बुड्ढे ने दीदी की गांड मार ली जंगल में

ओल्ड मैन सेक्स का मजा मेरी दीदी को अनायास ही मिल गया जब मैं उसे लंड चुसवा रहा था जंगल में! एक बूढ़े ने हमें देख लिया और वो भी मेरी दीदी के साथ मजा करने को कहने लगा.

नमस्कार दोस्तो, मैं रॉकी आप सबके लिए मैं अपनी और अपनी शिखा दीदी की दूसरी सेक्स कहानी लेकर आया हूँ.

मेरी पहली कहानी थी: भाई ने की मजबूरी में दीदी की चुदाई

यह बात तब की है, जब मेरी शिखा दीदी की एक बार गांड और चूत की चुदाई हो चुकी थी.
मेरी बहन मेरे साथ मस्ती से चुत गांड में लंड लेने लगी थीं और हम दोनों एक दूसरे के लिए एकदम पति पत्नी की तरह पूरी ईमानदारी से सेक्स सम्बन्ध निभा रहे थे.

ये ओल्ड मैन सेक्स का वाकिया यूं हुआ कि एक बार मुझे और दीदी को कपड़ों की खरीदारी करने जाना था.
हम दोनों सुबह फ्रेश होकर नाश्ता करके घर से निकलने को हुए.

उस दिन दीदी क्या तैयार हुई थीं, मेरा तो देखते ही लंड खड़ा हो गया.
दीदी ने मेरी आंखों में झांका और अश्लील भाव से अपने होंठों पर जीभ फिरा दी.
उनकी इस हरकत से मेरे लंड में एकदम से आग लग गई.

उस समय मम्मी थीं तो मैं कुछ कह नहीं पाया. पर मेरा मन तो कर रहा था कि मां चुदाए शॉपिंग, अभी के अभी दीदी को नीचे पटक कर चोद दूँ.
मैं बस कसमसा कर रह गया और मेरी दीदी मुझे देख कर मन ही मन मुस्कुरा रही थीं.

हम दोनों बाहर आ गए.
मैंने बाइक स्टार्ट की और उन्हें बैठने का इशारा कर दिया.

दीदी बाइक पर गांड उचका कर एक तरफ टांगें लटकाकर बैठ गईं.
वो मेरे पीछे बाइक पर मुझसे सट कर बैठी थीं.

हम कुछ दूर ही पहुंचे थे कि धीरे धीरे दीदी मेरी पीठ से एकदम चिपक गईं.
उनके बड़े बड़े दूध मेरे पीठ पर गड़ने लगे और मुझे मज़ा आने लगा.

मैंने भी आह भरी और मुँह जरा पीछे को किया.
दीदी मेरे कान में गर्म सांसें छोड़ने लगी थीं.

मेरी वासना बढ़ती जा रही थी; मैं भी अपनी बहन के मादक जिस्म की गर्मी से मस्त होता हुआ बाइक दौड़ाए जा रहा था.

दीदी का हाथ कब मेरे लंड को टटोलने लगा, मुझे पता ही नहीं चला.
सुनसान सड़क थी तो मुझे भी मजा आने लगा था.

कुछ ही देर में मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैंने शिखा दीदी से कहा कि मुझे अभी चोदना है.
पहले तो वो ‘रात में चोद लेना …’ बोलीं, फिर मेरे जिद करने पर मान गईं.

मैंने बाइक को रोड से नीचे उतारा और जंगल की तरफ बढ़ा दी और एक शांत सुनसान जगह में रोक कर बाइक से बिना चाभी निकाले छोड़ दिया.

उस वक्त मैंने यही सबसे बड़ी गलती कर दी थी.
इसका खामियाजा भुगतना पड़ा और मेरी इसी गलती की वजह से इस सेक्स कहानी का जन्म हुआ.

दीदी ने जल्दी से मेरा पैंट खोला और लंड चूसने लगीं.
दरअसल वो चाहती थीं कि मेरा जल्दी से वीर्य निकल जाए और मेरा मन शांत हो जाए.

और हुआ भी ऐसा ही … उनके मस्त चूसने के कारण मैंने जल्द ही उनके मुँह में वीर्य गिरा दिया.
वो माल गटक गईं और मैंने वापस अपना पैंट पहन लिया.

वो मुस्कुरा दीं और बोलीं- आज तेरा बड़ी जल्दी निकल गया?
मैंने भी चैन लगाते हुए कहा- मेरा तो घर पर ही मन कर रहा था कि उधर ही तुमको लेटा कर चोद दूँ.
दीदी हंसने लगीं.

फिर हम लोग जैसे ही बाइक के पास पहुंचे, एक मादरचोद भैंस चराने वाला बुड्ढा आ गया और हम लोगों को धमकाने लगा कि यहां क्या कर रहे थे. मैंने सब देख लिया है और अभी मैं अपने गांव वालों को बुलाता हूँ.

उस भैन के लौड़े ने मेरी बाइक की चाभी को भी निकाल लिया था.

उसके ऐसा कहने से हम लोग डर गए कि बदनामी हो जाएगी.
हमने बूढ़े को पैसे ऑफर किए मगर बूढ़े ने मना कर दिया.
वो साला मारने की धमकी देने लगा.

डर से हम दोनों भाई बहन की गांड फट गई.
अब मैं और शिखा अपनी गलती पर पछता रहे थे, हम उससे माफी की भीख मांगने लगे.

बूढ़े ने सीधे और साफ तरीके से कहा कि मुझे भी इस लड़की को चोदना है.
शिखा दीदी ने पहले तो मना कर दिया.

बूढ़े ने अपना फोन निकाला और वो गांव वालों को फोन करने लगा.
मैंने उससे कहा- अंकल 5 मिनट रुको, मुझे उसे समझाने दो.

मैं शिखा दीदी को थोड़ा दूर ले जाकर बोला- कैसे करें, अगर इसकी बात नहीं माने, तो ये भोसड़ी का पूरी बदनामी करवा देगा.

दीदी- तेरी चुल्ल के चलते ऐसा हुआ है. अब ये साला मुझे छोड़ेगा नहीं!
मैंने उनसे सॉरी कहा और उन्हें चुदने की हां करने के लिए मनाया.

फाइनली कुछ देर में शिखा दीदी मुस्कुरा कर बोलीं- बस मैं एक बार ही इस ओल्ड मैन से सेक्स करूंगी, बोल दे … और उसके बाद ये हमें जाने देगा.
मैं समझ गया कि दीदी को भी कुछ नया और अलग अनुभव लेने का मन हो रहा है.

मैंने बुड्ढे के करीब जाकर कहा कि अंकल आप एक बार में फटाफट कर लो और हमें जाने दो.

वो मान गया लेकिन बोला कि अब मैं बुड्ढा हो गया हूं, इसलिए मेरा लंड जल्दी खड़ा नहीं होता और जल्दी निकलता भी नहीं है.
मैंने कहा- एक बार निकल जाएगा, फिर तो जाने दोगे न?
वो हां कहने लगा.

अब आगे की कहानी शिखा दीदी की जुबानी सुनिए.

हैलो फ्रेंड्स, मैं शिखा.

वो बुड्ढा धीरे से मेरे पास आया और मेरे गालों पर किस करने लगा.
विअसे तो मेरा मन था कि इस बुद्धे से चुदकर नया अनुभव लूँ पर उसके मुँह से तंबाकू की बदबू आ रही थी.

मुझे उससे घिन आ गयी.
एक तो साला बुड्ढा आदमी मेरे गाल पर चुम्मी ले रहा था, इस बात से मुझे तकलीफ हो रही थी और ऊपर से उसके मुँह से आने वाली बू से मुझे चिढ़ आ रही थी.

किस करते करते वो मेरे दूध दबाने लगा, मेरे ब्लाउज के बटन खोलकर उन्हें पीने लगा.

उसने जैसे ही मेरे दूध चूसना शुरू किए, मुझे एक अनजाना सा सुख मिलने लगा.
वो बड़े ही अनुभवी तरीके से मेरे दोनों चूचुकों को बारी बारी से अपने होंठों में दबा कर खींचता और अपनी जीभ से मेरे चूचुक को लिक-लिक करके टुनया रहा था.

उसकी इस हरकत से मेरे अन्दर वासना जागने लगी और मेरी चुत में चींटियां सी रेंगने लगीं.
उसके लगातार दूध मसलने और चूसने से मुझ पर धीरे धीरे सेक्स का सुरूर चढ़ने लगा.

अब बुड्ढे का एक हाथ मेरी चूत पर आ गया और वो मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चुत को सहलाने लगा.
धीरे से उसने मेरी साड़ी समेत पेटीकोट को ऊपर उठाया और मुझसे साड़ी पेटीकोट पकड़ कर रखने को कहा.

मैंने उसकी बात मान ली.
अब उसने मेरी पैंटी की बगलों में उंगलियां फंसाईं और उसे नीचे सरका दिया.

मेरी चूत नंगी हो गई, तो वो चुत में उंगली करते हुए मुझे होंठों पर किस करने लगा.
अब तक मैं पूरी गर्म हो चुकी थी.

कुछ देर बाद बुड्ढा मुझसे बैठने को बोला और मैं बैठ गई.
बूढ़े ने अपना लंड निकाला, मैं लंड को देखकर चौंक गई क्योंकि वो काफी मोटा था, लेकिन मुरझाया हुआ था. मैं सोचने लगी कि जब मुरझाया हुआ लंड ऐसा है, तो खड़ा होकर तो मूसल बन जाएगा.

उसके लंड में सफेद गन्दा पपड़ी जैसा लगा था, जो तेज गन्ध मार रहा था.
बूढ़े ने लंड चूसने को बोला, तो मैंने मना कर दिया, बोली- इसे साफ़ कर पहले!

भद्दे ने मेरी पैंटी से ही अपना लंड साफ़ किया और बोला- मुँह खोल, मां की लवड़ी!
मैंने मुँह खोल दिया.

उसने लंड मेरे मुँह में डाल दिया. मैंने उसका लंड चूसना चालू कर दिया.
कुछ देर बाद पता नहीं क्योंकि मुझे वो गन्ध और वो गन्दगी अच्छी लगने लगी. मुझे मज़ा आने लगा और पूरे मन से जोश में लंड चूसने लगी.

चूस चूसकर मैंने बुड्ढे के लौड़े को एकदम चिकना और गीला कर दिया.
लौड़ा खड़ा होकर एकदम खूंखार हो गया था.

बुड्ढा मस्ती में बोला- चल अब साड़ी उठा और घोड़ी बन जा!
मैं जल्दी से वैसी ही बन गई.

बूढ़े ने मेरे गांड के पास अपना लौड़ा लगाया और रगड़ने लगा.
मुझे भी ओल्ड मैन सेक्स में बहुत मज़ा आ रहा था.

उसने धीरे से लंड मेरी गांड में डालने का प्रयास किया.
मुझे दर्द हुआ तो मैं थोड़ा आगे को हो गई और सीधी होकर बोली- चूत चोद लो, तुम्हारा इतना बड़ा लंड मेरी गांड में नहीं जाएगा.

उसने गुस्से में बोला- साली, मुझे चोदना सिखाएगी. इस लंड के नीचे से दर्जनों चुत और गांड निकल गईं.
मैं उसकी बात से डर गई और चुपचाप साड़ी उठाकर झुक गई.

अब उसने अपने लौड़े पर थूक लगाया और मेरी गांड में भी थूक दिया.
फिर धीरे धीरे वो लंड को गांड में घुसाने लगा.

मेरा दर्द में बुरा हाल था लेकिन मार के डर से चुपचाप बर्दाश्त करती रही.
अन्ततः पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया.
शायद मैंने अपने भाई के लंड से जो गांड मरवाई थी, ये उसी का कमाल था कि मेरी गांड उस मूसल लंड को झेल गई थी.

बुड्ढे ने धीरे धीरे धक्के धक्के मारना शुरू कर दिए.
अब मेरा भी दर्द बहुत कम हो गया था और मुझे भी मज़ा आना शुरू हो गया था.

बूढ़े के हर धक्के में मेरा पूरा शरीर हिल रहा था मगर चुदाई शानदार हो रही थी.
मेरी गांड की खुजली सही से मिट रही थी.

कुछ देर चोदने के बाद बुड्ढा हांफने लगा, मैं समझ गई कि अब बुड्ढे का वीर्य निकलने वाला है.

मैं बोली- गांड में मत निकालना.
वो बोला- क्यों आगे लेगी?

मैंने कहा- अभी आगे भी कर पाओगे क्या?
वो बोला- तेरा मन हो, तो आधा घंटा बाद चुत भी चोद दूँगा.

मैंने कहा- मन तो है, पर अभी जल्दी जाना है. बाद में आ जाऊंगी.
वो बोला- बाद में आ जाएगी तो ऐसे कह रही है, जैसे मेरा लंड तुझे पसंद आ गया हो?

मैंने हंस कर कहा- हां, पसंद आने वाला लंड तो पसंद आएगा ही न!
वो मुझे चूम कर बोला- क्या सच में?

मैंने हामी भर दी और कहा- अभी मेरी बात मान लो. पीछे गंदा हो जाएगा.
वो मान गया लेकिन बोला कि मुँह में निकालूंगा.
मैंने कहा- हां, मुँह में ही निकाल दो.

ये सुनकर उसने मेरी गांड से लौड़ा निकाल कर मेरे मुँह में घुसा दिया और उसका लंड का लावा फूट पड़ा.
पता नहीं मादरचोद ने कब से माल नहीं निकाला था, इतना वीर्य निकला कि मैं बता नहीं सकती.

मेरा पूरा मुँह भर गया. मैं सब गटक गयी.
बहुत ही टेस्टी था, गाढ़ा गाढ़ा बिल्कुल जैली जैसा, मज़ा आ गया.

अब बुड्ढा शांत होकर बोला- अब तुम जा सकती हो.
उसने मेरा धन्यवाद भी किया.

मुझे बूढ़े पर प्यार आ गया और मैंने एक बार फिर से उसके होंठों पर जोरदार किस दे दी.

इस बार मुझे उसके मुँह की दुर्गंध से कोई फ़र्क नहीं पड़ा.

उधर से जब मैं बाइक के पास आई तो देखा कि मेरा भाई भी लंड हाथ में लिए खड़ा हिला रहा था और वीर्य निकालने की कोशिश कर रहा था.

मैंने रॉकी से कहा- ला, तेरा भी निकाल देती हूं.
मैंने चूस कर उसका भी माल निकाल दिया.

अब हम लोग वहां से निकल गए और सड़क पर आ गए.
आज गांड चुदाई के बाद मैं थक गई थी तो मेरा शॉपिंग का मन नहीं हो रहा था.

मैं भाई से बोली- वापस घर चलो.
घर आकर भाई ने चुदाई के बारे में पूछा, तो मैंने बता दी कि उसने सिर्फ गांड में डाला, चूत में नहीं.

तो भाई खुशी से बोला कि चलो मेरी बहन की चूत बच गयी.
मैं हंस पड़ी. पर मैं अमन में सोचने लगी कि बुड्ढे का लंड मेरी चूत में जाता तो ज्यादा मजा आता.

आप मेरी ईमेल पर मुझे बता सकते हैं कि आपको इस ओल्ड मैन सेक्स कहानी में कितना मजा आया.
[email protected] धन्यवाद.

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