पार्क में मिला सलमानी मोटा लंड

न्यू गे बॉय सेक्स कहानी मेरे पहली बार गांड मरवाने की है. एक दिन मैंने गे वीडियो देखी तो मेरे मन में भी कुछ ऐसा ही करने की तलब जगी. एक दिन मैं एक पार्क में गया.

मैं मयंक जैन हूँ. उम्र 29 साल है मेरी बॉडी स्लिम, हॉट सेक्सी है.
दिखने में गोरा सा हूँ.

मैं मूलत: कोटा से हूँ और उड़ापुर में रहता हूँ.

यह न्यू गे बॉय सेक्स कहानी कई साल पहले तब की है जब मैं वहां टाउन हॉल में बैठा था और ब्लू फिल्म देख रहा था.

मेरी नजर गे हॉट सेक्स वीडियो पर पड़ी, जिसे देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा.
मेरा भी मन करने लगा कि यह मुझे भी करना चाहिए.
मैं भी इन सबके बारे में ही सोचने लगा था.

एक दिन अकेले होने के कारण बोरियत हो रही थी तो मैं पार्क में घूमने गया.
दोपहर का वक्त था.

मैंने वहां एक चक्कर लगाया तो मेरी नजर एक बंदे पर पड़ी … जो अपनी जीएफ से वीडियो कॉल पर बातें कर रहा था और अश्लील इशारे कर रहा था; अपना लंड मसल कर उसे फोन पर दिखा रहा था.

मेरी नजर उसके लंड पर पड़ी और उसकी नजर मुझ पर.
उसका लंड एकदम काला और काफी मोटा था, ऐसा लग रहा था मानो वह किसी मोटे चूहे की गर्दन दबा रहा हो.

मैं उसके मोटे लंड को देख कर जरा गनगना गया था.
मेरी नजरें उसके लौड़े पर टिक गई थीं.

वह मुझे देखने लगा था तो मैं आगे बढ़ा और आगे जाकर एक बैंच पर बैठ गया.
मैं वहीं बैठ कर दूर से उसकी तरफ देख कर उसके लंड के बारे में सोचने लगा था.

थोड़ी देर में वह आदमी मेरे पास आकर बैठ गया.
मैंने उसे देख कर अनदेखा किया.

पर थोड़ी देर बाद मेरी नजर उससे मिली और वह हल्का सा मुस्कुरा दिया.

उसने मेरे सामने वापस अपने लंड को मसला और मुझे अपने लंड को दिखाने सा लगा.
मेरी नजर उस पर पड़ी तो मैं देखता ही रह गया.

उसका लंड फनफ़ना रहा था और पैंट के अन्दर से ही फूला हुआ दिखाई दे रहा था.

उसके लौड़े की मोटाई कुछ और ज्यादा बढ़ गई थी और लंड पैंट के अन्दर से ही झटके पर झटके मारता दिख रहा था, या कहूँ कि फड़फड़ा रहा था.
अब मेरी नजर उस पर से हट ही नहीं रही थी.

मैं उस आदमी से नजरें नहीं मिला रहा था लेकिन सर को झुकाए हुए उसके लंड को ही देख रहा था.

उसने मुझसे बात करना शुरू की- गर्मी बहुत ज़्यादा है आज … है न!
यह कह कर उसने फिर से अपने लंड को मसला.

मैंने भी उसकी बात से सहमति जताई और कहा- हां आज कुछ ज्यादा ही गर्मी हो रही है.

वह अपने लौड़े को मसल कर हंसा और उसने कहा- क्या करूँ … गर्मी शांत ही नहीं हो रही है!
मैं भी हंस दिया.

इस तरह से हम दोनों का परिचय हुआ.

उसने अपना नाम अकरम ख़ान बताया.
वह अपने एक दोस्त के साथ कमरा किराए पर लेकर रहता था.

हमारी बातें हो ही रही थीं कि इतने में उसने पैंट के ऊपर से ही फिर से अपना लंड मसला.

मैं देखने लगा.
उसका लंड बड़े झटके लगा रहा था.

अब मैंने बेझिझक उससे पूछ लिया- क्या हुआ, आज दिन में आपका सामान क्यों खड़ा हो गया है?
तो उसने जवाब दिया- क्या करूँ यार, यह किसी की गांड में घुसने के लिए तड़प रहा है. मन कर रहा है कि कोई इसे पकड़ ले और चूस ले.

वह यही बोलता जा रहा था और मेरी आंखों में देखता जा रहा था.
मुझे वासना ने घेर लिया था और मैं एकदम से चुदास से भर गया था.

तभी उसने यही सब बोलते हुए मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया.
पहले तो मैं एक पल के लिए घबरा गया.
और मैंने महसूस किया कि उसका लंड लगभग 7-8 इंच का था और बेहद कड़क था.

मैंने भी शर्म छोड़ कर उसे अपनी मुट्ठी में दबा लिया.

यह देखते ही उसने मेरा हाथ अपने लंड से हटा दिया कि कोई आ जाएगा, इधर नहीं.
मैं कुछ बेबस सा हो गया कि उसने मेरे हाथ से लंड क्यों छीन लिया.

वह बोला- आपके कमरे में चलें क्या?
मैंने कहा- क्यों?

उसने कहा- ऐसे ही आप पकड़ कर देख लेना. वहां कोई नहीं होगा तो मैं आपको खोल कर भी दिखा दूँगा.
मैं मान गया.

अब हम दोनों मेरे कमरे की तरफ जाने के लिए निकले.
मेरे पास बाइक थी तो हम दोनों बाइक पर बैठ गए.

वह मेरी गांड से चिपक कर पीछे बैठ गया.
उसका लंड मेरी गांड पर झटके मार रहा था.

मैं भी अपनी गांड खोल कर उसके लंड को अपनी गांड में गड़ते हुए महसूस करने लगा.

सच कह रहा हूँ कि इस बात का अहसास ही नहीं हुआ कि मेरा घर कब आ गया.
मैं बाइक को खड़ी किया और कमरे के दरवाजे पर लगा ताला खोल कर उसे अन्दर बुलाया लिया.

कमरे के अन्दर आते ही हम दोनों बेड पर बैठ गए.
उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया.

जैसे ही मैंने उसका लंड पैंट के ऊपर से पकड़ा, उसने मुझे खींच कर अपनी बांहों में भर लिया और मुझे किस करने लगा.

उसने किस करते करते ही मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मेरी गांड पर उसका हाथ आ गया.

वह लगातार अपने हाथ से मेरी गांड को दबाए जा रहा था और मसल रहा था.

फिर मैंने भी उसका पैंट खोल कर देखा.
मैं देख कर दंग रह गया.

उसका सर कटा काला बड़ा सा लंड काफी लंबा था.
उसके लंड की मोटाई देख कर मैं पागल हो गया.
साथ ही मैं डर भी गया.

उसने खड़े होकर अपनी पैंट उतार दी और अपना कटा हुआ लंड मेरे मुँह के पास लाकर मेरे होंठों में रगड़ने लगा.

मैं अचकचा गया था, तभी उसने मेरे बाल पकड़ कर मुँह ऊपर उठाया और मेरे मुँह में लंड घुस दिया.
उसका सिर्फ़ टोपा मुँह में गया था तो ऐसे लग रहा था कि इसका पूरा लंड मेरे अन्दर नहीं जा पाएगा.

मैं उसके लंड के सुपारे के चूसने और चाटने लगा.
उसका मूसल लंड बहुत बड़ा और मस्त था.
मैं किसी पागल की तरह उसके लंड को चूसे जा रहा था.

उसको भी उत्तेजना होने लगी थी तो उसने मेरा मुँह पकड़ा और अपना पूरा लंड मेरे मुँह में जबरदस्ती पेल दिया.

मुझे उल्टी जैसा हुआ, तो उसने निकाल दिया.

उसका पूरा लंड मेरी लार से सन गया था.
मैं किसी रंडी के जैसे उसके लंड को चाटने लगा था.

अब मुझे उसका लंड चाटने में मज़ा आने लगा था और मैं उसके लंड पर अपनी जीभ घुमाए जा रहा था.
वह भी पागल सा हो गया था. उसे भी सेक्स चढ़ गया था.

उसका लंड चाटते चाटते मैं उसके लंड के टट्टे भी चाटने और चूसने लगा था.
सच में यार बहुत बड़ा था उसका लंड.

मैंने काफी देर तक उसका लंड चूसा.
अब तक मैं काफी अन्दर तक उसके लंड को लेकर चूसने लगा था.

उसने भी मेरे मुँह में ज्यादा से ज्यादा लंड डालकर मुँह में झटके मारने शुरू कर दिए थे.
वह मेरे मुँह को ही छेद समझ कर चोदने लगा था.

मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मन तो कर रहा था कि उसका लंड मेरे मुँह से दूर ही ना हो.
फिर उसने मेरी गांड दबाई और मुझे लंड पर बैठने के लिए बोला.
मैं भी राजी हो गया.

पोजीशन बनाई और मैं अपनी गांड में उसका लंड लेने की कोशिश करने लगा.
पर उसका लंड बार बार फिसला जा रहा था.

उसने वैसलीन की डिब्बी ली और काफी सारी वैसलीन अपने लंड पर लगा कर मुझे उल्टा लेटा दिया.

उसने मेरी गांड पर भी वैसलीन लगाई और अपने एक उंगली मेरी गांड के अन्दर डाल दी.
मैं दर्द से चिल्ला उठा.

वह समझ गया कि मेरी गांड अभी कोरी है.
इससे वह ऐसे खुश हो गया मानो किसी कुंवारी कन्या की सील तोड़ने मिल गई हो.

उसने अपनी एक उंगली मेरे मुँह में डाल दी और अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
अब मेरे मुँह में भी उसकी उंगली चल रही थी और गांड में भी.

फिर उंगली उसने हटा दी और वह मेरे ऊपर चढ़ गया.
मैंने अपनी गांड के छेद पर उसका लंड गड़ता सा महसूस किया.
एक बार को मैं तो डर गया कि अब गांड फटने वाली है.

मैं कसमसा रहा था.
इतने में उसने जोर लगाया और वैसलीन की चिकनाई की वजह से उसका आधा लंड मेरी गांड में घुसता चला गया.

मेरे मुँह से चीख निकल गयी.
वह मेरे ऊपर पूरा चढ़ गया और उसने मुझे छोड़ा ही नहीं.

मैं किसी बकरी की तरह किसी कसाई के कब्जे में फंसा हुआ मिमिया रहा था.

उसने मुझे शांत किया और मेरे लंड को सहलाने लगा.
उसका लंड भी मेरी गांड में रुका रहा.
मैं कुछ देर बाद शांत हो गया.

इतने में उसने एक और झटका दे दिया.
मैं दर्द से चिल्लाता कि इतनी देर में तो उसने अपना लंड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया था और अपना हाथ मेरे मुँह पर रख कर मुँह दबा दिया था.
साथ ही अपनी अंडरवियर मेरे मुँह में ठूंस दी.

मैं कुछ बोल ही नहीं पाया, बस दर्द से तड़पता रहा.
कुछ देर तक वह अपने लंड को मेरी गांड में चलाता रहा.

मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई आरी सी मेरी गांड में चल रही है.

इतने में उसने अपने लंड को गांड से बाहर निकाल लिया.
मुझे लगा कि शायद उसका हो गया था.

पर वह लंड पर वैसलीन लगाने लगा था.

मैंने देखा कि उसके लंड पर खून लगा था.
मैं उससे कुछ पूछ ही नहीं पाया.

मेरे मुँह में अंडरवियर घुसी होने के कारण मैं कुछ भी नहीं कह पा रहा था.

उसने वापस से अपने लंड को मेरी गांड में पेल दिया.
इस बार उसने मेरे दर्द की चिंता ना करते हुए और करारा झटका लगाया.

एक के बाद दूसरा झटका … वह लंड पेलता गया और कुछ ही समय में उसका पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था.

एक दो पल रुकने के बाद वह झटके लगाने लगा और धकापेल मेरी गांड मारने लगा.

अब उसने मेरे मुँह से अंडरवियर भी निकाल दी और झटके देता गया.

जैसे ही वह शॉट मारता, मेरे मुँह से आह आह निकलता.

इससे उससे बहुत मज़ा आता.
वह और बड़े बड़े झटके लगाने लगा.

मेरी चीखें और तेज निकलने लगीं.

वह बेहिसाब चोदे जा रहा था और झटके मारे जा रहा था.
मैं दर्द से कराह रहा था.

करीब बीस मिनट बाद उसने अपना लंड बाहर निकाला और मेरे मुँह पर लंड ले आया.

उसके लंड से वीर्य की पिचकारी निकली और वह मेरे मुँह पर पानी छोड़ने लगा.
उसके लंड से बहुत गाढ़ा वीर्य निकल रहा था और बहुत सारा निकला था.

मेरी नाक और गाल से बहता हुआ उसका वीर्य मेरे मुँह तक आ रहा था.
फिर वह उठा और अपना लंड साफ करने लगा.

मैं भी उठ कर अपना मुँह धोने लगा और गांड की साफ सफाई करने लगा.
मेरी गांड वैसलीन और खून से लिपी हुई थी.

फिर वह मेरे पास बैठ गया.
वह हंस रहा था.
मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी.

मैंने न्यू गे बॉय बन चुका था. मेरा मन उसका लंड देख कर चूसने का कर रहा था.
मैंने वापस उसका पैंट खोल दिया और उसका लंड चूसने लगा.

मैं मस्त लॉलीपॉप के जैसे लंड चूसे जा रहा था.
अब उसका लंड चूसने में पहले से ज़्यादा मज़ा आ रहा था.

इतने में ही किसी का कॉल आया.
वह अपना लंड मेरे मुँह से निकाल कर बोला- अब चलता हूँ.

मैं उदास हो गया और मैंने उसको रोक लिया.
मैंने उसका लंड वापस अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा.

लंड चुसवा कर उसने अपना पैंट पहना और मुझसे बोला- मुझे वापस उसी पार्क के पास छोड़ दो.
मैंने बाइक से उसे उसी पार्क में छोड़ दिया और चला गया.

तब से मैं उसे मिस कर रहा हूँ.
क्या मस्त सलमानी काला लंड था उसका … मुँह में भी नहीं जा पा रहा था.
इतना बड़ा लंड था.

दोस्तो, यह मेरी न्यू गे बॉय सेक्स कहानी एकदम सच्ची है.
आपको कैसी लगी, प्लीज मेल करके बताएं.
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