मकान मालिक कुंवारी बेटियां- 3

देसी सेक्सी गर्ल हिंदी कहानी में पढ़ें कि मैंने मकान मालिक की 19 साल की कमसिन लड़की की कामवासना को कैसे हवा दी और उसे सेक्स के लिए उत्तेजित कर दिया.

दोस्तो, मैं संदीप कुमार आपको मकान मालिक की दो कुंवारी बेटियों की चुदाई की कहानी सुना रहा था.
कहने के दूसरे भाग
नंगी कुंवारी चूत हाथ से फिसल गयी
में अब तक आपने पढ़ा था कि बड़ी बहन पूजा मेरे साथ सैट होकर वापस चली गई थी लेकिन वह भी मुझसे अब तक चुदी नहीं थी.
इधर दूसरी वाली छोटी लड़की भावना अपनी कमसिन जवानी से मेरे लौड़े को झुलसा रही थी और मैं उसे पटाने के लिए उसकी कुतिया जूली का सहारा ले रहा था.
जूली हीट पर थी और उसकी चूत कुत्ते के लंड के लिए मचल रही थी. अभी वही सीन चल रहा था.

अब आगे देसी सेक्सी गर्ल हिंदी कहानी:

मैंने एक नजर भावना की तरफ देखा, वह कुत्ते और कुतिया की काम-क्रिया को बड़े गौर से देख रही थी.

देशी कुत्ते ने अपने आगे के पैर उठाए और जूली की कमर में अपने पैर फंसा कर उसे अपनी तरफ खींचा.
वह अपना लंड जूली की चूत के पास ले जाकर जोरदार झटके देने लगा.

भावना ये सब बड़े गौर से देख रही थी और उसने अपने होंठ चबाना शुरू कर दिए थे.
शायद भावना को भी यह देख उत्तेजना आ गई थी.
उसे नहीं पता था कि मैं उसको देख रहा हूं.

जैसे ही कुत्ते ने लंड पूरी तरह चूत में डाला और लॉक करके पल्टी मारी, भावना ने मेरी तरफ देखा.
मैं उसे ही देख रहा था.

उसकी नजर मुझसे मिली और शर्म से झुक गई.
फिर वह भाग कर घर के अन्दर चली गई.

उसकी चोरी पकड़ी गई थी जिसे छिपाने के लिए वह वहां से भाग गई थी.
फिर वह बा‍हर नहीं आई.

मैं भी थोड़ी देर रूका और जब आधा घंटा लटके रहने के बाद जूली की चुदाई का खेल खत्म हुआ तो देशी कुत्ता तुरंत भाग गया और जूली अपनी पूछ हिलाती हुई मुझे चाटने लगी थी.

जूली का शुक्रिया अदा करने का अंदाज मैं समझ गया था.

थोड़ी देर बाद मैं भी ऊपर अपने रूम में चला गया.

जूली शांत हो गई थी.
मैंने डॉक्टर का काम कर दिया था.

अब जैसे सब कुछ बदल गया था.
जब भी भावना मिलती, तो सामने से प्यारी सी स्माईल पास करती.
मैं भी हल्की स्माईल दे देता.

मैं मन ही मन कहता कि चलो कुछ तो बात बनी, पर अभी भी मंजिल दूर थी.

कुछ दिन यूं ही बीत गए.

उनके यहां कोई मेहमान आया हुआ था.
पता चला भावना के बड़े भईया मयूर की मंगनी होने वाली है. उसी की तैयारी के लिए मेहमान कुछ दिन पहले ही आ गए थे.

एक रात लगभग 10 बजे जब मैं पढ़ाई कर रहा था, तभी तेज हवा चलने लगी और एकाएक मौसम बदल गया.
बिजली भी चली गई.

मैंने थोड़ा गुनगुनाना शुरू कर दिया.
तभी एक आवाज आई- वाह क्या आवाज है!

मैं शांत हो गया और आश्चर्य से दरवाजा खोला, तो वहां कोई नहीं था.

थोड़ी देर बाद फिर से आवाज आई- गाना क्यों बन्द कर दिया?
मैंने गौर किया, तो पता चला कि ये आवाज खिड़की से आ रही है.

मैं खिड़की के पास जाकर बोला- कौन?
उधर से आवाज आई- मैं भावना.

दोस्तो, मैं बता दूं कि मालिक का घर दो फ्लोर का है. ग्राउंड फ्लोर में मकान मालिक और उनके परिवार के लोग रहते थे और फर्स्ट फ्लोर में दो कमरे थे, जिसमें से एक रूम में मैं रहता था और एक कमरे में मयूर.
जब भी वह छुटटी में आता, तो वहीं सोता था.

दोनों कमरों के सामने खुली छत्त थी, जहां मैं कभी-कभी टहलता हूँ. उधर ही सभी कपड़े भी सूखते हैं.

मैंने पूछा- आप यहां कैसे?
उसने उत्तर दिया- मेरे यहां मेहमान आए हुए हैं और ऊपर से मेरे क्लास टेस्ट भी चल रहे हैं, तो मैं कुछ दिन यहीं सोऊंगी.

तभी जोर से बादल गरजे.
उसने कहा- क्या मैं आपके रूम आ सकती हूँ!

शिकार खुद शिकारी के पास आ रही थी.
कौन भला मना कर सकता था.

पर मैंने जानबूझ कर कहा- आपके घर वाले आ गए और हमें साथ में देख लिया, तो वे क्या सोचेंगे?

उसने कहा- वे सब जल्दी सो जाते हैं, नहीं आएंगे. मुझे डर लग रहा है प्लीज. वैसे भी कौन-सा रात भर रूकूंगी. जब बिजली आ जाएगी तो चली जाऊंगी.

मैंने ओके कहा और वह दरवाजे पर आ गई.
जैसे ही दरवाजा खोला … तो वाह क्या सीन था!

मोमबत्ती की हल्की रोशनी में ब्लैक टाप, पीली नेकर, खुले बाल … मेरी आंखों को यकीन नहीं हुआ.

भावना मेरे सामने थी.
मैंने उसे अन्दर बुलाया, तभी तेज बारिश शुरू हो गई.

अब हम दोनों बेड पर आमने सामने बैठ गए.
मैंने उससे बातें शुरू की.

पहले हाल चाल पूछा.
उसने अच्छे से जवाब दिया.

फिर कॉलेज के बारे में पूछा.
उसके बाद बातों में रूचि लाने और पता करने के भाव से मैंने पूछ लिया- तुम्हारा कोई बायफ्रेंड है?
उसने निराशा के भाव से न में सर हिला दिया.

मन में आया कि इसका मतलब ये हुआ कि रास्ता क्लियर है. यदि मेरी बात जम गई तो आज एक कुंवारी चूत मारने का मौका मिलेगा.

फिर मैंने पूछा- क्यों नहीं है, आप तो इतनी सुन्दंर हो. कितने ही लड़के आप पर मरते होंगे!

दोस्तो, हर किसी को अपनी तारीफ किसी गैर मर्द से बहुत अच्छा लगता है.
उसने सर झुकाया और मुस्कुाराते हुए कहा- प्रपोज तो बहुतों ने किया पर मैंने सबको मना कर दिया.

मैंने पूछा- क्यों कोई पसंद नहीं आया क्या?
उसने कहा- नहीं, ऐसी बात नहीं है. बस मम्मी मना करती हैं और मुझे भी बायफ्रेंड-गर्लफ्रेंड पसंद नहीं है.

मैं चुप रहा.
फिर उसने कहा- आपकी कोई जीएफ है?
मैंने कहा- पहले थीं, पर अब नहीं हैं.

उसने आश्चर्य से कहा- थीं से मतलब, कितनी थीं?
मैंने कहा- तीन.

उसने कहा- तभी इतना अनुभवी हो जो जूली को देख कर उसकी परेशानी समझ गए!
मैंने तपाक से भावना की आंखों में झांकते हुए कहा- मैं किसी लड़की की भी परेशानी समझ सकता हूँ.

उसने अपनी नजर तुरंत दूसरी तरफ कर ली.
मुझे पता था कि उस घटना के बाद उसने काफी सोचा होगा.
वासना तो उसकी भी जाग गई होगी.

अब भावना थोड़ी शांत हो गई थी.
फिर थोड़ा सोचते हुए उसने कहा- क्या … कभी वो सब नहीं मिलने पर इन्सा न भी पागल हो सकता है?

मैंने जान बूझकर अनजान बनते हुए पूछा- क्या नहीं मिलने पर … जरा खुल कर कहो!

वह थोड़ी शांत होकर इधर-उधर देखने के बाद धीमे स्वर में बोली- जो उस दिन कुत्ते कर रहे थे … सेक्स!

आखिर मैंने उसके मुँह से सेक्स शब्द निकलवा ही लिया.

मैंने कहा- इन्सान भी तो जीव ही है. प्रकृति का नियम तो सब जीवों में समान भाव से लागू होता है. हर कोई करता है. इसीलिए तो लोग बीएफ जीएफ बनाते हैं.

फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके पूछ लिया- क्या तुमने सेक्स‍ किया है?
उसने ना में सर हिलाते हुए कहा- मैं अब तक कुंवारी हूँ.

भावना ने असमंजस के भाव से कहा- क्या कोई उपाय नहीं है!
मैंने उसे बातों में फंसाते हुए न में सर हिला दिया.

फिर उसने थोड़ा सोचते हुए कहा- मैं नहीं करने वाली ये सेक्स-वेक्स!

ये सब सुनते ही मैंने सोचा कि कुंवारी चूत मेरे सामने से निकल ना जाए.

तभी उसने थोड़ा मुरझाए हुए स्वर में कहा- मैं पागल भी नहीं होना चाहती.
मैंने बात को सम्भांलते हुए कहा- एक उपाय है. तुम चाहो तो इस उपाय को आजमा सकती हो.
उसने पूछा- क्या करना होगा?

मैंने कहा- तुम्हें एक मर्द के साथ वो सब करना होगा, जो सेक्स के दौरान होता है. बस चूत में लंड नहीं घुसाना है. पर इसके लिए तुम्हें किसी अनुभवी मर्द की जरूरत होगी, जो वासना की परिस्थिति में खुद को … और तुमको सम्भाल सके.

दोस्तो, मैं अपना नाम नहीं लेना चाहता था. मैं चाहता था कि वो खुद मुझे चुने.

उसने थोड़ा सोचा और मुझसे पूछा- क्या बिना सेक्स के भी काम चल सकता है! क्या तुम मेरी हेल्प करोगे?

आह क्या बताऊं … मेरी तो खुशी का ठिकाना ही न रहा.

मैंने थोड़ा सोचते हुए कहा- ठीक है, पर एक शर्त है. वादा करो ये बात किसी से भी नहीं कहोगी!
उसने खुशी से हां कर दी.

मुझे पीली झण्डी मिल चुकी थी.
अब इसे अपनी फोरप्ले की कला से हरे रंग में बदलना था.

मैं उसके पास गया.
उसने नजरें झुका लीं.
मैं कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता था.

मैंने सबसे पहले उसके हाथ पकड़े और उसे हल्के हाथों से सहलाते हुए एक किस उसकी हथेली में किया.

मैं नहीं चाहता था कि सीधे होंठ पर किस करूं.
आखिर किसी मर्द का पहला टच था … हर चीज धीरे-धीरे करना चाहता था.

मैं नहीं चाहता था कि वह डर जाए और अपना इरादा बदल दे.
मैंने उसे सालसा डांस के लिए कहा.

हम दोनों डांस करने लगे.
इससे हम दोनों का मूड अच्छा हो चला था.

मैं अपने दाहिने हाथ से उसके कान के पास के बाल पीछे करते हुए एक हाथ उसकी कमर पर ले गया और उसे अपनी ओर खींचते हुए एक जोरदार किस उसके गाल पर दे मारा.

वह थोड़ा सहम गई और पीछे की ओर झुक गई.
फिर मैंने उसके चेहरे को एक हाथ से अपनी तरफ मोड़ते हुए एक उंगली से उसके होंठ खोले और अपने होंठ उसके होंठ से मिला दिए.

उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.
मेरे तो पूरे शरीर में करंट दौड़ पड़ा.

हम दोनों के होंठ गीले हो गए थे.
कभी ऊपर के होंठ तो कभी नीचे के होंठ को बारी-बारी से बेतहाशा किस करता गया.
उसके गुलाबी होंठों को तो मैं आज पूरा पी जाना चाहता था.

उसकी सांसें तेज हो चली थीं, जिससे मेरी उत्तेजना और भी बढ़ती जा रही थी.
मैं उसे और भी कसके बांहों में भरता जा रहा था.
अब किस और भी ज्यादा रगड़ के साथ होने लगी.

किस करते हुए मैं एक हाथ धीरे से उसकी पीठ सहलाते हुए टॉप के अन्दर ले गया और ब्रा खोल दी.
फिर एक हाथ धीरे से उसके एक स्तगन के पास ले जाकर बाहर से ही हल्का सा टच कर दिया.

वह थोड़ा सहम सी गई पर किस एक साईड से चल रहा था तो वो उसी में मगन थी.
शायद वह पूरी उत्तेजित हो गई थी.

मैंने उसका स्तन दबाना शुरू कर दिया.
आह क्या बताऊं कितने टाईट दूध थे उसके!

मैं अपने दोनों हाथों को टॉप के अन्दर ले जाकर उसके दोनों मम्मों को बेतहाशा दबाने लगा.
उत्तेजना से उसने निप्पो पूरे खड़े हो गए थे.

मैंने अपने होंठ भावना के होंठों से अलग किए और उसके दोनों हाथों को ऊपर कर उसके टॉप को ऊपर खींचते हुए अलग कर दिया.

अब वह मेरे सामने एक काले रंग की ब्रा में थी, जिसका मैंने हुक खोल दिया था.
बड़ी कमाल की माल लग रही थी.

मैंने उसकी ब्रा, उसकी चूचियों से अलग कर दी.
उसने तुरंत ही अपने हाथों से स्तरनों को ढक लिया और चेहरा दूसरी तरफ कर लिया.

मैंने उसके दोनों हाथ स्तनों से अलग कर दिए.
उसके स्तन मेरे सामने नंगे थे.

यह देख कर मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.
मध्यम आकार के गोल-गोल गोरे स्तन, उसमें भूरे कलर के खड़े निप्पल … मुझे अपना दूध पिलाने को तैयार थे.

मैं एक हाथ भावना की पीठ पर ले गया और दूसरी उसकी एक चूची के ऊपर रख कर दबाने लगा.

फिर जैसे ही अपने होंठ निप्पल पर लगाए … उसने गहरी सांस ली.

उसके स्तन उभर कर मेरे सामने आ गए थे और मैं लगातार बारी-बारी से दोनों स्तनों को बच्चे की तरह चाटता रहा.

उसके दूध चाटते चूसते हुए मैंने उसे बेड पर लेटा दिया, अपने एक हाथ से उसके पैर को सहलाते हुए उसकी बुर पास ले गया.

वह सिहरने लगी थी.
मैं बुर को नेकर के ऊपर से ही रगड़ने लगा.

मैंने धीरे से एक हाथ पैंटी के अन्दर ले जाना चाहा.
पर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
शायद वह डर गई थी.

मैं अपना हाथ उसके एक स्तन पर ले जाकर दबाने लगा.

कुछ देर बाद दुबारा से अपना हाथ पैंटी के अन्दर ले जाना चाहा, इस बार उसने कुछ नहीं किया.

हाथ अन्दर जाते ही मुझे उसकी चूत के ऊपर उगे हुए छोटे-छोटे झांट के बाल महसूस हुए.
शायद उसने कुछ दिन पहले ही अपनी झांटों को साफ किया था.

मैंने एक उंगली उसकी चूत के होंठों के बीच ले जाकर जैसे ही भग्नासे को टच किया.
उसने अपनी दोनों टांगों को सिकोड़ दिया.
साथ ही उसकी आवाज निकल गई- आह … आह.

करीब 5 मिनट की रगड़ के बाद, मैंने उसके दोनों पैर सीधे कर दिए और नेकर और पैंटी दोनों को एक साथ निकाल दिया.
उसने अपने दोनों हाथों से बुर को ढक लिया.

मैं उसके दोनों पैर को नीचे से ऊपर किस करते हुए अपने होंठों को उसकी चूत तक ले गया और उसके हाथों को चूत के ऊपर से अलग कर दिया.

आह … कितनी प्याारी चूत थी उसकी … बिल्कुल ताजी ब्रेड जैसी फूली हुई एकदम कुंवारी, हल्के भूरे रंग की चूत मेरे सामने नंगी हो गई थी.

उसकी चूत में छोटे-छोटे बाल चूत को मदमस्त बना रहे थे.
मुझे ऐसा लगा कि अभी खा जाऊं.

मैंने चूत पर एक हल्का सा किस किया और किस करते हुए ही पैरों के नीचे आ गया.
फिर उसके पैर मोड़ कर दोनों पैर अलग कर दिए.

मैंने भावना के दोनों पैर अच्छे से फैला दिए थे और वापस पैरों के बीच किस करते हुए उसकी चूत के पास आ गया.

उसके बाद उसकी चूत की सील सुरक्षित है या नहीं, ये चैक करने के लिए चूत की दोनों फांकों को फैला कर देखा.
उसकी सील अभी भी पैक थी.

यह देख कर मैं बेहद खुश हुआ और जीभ बाहर निकाल अपनी जीभ को चूत की फांकों में फेर दिया.
उसके मुख से ‘आह … आह …’ की मादक आवाज निकल पड़ी.

भावना काफी देर बाद मेरे सिर को धक्का देती हुई बोली- यह क्या कर रहे हो!
मैंने कहा- जो ऊपर के होंठों से कर रहा था … वही अब नीचे के होंठों को कर रहा हूँ.
वो कुछ नहीं बोली.

फिर मैंने अपने जीभ की कला का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया.
उसकी चूत को अपनी लार और उसकी चूत के रस से सराबोर कर दिया.

मैं बेहिसाब चूत चाटने लगा.
वह भी अपने हाथों से मेरे सिर के बालों को पकड़ कर खींचने का प्रयास कर रही थी.
पर मैं लगा रहा.

उसने लगातार ‘आ … आह …’ की आवाज निकालना शुरू कर दिया.
बाहर बारिश तेज हो रही थी इसलिए भावना की आवाज नीचे नहीं गई.

मैंने खुद को अलग किया.
मैं नहीं चाहता था कि भावना इतनी जल्दी झड़ जाए. मैं उसको खूब तड़पाना चाहता था जिससे वो खुद कहे कि बहुत हुआ … अब डालो अपना लंड.

भावना ने कहा- क्या हो गया, रूक क्यों गए?
मैंने कहा- मैं ही हर चीज करता रहूँगा … और सिर्फ तुम ही मजा लोगी क्या?

उसने असमंजस से कहा- मुझे क्या करना होगा!

मैंने भावना के दोनों हाथ पकड़ कर उठाया और दोनों हाथ मेरे लोवर के पास ले जाकर कहा- लोवर नीचे करो.

उसने एक ही बार में मेरी चड्डी और लोवर को नीचे खींच दिया.

मेरा काला मोटा 7 इंच का लंड फनफनाता हुआ बाहर आ गया.

वह लंड देख कर डर गई.
उसकी आंखें और बड़ी हो गईं.

मेरा लंड देख कर उसने कहा- मैंने सोचा नहीं था कि लंड इतना बड़ा भी होता है! सहेलियों ने तो अपने बायफ्रेंड का लंड छोटा बताया था.

एक पल बाद उसने निश्चिंत होकर कहा- अच्छा हुआ हम पूरा सेक्सक नहीं कर रहे … वरना यह तो मेरी चूत का फाड़ ही डालता!

मैंने उसका डर कम करने के लिए कहा कि ऐसा कुछ नहीं होता, चूत बड़े से बड़ा लंड निगल जाती है. इसी लंड से मैंने अपनी एक्स गर्लफ्रेंडस को खूब मजा दिया है.

मैंने भावना का सिर लंड की तरफ खींचते हुए कहा- इसे किस करो.
उसने कहा- न … मैं नहीं करती. ये गंदा है.
मैंने कहा- मैं इसकी साफ सफाई रोज अच्छे से करता हूँ.

फिर उसने नाक लंड पर ले जाकर पहले सूंघा, फिर एक बार हल्का सा किस करके कहा- अब खुश!
मैंने कहा- किस करती रहो.
उसने कहा- कैसे?

फिर मैंने लंड का टोपा निकाल कर कहा- इसे लॉलीपॉप की तरह चूसो.

उसने अपनी जीभ को निकाला और चाटने लगी.
उसे शायद अच्छा लगा … या झिझक खत्म हुई तो उसने मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया और एक छोटी बच्ची की तरह कुल्फी के जैसे लंड चूसने लगी.

वह लगातार 5 मिनट तक लंड को बड़े मजे से चूसती रही थी.
शायद उसे भी मजा आ रहा था.

उसके लंड चूसने से मेरी उत्तेजना लगातार बढ़ती जा रही थी.
मैंने उसे बीच में रोका क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि उसके मुँह में झड़ जाऊं.

मैं तो अपना वीर्य भावना की बुर में डालना चाहता था.

दोस्तो, भावना मेरे लौड़े से खेलने लगी थी.
अब चुदाई की कहानी कैसे बनी वो मैं अगली कड़ी में लिखूँगा.
साथ ही पूजा की चुदाई की कहानी भी लिखूँगा.

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लेखक के आग्रह पर इमेल आईडी नहीं दिया जा रहा है.

देसी सेक्सी गर्ल हिंदी कहानी का अगला भाग: मकान मालिक कुंवारी बेटियां- 4

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