पुरानी साथी बनी बिस्तर पर साथी

Xxx लव फक़ स्टोरी में पढ़ें कि मेरी पुरानी क्लासमेट जिसे मैं तब पसंद करता था, उसने मुझे नेट पर खोज कर दोस्ती का हाथ बढ़ाया. तब मुझे पता लगा कि वो भी मुझे चाहती थी.

आखिरकार उस होटल तक पहुंच कर मेरे लगभग आधे दिन और उसके आठ महीने के इंतजार के सफर का अंत हो ही गया।

हम जैसे ही कैब से उतरे कि गर्म हवाओं ने हमारा स्वागत किया.
कैब का किराया देकर हम दोनों भागकर होटल में घुसे.

गनीमत है कि मैंने पहले ही कमरा बुक करवा रखा था तो रिसेप्शन से कमरे की चाबी लेकर हम अपने रूम में जा पहुंचे.

इस खाल छीला गर्मी में सफर करने के बाद अब हम दोनों को ही नहाने की जल्दी थी लेकिन मैंने उसे ही पहले नहाने को कह दिया।

वो नहाकर आई तो मैं बाथरूम में घुस गया।

आहा … इतने लंबे सफर के बाद इस जलती गर्मी में बदन पर गिरतीं ठंडे पानी की फुहारें … इस आनंद का कोई तोड़ नहीं!

कुछ देर बाद मैं नहाकर बाहर निकला तो देखा वो तैयार होकर खिड़की के कांच से जयपुर शहर का नजारा देख रही थी।

मैं उसे देखता ही रह गया।
गुलाबी टी-शर्ट, काली स्किन टाइट जीन्स, सुनहरी जूतियां!

भरा-भरा चेहरा, हेजल आंखें, उनमें डला सुरमा, गुलाब की पंखुड़ियों जैसे गुलाबी लिपस्टिक लगे होंठ, गोरा रंग, कसा हुआ इकहरा बदन।

मैंने पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखा और हम दोनों ही सारी चिल्लपों से अनजान उस शहर की भीड़भाड़ को देखने लगे।

Xxx लव फक़ स्टोरी में हुआ कुछ यों था कि एक दिन मैं ऐसे ही बैठा हुआ फेसबुक चला रहा था कि तभी मेरे पास एक लड़की की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई।

जब मैंने प्रोफाइल चैक की तो वो ओरिजिनल लगी इसलिए स्वीकार कर ली।

कुछ नजदीकियां बढ़ी तो पता चला कि वो तो मेरी स्कूल फ्रेंड सारा है।
जब मैं दसवीं क्लास में था तभी उसका परिवार जयपुर शिफ्ट हो गया था।

बस फिर क्या था … अंतरंगता बढ़ती चली गई और इतनी बढ़ी कि आज मैं यहां था, उसके पास!

किसलिए? वो आप जानते ही हैं।

कुछ मिनट तक उस नजारे का आनंद लेने के बाद हम बिस्तर के किनारे पर बैठ गये और एक-दूसरे की आंखों में देखते हुये लेट गये।
हम लेटे तो उसने आंखें बंद कर लीं।

ओह … उस कमरे की दूधिया-सफेद रोशनी में वो कितनी खूबसूरत लग रही थी।

आती-जाती सांसों के साथ उसका सीना ऊपर-नीचे हो रहा था।
एक धुंधली सी लेकिन मनमोहक मुस्कान उसके होंठों पर खेल रही थी।

उसके चेहरे का नूर जैसे उस रोशनी को नीचा दिखा रहा था।
सुंदरता के साथ-साथ आज जैसे वासना, लालसा, सेक्स, और जुनून की एक जीवित मूरत मेरे साथ लेटी थी।

मुझे मेरी लोअर में किसी के जगने की आहट महसूस हुई।
ये वही था जो हमारे कैब में चढ़ने से अब तक मेरी मानकर चुपचाप बैठा था लेकिन अब मुझ पर हावी हो रहा था।
हो भी क्यों नहीं?

खैर, मैं हल्के-हल्के उसकी गर्दन पर उंगलियां फिराने लगा तो वो भी वह सब करने लगी जिसकी इच्छा उसे भी कैब में चढ़ने से लेकर अब तक थी।
सिसकारियां लेने लगी सारा!

कुछ देर बाद मैं उसकी गर्दन पर किस करने लगा और उसके स्तनों के घुमावों के साथ मेरा हाथ धीरे से नीचे सरकने लगा तो वो थर्राने लगी।
निप्पल तन गये उसके!

तुरंत ही मैं उसके निप्पल को मुंह में लेकर चुभलाने लगा तो उसने आहें भरते हुये मेरा हाथ पकड़कर अपनी जींस के बटन पर रख दिया।

इशारा पाते ही मैंने उसकी जींस खोलकर घुटनों तक सरका दी और फिर से निप्पल चूसने लगा।

सारा आहें भरने लगी तो मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ उसके पेट के कटाव के साथ नीचे सरकाया और उसकी पैंटी के नीचे बढ़ती गर्मी को अपनी उंगलियों से महसूस किया और उसकी जांघों को सहलाने लगा।

सारा ने एक लंबी आह भरकर वासना की गर्मी से सूख चुके होठों को अपनी जीभ से गीला किया और बोली- जान!
सुनते ही मैंने उस छोटी सी, लाल जालीदार पैंटी को नीचे खिसकाया तो सामने नुमाया हो गयी उसकी गदरायी हुई गुलाबी चूत!

मैंने धीरे से उस जादुयी जगह को अपनी उंगली की नोक से सहलाया तो वो ऊपर की ओर उचकी।
शायद अपने कूल्हों को आलिंगनबद्ध करना चाहती थी आपस में!

सारा अभी तक साथ नहीं दे रही थी।
शायद वो जानना चाह रही थी कि मैं उसे किस हद तक मज़बूर कर सकता हूं या ये कि वो कहां तक पहुंच सकती है, जहां से वापस आना मुमकिन ना हो।

और जो मेरी पैंट के अंदर?
उसकी सिर्फ एक छोटी सी ख्वाहिश … या यूं कहें कि मेरी!

वो सिर्फ सारा की चूत की मजबूत लेकिन मुलायम दीवारों के कसाव को महसूस करना चाहता था अपने चारों तरफ!

तभी सारा ने हाथ बढ़ाकर मेरी पैंट के ऊपर से ही लंड को पकड़ लिया।
अब तो वो दबंग हो गया।
अब मैं कौन?
अब तो उसे सिर्फ सारा की चूत दिख रही थी।

मैं थोड़ा नीचे होकर उसकी चूत चूमने लगा तो थोड़ी देर में वो नीचे की ओर सरकी और मेरी पैंट खोलकर लंड को चूमने लगी।
फिर उसने उसे मुंह में भर लिया और थोड़ी देर चूसकर लेटने लगी तो मैंने वासना में जलते हुए कहा कहा- सारा लिये रहो, तुम्हारी चूत जितना मीठा कर दो इसे!
तो वो बोली- ज्यादा चूसूंगी तो आपको शूगर हो जायेगी।

कहते हुये हंसने लगी सारा!

तो मैंने उसके होठों को अपने होठों में और उसने मेरे लंड को मुट्ठी में दबा लिया और सहलाने लगी।

लंड तो जैसे ही उसके हाथ में आया कि बौरा ही गया।

उसके आदेशों का पालन करते हुए मेरे हाथ सारा की चूचियों को मसलने लगे तो वो भरी-भरी मादक आहें भरने लगी।
अब दूसरा आदेश कि चूत की तरफ जाओ।

फिर आदेश का पालन किया मेरे हाथों ने और सारा की चूत सहलाने लगे।
और जैसे ही मेरी उंगलियों ने उसकी चूत को छुआ कि वो मेरे होठों को छोड़कर टूटी हुयी सी बोली- जान अंदर!

सारा की मनोदशा समझ मैंने नीचे आकर जैसे ही उसकी चूत पर लंड फिराया कि उसने जोर की सिसकी लेते हुये मुझे बांहों में कसा और अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल दी।
लंड करीब आधा घुस गया उसकी चूत में!
हम दोनों की आंखें मिच गयीं।

तभी मैंने उसकी कमर में हाथ डाला और ऊपर से एक धक्का दिया और सारा की बांहें मेरी कमर पर कस गईं।
पूरा लंड उसकी चूत में पैवस्त हो चुका था।

हम काफी देर तक एक-दूसरे के होठों को चूसते रहे।
ना वो हिली ना मैं!

कुछ देर बाद सारा ने मुझसे अपने होंठ छुड़ाए और हंसती हुई बोली- ये क्या कहानियों वाला सेक्स कर रहे हैं?
तभी मैंने लंड को ऊपर तक निकालकर एकदम से घुसाया तो उसकी आह निकली।

अब मैंने पूछा- क्यों मजा नहीं आ रहा?
शर्मा गई सारा और मेरे कंधे से सिर छिपा लिया।

कुछ देर उसके लाड़ करके मैंने चुदाई शुरू की तो कुछ ही देर में सारा भी अपनी कमर उछाल-उछालकर चुदने लगी।

लगभग दस मिनट बाद उसने मुझे कस लिया अपनी बाजूओं में तो मैंने उसके होठों को अपने होठों में दबा लिया और झड़ गया उसकी चूत में!
लंड अभी भी उसकी चूत में था और उसका चेहरा एक आनंद भरी संतुष्टि से चमक रहा था।

सहसा मैंने उसकी आंखें चूमीं तो उसने अपनी आंखें खोली और अपने चेहरे पर आये बालों को हटाकर मेरी आंखों में देखने लगी।
उसकी कोमल आंखें वासना से चमक रहीं थीं।

आह … कितनी खूबसूरत लग रही थी वो!
जैसे कोई सुंदर पेंटिंग।

मैं उसके होठों को चूमकर उठने लगा तो बोली- मेरे अंदर ही रहो ना प्लीज़!
उसकी कोमल फुसफुसाहट ने मेरे कानों को सहलाया तो मैं बोला- मैं तो हमेशा के लिए ऐसे ही रहना चाहता हूं।

हम दोनों ही नहीं चाहते थे कि ये पल खत्म हों.
इसलिये एक-दूसरे की आंखों में देखते हुए एक-दूजे में खोये हुए थे।

“तुम्हें अच्छा लगा?” पूछा मैंने … तो उसने अपनी चूत सिकोड़कर मुझे बांहों में भरा और चिपकते हुए बोली- हां जान!

मैंने अपना चेहरा उठाया और उसकी खूबसूरत आंखों को देखते हुए उसे फिर से चूम लिया।

शायद पांच मिनट बीत चुके थे, शायद एक घंटा।
मुझे नहीं पता था, कोई परवाह नहीं थी इस सबकी।

इस वक्त हम दोनों के अलावा और कुछ भी मायने नहीं रखता था हमारे लिये!

काफी देर बाद मैं उसके कान में फुसफुसाया- मुझे भूख लगी है।
यह सुनकर उसने मुझे चूमकर कहा- चलिये पहले खाना खा लेते हैं।

हमने उठकर अपने अंगों को साफ़ किया और कपड़े पहनकर खाना खाने चले गए।

खाना खाते हुए मैंने कहा- सारा, मैं आज रात तुम्हें इस भीड़ भरी दुनिया से कहीं दूर ले जाना चाहता हूं।
यह सुनते ही उसकी आंखें चमक उठीं और बोली- मैं भी कहीं खो जाना चाहती हूं आपके साथ!

खैर, खाना खाकर हम होटल पहुंचे और अपना सामान लेकर दूर-दराज़ के एक कॉटेज में जा रुके।

हम दोनों अब उस कॉटेज के एक छोटे से कमरे में थे।
कोई फर्क नहीं पड़ता कि ये दुनिया कितनी बड़ी है।
हमारी दुनिया तो उस छोटे से कमरे में सिमटी हुई थी आज … जहां मैं और सारा; सिर्फ हम दोनों।

अब रात हो चुकी थी तो भूख भी लगने लगी थी, इसलिए पहले खाना ही मंगवा लिया.

खाना आया तो सारा ने खाना डाला और एक चम्मच चावल मेरी तरफ बढ़ाकर बोली- लीजिये!
सारा का प्यार देखकर मेरी आंखें नम हो गईं, मैं बोला- तुम खाओ सारा; मैं खा लूंगा खुद से!

असल में स्कूल के दिनों में हमारे बीच प्यार जैसा कुछ था जिसके बारे में हम दोनों ने अब बताया था एक दूसरे को।

मेरी नाम आँखें देख उसकी भी आंखें भर आईं और बोली- मैं कभी भूल नहीं पाई आपको! और अब जबकि ये लम्हा आया है तो इस ख़ुशी से महरूम नहीं रहना चाहती।

कहा उसने तो मैं बोला- ये वक्ती मिलन है सारा … तुम्हारा दिल फिर से टूटना तय है।
सारा के भर्राए गले से उसकी रूंधी हुई आवाज निकली- जानती हूं।

यह सुनते ही मैंने कहा- फिर क्यों जिद करती हो?
सवाल के जवाब में उसने भी सवाल ही दाग दिया।

“पता है मैं आपसे क्यों प्यार करती हूं?” पूछा उसने!
तो मैंने सीधे ही वजह पूछ ली।

वो तो जैसे तैयारी करके बैठी थी कि कब मैं पूछूं और कब वो अपने दिल की बात बताए.
छूटते ही बोली- क्योंकि आपने मुझे कम से कम याद तो रखा।

“यह कोई इतनी भी बड़ी बात नहीं है।” कहा मैंने!
तो वो बोली- कोई मुझसे पूछे!

यह सुनकर मैंने कहा- ऐसा केवल तुम और मैं समझते हैं।
कहा मैंने तो सारा धमकाते हुए बोली- हमें बाकी दुनिया से क्या मतलब?

“क्या चाहती हो?” पूछा मैंने नरमी से!
तो एक लंबी सांस लेकर बोली वो- अपने महबूब के साथ महबूबा बनकर वक्त बिताना।

“ठीक है, लाओ खिलाओ!” कुछ सोचकर कहा मैंने!
और उस चम्मच में भरे चावल खाकर मुस्कुराते हुए उसे भी अपने हाथ से खिलाने लगा तो सारा मुस्कुराने लगी जैसे उसके चेहरे का नूर दोगुना होकर लौट आया हो।

खाना खाकर कुछ देर टहलने चले गए और टहलते-टहलते प्यार और मस्ती भरी बातें करते रहे।

फिर बिस्तर पर लेट गए और लिपट गए आपस में!
आज कुछ नया था; कुछ ऐसा जैसे सर्प गलबहियां कर रहे हों एक-दूजे के साथ; कुछ बहुत ही अधिक अंतरंग।

उसने अपने पैर के अंगूठे से मेरी पिंडली और रान को सहलाया तो मैं टूट पड़ा सारा के होंठों पर!

वो भी साथ देते हुए सिसकारियां लेने लगी और एकदम से मेरी टीशर्ट में हाथ डाला तो मैंने अपने हाथ ऊपर उठा लिये और उसने मुझे ऊपर से नंगा कर दिया।
अब मैंने भी उसकी टीशर्ट को उतारा और ब्रा खोलने लगा तो मुझसे हुक नहीं खुले और झुंझलाहट में लगभग सारे हुक तोड़कर सारा की चूचियों को अनावृत कर लिया।

गोरी चूचियां, भूरा ऐरोला और लाल निप्पल जैसे आइसक्रीम पर चेरियां रखी हों।

मैं टूट पड़ा उन पर एक निप्पल को उंगलियों में लेकर सहलाने लगा और एक को मुंह में लेकर चूसने!
कुछ ही देर में सारा लंबी-लंबी सांसें लेने लगी।

अब मैंने उसके क्लीवेज को चूमा और नीचे आने लगा।
सामने आयी उसकी गहरी गोल नाभी, सपाट पेट पर जैसे मय का प्याला रखा हो।

मैंने उस प्याला नुमा नाभि में जीभ डालकर होंठों में दबा लिया और उंगलियों से धीरे-धीरे उसके पेट और चूचियों को सहलाने लगा तो वो आहें भरने लगी।

मैं एक हाथ से उसके स्तनों को सहलाने लगा और मेरा दूसरा हाथ धीरे से उसकी जांघ के घुमाव को सहलाते हुए उसकी पैंटी तक पहुंच गया।
गोरी जांघें और गुलाबी फूलदार पैंटी जो चूत के रस से भीग चुकी थी।

जैसे ही मैंने पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को सहलाया, उसके होठों की पकड़ मेरे होठों पर और कस गई।
थोड़ी देर बाद मैंने उसकी पैंटी उतारी तो दिखी क्लीन शेव गुलाबी चूत जैसे डबल रोटी में चीरा लगाकर सॉस डाल दी हो, अनार के दाने जैसी क्लिट!

मैंने उसकी चूत को मुंह में भर लिया तो वो लंबी-लंबी आहें लेने लगी।
अब मैंने हाथ बढ़ाकर दो उंगलियां उसके मुंह में डाल दीं और एक हाथ से उसकी चूचियां सहलाने लगा।
वो भी उंगलियों को लंड की तरह चूसने लगी।

कुछ देर बाद मैंने उसे बांहों में लेकर घुटनों के बल खड़ा कर लिया और किस करने लगा।

किस करते-करते उसने मेरे सारे कपड़े निकालकर लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी।
थोड़ी ही देर में मुझे बिस्तर पर गिराकर लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी।

गजब की चुसाई की उसने!
मेरी तो आंखें बंद होने लगीं तो मैंने उसे खींचकर गोद में लिया और थोड़ा सा उचका कर उसकी चूत में लंड डाल दिया।

जैसे ही लंड चूत में गया उसने मुझे एकदम से भींच लिया और हम दोनों की आह निकल गयी।
कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद वो लंड पर ऊपर-नीचे होने लगी।

उसकी चूचियां मेरी छाती से रगड़ खा रहीं थीं और मैं उसके कूल्हे सहला रहा था।

कुछ देर में मैं लेटा और सारा लंड पर बैठी हुयी अपनी कमर हिलाने लगी।
मैं उसके हिलते कबूतर पकड़कर दबाने लगा तो वो एकदम बेकाबू सी होने लगी।

“आ…ह…जा…न … दबाओ … निचोड़ दो इन्हें!” कहते-कहते स्पीड बढ़ा दी सारा ने!
अब मैंने उसे कमर से पकड़ कर रोका और अपने ऊपर लेटा कर घूम गया।

मैं ऊपर और वो नीचे!

मैंने शुरू किये धक्के देने और सारा ने लंबी-लंबी आहें!

“जा…न … आ…ह … जान!” कहते-कहते उसने मेरा चेहरा पकड़ा और मेरे होंठ अपने होंठों में दबा कर झड़ने लगी.
तो मैंने भी धक्के तेज कर दिये और कुछ ही देर में मैं भी उसकी चूत में झड़ गया।

Xxx लव फक़ के बाद काफी देर तक हम लिपटे रहे।

तब उसने मुझे हटाया और नैपकिन लेकर अपनी चूत और मेरा लंड साफ कर मेरे पास आ लेटी।
और हम दीन-दुनिया से बेखबर एक-दूसरे की बांहों में लिपटे हुए सो गए।

आपको ये Xxx लव फक़ स्टोरी कैसी लगी, मुझे जरूर बतायें।
[email protected]

लेखक की पिछली कहानी: मासूम सी माशूका

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