा- अंकल, आज बाहर तो निकले हुए हैं, मुझे अपने लिए कुछ सामान भी लेना है, अगर आपके पास थोड़ा सा समय है तो चलिए, कुछ शॉपिंग भी कर लेते हैं।
अंकल ने कहा- हां बेटा, तुमको जो लेना है ले लो।

मैं वहीं पास के एक लायेंज़री शोरूम में चली गई।
अंकल बाहर ही खड़े हो गए।

मैंने अंकल को कहा- अंकल, इतनी गर्मी में बाहर क्यों खड़े हैं? अंदर आ जाइए!
पर अंकल शायद मुझसे एक संयमित दूरी बना कर रखना चाहते थे।
वे बोले- बेटा, जो तुमको लेना है ले लो, मैं बाहर भी ठीक हूं।

लेकिन पता नहीं क्यों आज मुझ पर एक अजीब सा जुनून सवार था, मैं अंकल का हाथ पकड़ के शोरूम के अंदर ले गई और वहीं अंकल को बिठा दिया और अंकल के सामने ही शोरूम के मालिक से अपने लिए ब्रा मांगी।

अंकल ने एक पल को मेरी तरफ नजरें उठाकर घूरा और उठ कर तुरंत शोरूम से बाहर चले आए.
मैं भी अंकल के पीछे पीछे बाहर आ गई और अंकल से फिर से शोरूम के अंदर बैठने की जिद करने लगी।

अंकल ने मुझसे गुस्से में कहा- बेटा, अपनी हद में रहो और जो भी खरीदना है जल्दी से खरीद कर बाहर आओ। मैं यहीं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।
मैंने खुद को संयमित करते हुए कहा- चलिए कोई बात नहीं, मुझे जो लेना होगा मैं बाद में ले लूँगी। अभी कुछ नहीं लेना, चलिए चलते हैं।

अब अंकल ने अनमना सा मुंह बनाते हुए मेरी तरफ देखा और कहा- यह कोई तरीका नहीं है, जो भी लेना है, अंदर जाकर ले लो।
मैंने भी मना कर दिया।

अंकल ने फिर से मेरी तरफ अजीब सी नजरों से घूरा और बोले- अच्छा चल अंदर ही बैठता हूं और जो भी लेना है, जल्दी लेना।

वे मेरे साथ फिर से शोरूम के अंदर आ गए।
मैंने वहां से अपनी पसंद की दो ब्रा खरीदी और अंकल के साथ बाहर आ गई.

बाहर आते ही अंकल ने गुस्से में मुझसे पूछा- श्रुति बेटा, तू इस तरह की हरकत क्यों कर रही है?
मैंने भी बिंदास जवाब दिया- बस अंकल, मुझे आपका साथ अच्छा लग रहा है। दो-तीन दिन में आप चले जाएंगे तब तक सोच रही हूं कि आपके साथ को एंजॉय करूँ।

अंकल ने जवाब दिया- बेटा, किसी का भी साथ इंजॉय करना अच्छी बात होती है … पर लिमिट में, लिमिट क्रॉस करना ठीक नहीं है।
मैंने भी पलट कर कहा- अंकल, आप चिंता मत कीजिए, मेरी तरफ से ऐसा कुछ नहीं होगा।

मैंने अंकल को आश्वस्त करने की कोशिश की और बाहर से अपने लिए ऑटो देखने लगी।
पर मेरा घर जाने का बिल्कुल भी मन नहीं था।
मैं अंकल के साथ थोड़ा और समय बिताना चाहती थी। मैं यह भी चाहती थी के घर जाने से पहले मेरे प्रति अंकल का मूड बिल्कुल ठीक हो जाए।

मैंने अंकल को पास के ही एक मॉल में चलने को कहा।
थोड़ी ना नुकुर के बाद अंकल तैयार भी हो गए।

हमने उस मॉल में जाकर हल्का फुल्का खाना खाया और कुछ शॉपिंग भी की।

मैंने अंकल के लिए अपनी तरफ से एक कमीज भी खरीदी.
जब अंकल का मूड अच्छा महसूस हुआ तो हम वहां से घर को चल दिए.

घर जाने के बाद मैं तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल गई।
पर मेरे दिमाग पर तो जैसे अंकल के नंगे बदन का नशा चढ़ चुका था।

ऑफिस में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था.
हालांकि पूर्वी का काम अभी नहीं निपटा था।
परंतु मैंने अपना काम तेजी से निपटाया और घर पहुंच गई।

मैंने अपनी चाबी से दबे पाँव दरवाजा खोला और अंदर पहुंची तो देखा आंटी घर पर नहीं थी.
अंकल वही नग्नावस्था में बिस्तर पर लेटे हुए थे और सामने टीवी में कोई ब्लू फिल्म चल रही थी।

जैसे ही मुझे आभास हुआ कि आंटी घर पर नहीं हैं, मैं सीधे झटके से दरवाजा खोलकर अंकल के कमरे में चली गई।

अंकल मुझे देखकर अवाक रह गए और टीवी का रिमोट ढूंढने लगे.
मेरी नजरें टीवी पर पड़ी और बिस्तर पर लेटे अंकल पर।

मैं मुस्कुराई और आगे बढ़ कर मैंने टीवी का स्विच बंद कर दिया।
अंकल मुझसे बोले- अचानक आ गई? तबीयत तो ठीक है ना?

मैं कोई जवाब दिये बिना बिस्तर में अंकल की चादर में घुस गई।

अंकल काफी असहज से हो गए पर चूँकि वो चादर के अंदर बिल्कुल नंगे थे तो एकदम भाग भी नहीं सकते थे।
उन्होंने चादर को अपने चारों तरफ लपेट लिया.

पर मैंने भी सोच लिया था कि इतना अच्छा मौका दोबारा नहीं मिलेगा.
मैंने जबरदस्ती खींच कर चादर को उठाया और अंकल के बराबर में ही घुस गई।

जैसे ही मेरा हाथ चादर के अंदर गया, मेरा हाथ अंकल के पूरे कड़क कामुक लिंग से टकराया।

अंकल ने चादर के अंदर अपना हाथ बढ़ा कर मेरा हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन तब तक मैं अपने हाथ की मजबूत पकड़ से उनके प्रेम यंत्र को पकड़ चुकी थी।

अंकल ने मेरी तरफ देखा और बोले- श्रुति, तुम बच्ची हो और मैं तुम्हारा अंकल! हम दोनों के बीच यह सब ठीक नहीं है। हाँ मैं मानता हूं कि तुम्हारी भी उम्र है। पर अपनी उम्र के लड़के ढूंढो। मेरी उम्र तुमसे बहुत अधिक है।

मैंने अंकल की नंगी छाती पर हाथ फेरते हुए कहा- अंकल, मुझे आपका साथ अच्छा लग रहा है। दो दिन बाद आप वापस जाने वाले हैं। क्या आप नहीं चाहते कि मुझे कुछ खुशियां देकर जाएँ। और ऐसा नहीं है कि मेरे उम्र के लोगों की कमी है पर जो सुख आपके साथ में मिल रहा है, वह मुझे आप के बाद नहीं मिलेगा।

लेकिन अंकल शायद इस सब के लिए तैयार नहीं थे।
वे बिस्तर से हटना चाहते थे.

मैंने अपने हाथ से अंकल के काम दंड को सहलाना शुरू कर दिया।
अंकल की मनोदशा कैसी थी, मैं महसूस कर रही थी.

वे उस समय का सुख-आनंद छोड़ना भी नहीं चाहते थे और मेरे साथ कुछ करना ही नहीं चाहते थे।
अंकल बार-बार मुझसे बचकर वहां से उठने की कोशिश करने लगे।

मैंने अपनी जीभ से अंकल की छाती और उनकी चूचुक को चाटना शुरू कर दिया.

अंकल का विरोध पहले के मुकाबले काफी कम गया था।
वे अंकल बार-बार यही कह रहे थे- श्रुति, समझा करो, यह सब ठीक नहीं है।

मैंने तो जैसे अपने कानों में रुई डाल रखी थी।
मैं कुछ सुनने की स्थिति में ही नहीं थी। मैं लगातार अंकल के बदन को सहला रही थी।

धीरे-धीरे अंकल का विरोध खत्म होने लगा और फिर भी अंकल मेरा साथ नहीं दे रहे थे।
वे सिर्फ आंख बंद करके उस बिस्तर पर पड़े हुए थे।

जब मैंने देखा कि अंकल बिल्कुल विरोध नहीं कर रहे हैं तो मैंने अंकल के ऊपर से चादर को हटा दिया।

वाह … क्या बेहतरीन लिंग था अंकल का!
सीधा तना हुआ कमरे की छत को ताक रहा था मुआ।

बिल्कुल झंडारोहण की अवस्था में सीना ताने खड़ा था।
उसको देखने की मेरी 2 दिन पुरानी तमन्ना पूरी हो गई।

अंकल आंख बंद करके बिस्तर पर ही लेटे हुए थे।

मैंने उनके लिंग के ऊपरी हिस्से पर बने छोटे से मुंह को खोला और अपनी एक उंगली से उसको सहलाना शुरु कर दिया।

अंकल को जैसे बहुत जोरदार करंट लगा, उनका पूरा शरीर हिल गया और उन्होंने आंखें खोलकर मेरी तरफ बहुत निरीह हालत में देखा।

वे मुझसे बोले- श्रुति, तुमने ये सब कहां से सीखा?

मैंने भी बेशर्म होकर जवाब दिया- अंकल ऐसा नहीं है कि ब्लू फिल्म देखना सिर्फ आपको ही आता है।

अंकल मेरी तरफ देख कर मुस्कुराए और बोले- या तो यह सब मत करो … या प्लीज, मुझे अंकल मत कहो। खुद पर बड़ी शर्मिंदगी सी महसूस हो रही है।
मैंने जवाब दिया- अच्छा, राजीव कहूं तो चलेगा?
अंकल ने कहा- चलेगा।
मैंने कहा- ओके राजीव!

अंकल मेरी तरफ देख कर हल्का सा मुस्कुराए और फिर से बोले- प्लीज श्रुति, मैं चाहूंगा कि तुम अब रुक जाओ. तुम्हें तुम्हारी उम्र के बहुत लोग मिलेंगे. मेरे साथ यह सब ठीक नहीं है।

मैंने पलट कर जवाब देने की बजाय अंकल के उस कड़क प्रेम दंड को अपने नाजुक होठों से लगा लिया।

अब तो जैसे अंकल का विरोध सहमति में बदल गया।
अंकल लेटे-लेटे ही अपने चूतड़ ऊपर उछाल कर अपने उस प्रेम दंड को मेरे होठों के अंदर मेरे गले तक उतारने लगे।

मैं भी उस पल अपने सारे वस्त्र उतारना चाहती थी।
पर मैं एक पल के लिए भी अंकल को छोड़ना नहीं चाहती थी कि कहीं अंकल का मूड़ फिर से न बदल जाए।
मैंने एक हाथ से अंकल की दोनों गोटियों को सहलाना शुरु कर दिया।

अब तो जैसे अंकल पर मेरा जादू असर करने लगा।
अंकल ने हाथ बढ़ाकर मेरी टॉप के अंदर पीठ को सहलाना शुरू कर दिया और ऊपर हाथ पहुंचते-पहुंचते मेरी ब्रा तक पहुंच गया।

“उफ्फ … उफ्फ … ” मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगी।

अंकल बोले- यह वही ब्रा है ना जो तुमने आज दिन में खरीदी थी।
मैंने सिर हिलाकर हां में जवाब दिया।
वे बोले- मुझे उसी समय तुम्हारे इरादे समझ जाने चाहिए थे।

अंकल के लिंग के ऊपरी हिस्से को तेजी से चाटने लगी.
तब अंकल भी जोश में आ गए थे, उन्होंने मेरी टी-शर्ट को ऊपर करके मेरी ब्रा को खोल दिया और हाथ आगे बढ़ा कर मेरे दोनों निप्पल को सहलाने लगे।

हाय रे … क्या आनंद था।
कसम से ऐसा लग रहा था जैसे बस समय यही रुक जाए।

मेरे खुद के अलावा आज पहली बार कोई दूसरा मेरे निप्पल को सहला रहा था।
मैं तो जैसे स्वर्ग में गोते लगा रही थी।
मेरा पूरा बदन अकड़ने लगा।

तभी अचानक बाहर दरवाजे पर घंटी बजी.

अंकल और मैं दोनों एक दूसरे को घूरने लगे.

मैंने तेज़ी से अपने कपड़े सही किए और दरवाजे पर पहुंची।
बाहर आंटी खड़ी थी जो शायद मंदिर से प्रसाद चढ़ा कर लौटी थी।

मेरा तो मूड़ ही खराब हो गया।

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हॉट अंकल आंटी फक स्टोरी का अगला भाग: मेरी रूम मेट के पिताजी के साथ- 3

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