मां को चोदने के लिए लोगों ने उकसाया-5

पिछला भाग पढ़े:- मां को चोदने के लिए लोगों ने उकसाया-4

जिस दिन अमित ने रेखा से मिलने और उसके घर आने की बात की, उसी रात रेखा अपने ही घर में अपने लड़के से तीसरी बार चुदवा रही थी। वास्तव में वहीं अमित को ऊपर से चोद रही थी। रेखा ने मज़ाक में कहा था लेकिन मैंने निश्चय किया कि अब से चाहे अकेले हों या दूसरे के सामने, मैं रेखा को मां ही कह कर पुकारूंगा।

मैं: अमित की प्यारी कुतिया, अब तुम्हें अच्छा लगे या बुरा, अब से मैं हर हमेशा तुम्हें मां ही बोलूंगा।

रेखा ने उपर से एक जोरदार धक्का मारा।

रेखा: अपने अरविंद सर और दोस्तों के सामने भी!

मैं: हां मेरी प्यारी मां, सबके सामने। मेरे मां-बाबू जी हर टर्म में एक बार ज़रूर आते हैं। इस बार वो जब आयेंगे तो उनके सामने भी अपनी इस खूबसूरत रंडी को मां ही बोलूंगा। मां, तुम कहती हो कि अपने इस कॉलेज कंपाउंड में बहुत सी रंडियां है, तो तुम पता लगवाओ, अरविंद सर भी ज़रूर किसी कुतिया के बूर में घुसे रहते होंगे। फिर भी अरविंद सर को अगर मालूम पड़ा कि मैं तुम्हें चोदता हूं, तो एक महीना के अंदर मैं इन्दिरा को यहां बुलाऊंगा।

मैं: मैं अपनी मां को बढ़िया से जानता हूं। अपने बेटे की ख़ुशी के लिए वो अरविंद सर से ज़रूर चुदवा लेगी। एक रुम में अरविंद मेरी पुरानी मां को चोदेगा, और मैं उसके ही बग़ल में अपनी नई मां इस इन्दिरा को चोदूंगा। मैं भी तो देखूं कि आख़िर अरविंद कैसा चोदता है जो मेरी प्यारी रेखा मां एक उसी कुत्ते से चुदवा रही है। इन्दिरा, अब सर मुझे कॉलेज से निकाल दें या जेल में डाल दें, मां मैं तुम्हें चोदता रहूंगा।

मेरी बातों से रेखा ज़रूर खुश हुई होगी। दोनों हाथों से मेरी चेस्ट को रगड़ते हुए जोर जोर से धक्का मारती रही। मैं उसकी ख़ूबसूरती को निहारता रहा और पहले दो राउंड जैसा पहले रेखा झड़ी और डेढ़ दो मिनट बाद मैं भी झड़ गया। हम दोनों हांफ रहे थे। थोड़ी देर बाद-

रेखा: बेटा, आज तो तू गया। मादरचोद कितना चोदा तुमने। हमने चार बजे ये तीसरी राउंड शुरु की थी, और अब साढ़े पांच बज रहे है।

मैं: मां, मैंने दोनों बार तुम्हें 40-45 मिनट ही चोदा, कुतिया तुमने ही डेढ़ घंटा चोदा। रानी तैयार रहना, आज रात फिर तेरा ये बेटा अपनी मां को चोदने आयेगा।

रेखा ने मुझे ढकेला, मैं फ़्लोर पर खड़ा था और उसने फुर्ती से मेरे दोनों पैर पकड़ लिए।

रेखा: मालूम नहीं, आज अचानक इतनी गरमी कैसे आ गई कि तुम्हें घर बुला कर चुदवा ली। मुझमें तेरे जैसी हिम्मत नहीं है। पिछली रात जैसा संदेश दिया था जल्दी वैसा संदेश जब दूंगी तभी आना। लेकिन तैयार रहो सिर्फ़ तेरे ही क्लास की लड़कियां ही नहीं, दूसरी लड़कियां और उनकी मां भी तुमसे तेरे लंड की भीख मांगेंगीं। अमित, तुम्हारे मुंह पर नहीं बोल रही हूं। 11-12 साल से चुद रही हूं, लेकिन आज पहली बार मालूम पड़ा कि चुदाई का असल सुख क्या होता है। जल्दी से वापस रुम में जाओ।

रेखा वैसे ही नंगी खड़ी रही। मैंने अपना कपड़ा पहना और रेखा को चूम कर, चूचियों को दबा कर, उनके घर से निकल गया। रेखा नंगी ही मुझे घर के मेन गेट पर छोड़ने आई। मैंने एक बार और चूमा और होस्टल की ओर चल दिया। चारों तरफ़ सुबह की रोशनी फैलने लगी थी।

कई स्टाफ़, टीचर रास्ते में मिले। मैंने उन्हें प्रणाम किया, और पूछने पर बताया कि सुबह की सैर कर रहा था। क़रीब-क़रीब सभी ने एक बात ही कही, “बेटा अमित, हम सब समझते हैं, तुम अच्छे स्टूडेंट हो, पढ़ाई पर ध्यान दो। इन औरतों का क्या, तुम्हारे जैसे अमीर लड़कों से रुपया ऐंठती है। कभी रंडी-बाजी करते पकड़े गये तो कॉलेज से निकाल दिए जाओगे।”

मैंने झूठी सफ़ाई दी।

मैं: सर, मैं किसी को चोदने नहीं गया था। आप बनबारी गॉर्ड से पूछ लीजिए। मैं एक घंटा पहले ही होस्टल से निकला था।

बोलने को मैंने अपनी सफ़ाई दी, लेकिन डर भी था कि किसी ने अगर गार्ड से पूछ-ताछ की तो मैं मारा गया। मैं गार्ड के पास पहुंचा लेकिन इधर-उधर, आस-पास कुछ दूसरे स्टूडेंट्स थे। मैं गार्ड के पास से गुजरा तो उसने मुझे ग़ुस्से से देखा।

“ड्यूटी ख़त्म होने के बाद मेरे रुम में आना, बहुत ज़रूरी काम है।” धीरे से बोल कर मैं अपने रुम में आ गया। रेखा और उसके साथ की चूदाई के बारे में सोच-सोच कर मैं फिर बहुत गर्म हो गया, और मैंने सारे कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया। मैं फ़्रेश हुआ। बाथरूम में नहाने के लिए घुसने ही वाला था कि डोर पर नॉक हुआ।

हम सीनियर अक्सर रुम में नंगे रहते थे। मैं भी नंगा ही था और वैसा ही डोर खोला। मैंने सोचा था कि मेरा कोई दोस्त होगा, लेकिन नहीं, बनबारी गार्ड था। वो जल्दी से रुम में घुसा। उसने दरवाज़ा अंदर से बंद किया। मैं कुछ बोलता लेकिन उससे पहले उसने दोनों हाथों से मेरा फनफनाया हुआ लंड पकड़ लिया।

बनबारी: अमित बाबा, आपका लंड तो ऐसा है कि औरत आपसे चुदवाने के लिए रुपया मांगेगी नहीं, रुपया देंगी। इतना लेट कैसे हो गया? वार्डन देख लेते तो बहुत मुश्किल हो जाती।

मैंने थोड़ा अपना भाव बढ़ाने का सोचा।

मैं: बहुत ग़लत जगह फंस गया यार। एक 30-32 साल की औरत ने चोदने बुलाया था। नाम नहीं बताऊंगा, एक दुकानदार की घरवाली है। साली को मेरी चुदाई इतनी पसंद आई कि उसने अपनी कुंवारी बेटी और 23-24 साल की बहु को भी बुला लिया, और तीनों ने मेरी हालत ख़राब कर दी।

मैं: आज मैंने पहली बार चुदाई की लेकिन बनबारी काका, मां, बेटी और बहु को एक-दूसरे के सामने चोद कर मज़ा आ गया। हरामजादी ने फिर बुलाया है, लेकिन उसके घर इतनी जल्दी नहीं दुबारा नहीं जाऊंगा। बनबारी क्या कर रहे हो? यह ठीक नहीं।

बनबारी मेरे सामने अपने घुटनों के बल पर बैठ गया। फिर दोनों हाथों से लंड को पकड़ कर चूसने लगा। मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। एक 43-44 साल का अधेड़ आदमी मेरे जैसे लड़के का लंड चूसने लगा था। रात में रेखा ने भी थोड़ी देर चूसा था, लेकिन ये आदमी जैसा चूस रहा था मुझे ज़्यादा मज़ा आ रहा था। बनबारी को अपना काम बहुत बढ़िया से आता था। रेखा ने उपर से मुझे चोदा तो क़रीब डेढ़ घंटा के बाद झंडा था।

लेकिन इस आदमी ने इतना चुभला-चुभला कर चूसा, कि 25 मिनट की चुसाई के बाद ही मैं झड़ने लगा और जोश में आकर मैंने उसके माथे को अपने लंड पर पूरा दबा दिया। लंड का सारा रस सीधा उसके गले के अंदर चला गया। फिर भी वह लंड को चूसता ही रहा। आखिर जब उसने रस का आख़िरी बूंद तक चूस ली, तब उसने लंड को मुंह के बाहर किया। बनबारी ने लंड को चारों तरफ़ से चाटा और खड़ा हो गया।

बनबारी: साहब, आज रात अपने रूम में ही रहना। मौक़ा निकाल कर दिन में ही सो लीजिएगा। क्योंकि रात में जो माल आपके पास आएगी वो आपको एक मिनट भी आराम नहीं करने देगी।

मैं: बनबारी, रात वाली तीनों माल ने लंड चूसा था। लेकिन तुमने जो चूस कर मज़ा दिया है, वो मज़ा किसी को भी चोद कर नहीं आया था। तुम ही बीच-बीच में आकर मुझे ठंडा कर दिया करो। मैं तुम्हें बढ़िया इनाम दूंगा। और अगर अरविंद सर की घरवाली रेखा मैडम को मुझसे चुदवा दो तो मैं तुम्हें 200 नहीं 2000 दूंगा।

मैं बनबारी से रेखा के बारे में जानना चाहता था। उसने भी वही जवाब दिया जो रेखा ने कहा था। बनबारी को मेरा लंड बहुत पसंद आ गया था। वह ढीले लंड को भी सहला रहा था।

बनबारी: किस कुतिया का नाम ले लिया साहब। साली को अपने रुप रंग पर बहुत घमंड है। मैंने और दूसरे सभी गार्ड ने उसकी कितनी ख़ुशामद की, लेकिन साली धंधा करने के लिए मानती ही नहीं है। आज शाम ही आपके दोस्त विनोद साहब ने कहा है कि रेखा को एक बार चोदने के लिए बीस-पच्चीस हज़ार तक देने को तैयार है। मुझे सिर्फ़ रेखा से बात करने के लिए 500 दिया है। उसको भूल जाइये साहब, मैं आपके लिए यहां की सबसे बढ़िया-बढ़िया माल को लाऊंगा।

बनबारी: कल ही एक ख़ास औरत से बात करूंगा। उसे एक लम्बी चुदाई करने वाले की तलाश है। वो स्टूडेंट्स के रुम में नहीं जाती है, लड़के को कहीं और बुलाती है। वो पहले ख़ुद नहीं चुदवायेगी। उसके सामने ही आपको किसी और को चोदना होगा। अगर आपकी चुदाई उसे पसंद आई, तभी आपसे चुदवायेगी। चार साल पहले एक लड़का था। उसका भी नाम विनोद था। तीन साल तक लगातार औरत ने उससे चुदवाया था। तीन दिन पहले मिली थी। उस लड़के के जाने के बाद से उसने किसी से भी नहीं चुदवाया है। कॉलेज की जवान लड़कियों को बर्बाद करती है।

मुझे उसकी किसी और बात से कोई मतलब नहीं था। मैं यही जान कर खुश था कि मेरी रेखा, मेरी नई मां बिकाऊ नहीं है। मैंने बनबारी से कहा कि रात में रुम में ही रहूंगा। मैंने उसे 500 रुपया दिया। उसने लंड को 2-3 मिनट और चूसा और उसके बाद बाहर चला गया। रात भर मैं एक मिनट भी नहीं सोया था लेकिन रेखा की ख़ूबसूरती और चुदाई की उसकी ख़ुशी ने दिन भर मुझे तरो-ताज़ा बनाये रखा।

फ़र्स्ट पीरियड में क्लास में घुसा ही था कि एक मिठी आवाज़ आई, “क्या बात है अमित, आज कुछ ज़्यादा ही चमक रहे हो? क्या हुआ?”

मैंने नज़र घुमाकर देखा, मेरी क्लासमेट रचना थी। एक क्लास में थे तो बात-चीत हो जाती थी। लेकिन हम दोस्त नहीं थे। मैंने उसकी बात का जवाब देता, उससे पहले संगीता बोली, “अमित का चेहरा चमकेगा ही, पिछली शाम ही साहब ने यहां की ब्यूटी क्वीन रेखा सिंह से बात की थी।”

इन सभी को जलन थी कि मैंने रेखा से बात की। अगर इन्हें यह मालूम हो जाता कि रेखा ने रात भर मुझ से चुदवाया, तो सभी को दिल का दौरा पड़ जाता। मैं विनोद के बग़ल में अपने सीट पर बैठा। मैं ने लाऊडली जवाब दिया।

मैं: रचना मैडम, चेहरा इसलिए चमक रहा है कि रात सपने में एक स्वर्ग की अप्सरा ने कहा कि सुबह-सुबह खूबसूरत रचना मुझसे बात करेगी और शाम को रेखा मैडम ने कहा कि विषैला सांप के काटने से कोई बच भी जाये, लेकिन संगीता के काटने से कोई नहीं बच सकता। इसलिए मेरी मां मुझे माफ़ करो, मुझे इतनी जल्दी नहीं मरना।

संगीता स्कूल के हेडमास्टर की छोटी बेटी थी। संगीता को ग़ुस्सा आना लाज़िमी था।

संगीता: बेटा, अब तो तू गया। तेरी रेखा मां भी तुम्हें नहीं बचा पायेगी।

“ कीप क्वाईट”, एक रौबदार आवाज़ गूंजी। अरविंद सर क्लास के अंदर आये।

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