पड़ोस की लड़की और उसकी सहेली की चुदाई- 1

गर्ल फिंगर फ़क स्टोरी में पढ़ें कि मैंने अपनी पड़ोसन लड़की को चोद दिया था. पर एक चुदाई से हमारा मन नहीं भरा था तो हम दोबारा चुदाई के लिए मिले.

दोस्तो, मैं आपका पुराना साथी अगम काफी दिनों के बाद आपके सामने अपनी पड़ोस की लड़की लवी जो मेरी बहन भी लगती थी रिश्ते में, की चुदाई की अगली कहानी लेकर हाजिर हूँ.

मेरी पिछली सेक्स कहानी
रिश्ते में बहन के साथ सेक्स सम्बन्ध
में आपने अब तक पढ़ा था कि कैसे मैंने लवी की ताबड़तोड़ चुदाई की और लवी मेरे ऊपर ही लेट गई थी.

अब उससे आगे गर्ल फिंगर फ़क स्टोरी:

लवी मेरे ऊपर निढाल होकर लेट गई और फिर हम दोनों ऐसे ही सो गए.

रात में जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि लवी मेरे साइड में लेटी हुई है और वो थोड़ी परेशान लग रही है.

मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- यार, मेरी चूत में अब भी काफ़ी दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- दर्द तो होगा ही, इतनी भयानक चुदाई जो हुई है. पर अगर ज़्यादा दर्द हो रहा था तो तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं?

वो बोली- मैं आज बहुत खुश हूँ. मेरी खुशी की वजह तुम हो और मैं तुमको किसी भी सूरत में परेशान नहीं करना चाहती थी इसलिए नहीं उठाया.
मैं उठा और किचन से गर्म पानी लेकर आया.

वो मुझे देखने लगी.
मैंने उसको सीधा लिटाया और तौलिया गर्म पानी से भिगो कर उसकी चूत की सिकाई करने लगा.

कुछ देर बाद उसको आराम मिल गया.
मैंने पहले रूम साफ़ किया और उसे साथ लेकर बाथरूम में आ गया.

उधर हम दोनों ने एक दूसरे को साफ़ किया और बाहर कमरे में आकर सो गए.

मैंने उस रात लवी के साथ बस एक ही बार सेक्स किया था क्योंकि उसे ज़्यादा दर्द हो रहा था.
अगले दिन हम दोनों सुबह देर से उठे.

मैं तैयार हुआ और अपने घर आने लगा.
तब लवी ने मुझे एक बार किस किया और कहा- जान तुम्हारे साथ बहुत मजा आया.

मैंने लवी से कहा- अभी तो शुरुआत हुई है जान … अभी आगे देखती जाओ कि क्या क्या होता है.
लवी बोली- तुम्हें अपना दूसरा सरप्राइज नहीं चाहिए क्या?

मैंने उसे सहलाते हुए कहा- इस सरप्राइज को पाकर तो मैं बाकी सब भूल ही गया था. अब तुमने याद दिलाया है तो बताओ क्या है दूसरा सरप्राइज?
लवी मेरे गले में दोनों हाथ डाल कर बोली- ऐसे नहीं, उसके लिए तो कुछ फीस लग़ेगी!

मैंने उसे अपनी बांहों में भरते हुए कहा- मेरी जान को जो फीस चाहिए, मिल जाएगी … पर बाद में. अभी जल्दी बताओ क्या है सरप्राइज?
वो बोली- श्वेता का नंबर चाहिए तुमको?

मैं अपने मन में सोचने लगा कि इसने तो मेरे मन की बात छीन ली, जिस चीज़ के लिए मैं इतने टाइम से सोच रहा था, वो इतनी आसानी से मिल रहा है.

मैंने कहा- मेरे दिल की बात तुमको कैसे पता चली?
लवी बोली- तुम्हारे लक्षणों से इतना तो पता चल ही गया था.
मैंने कहा- कैसे लक्षण?

लवी हंस कर बोली- कुछ नहीं, नंबर चाहिए या नहीं?
मैं थोड़ा सोच कर बोला- इससे तुमको तो कोई दिक्कत नहीं है ना!

लवी बोली- अगर तुम मेरे साथ सही से टाइम स्पेंड करो … और जो मुझे चाहिए, वो दो. तो मुझे क्या दिक्कत होगी? वैसे भी हमारा और कुछ फ्यूचर प्लान तो है नहीं … और ना ही ये बात बाहर आ सकती है कि हम दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं.

मैंने लवी की हां में हां मिलाई और उसने मुझे श्वेता का नंबर दे दिया.

नम्बर देती हुई वो बोली- श्वेता तुमको पसंद करती है.
मैं उसकी इस बात पर बहुत खुश हुआ.

मैंने लवी से फिर पूछा- तुमको इससे कुछ प्राब्लम कैसे नहीं है? मेरा मतलब सब लड़कियां चाहती हैं कि उनका ब्वॉयफ्रेंड सिर्फ़ उनका ही रहे.

लवी बोली- अभी कुछ दिन पहले मेरी श्वेता से बात हुई थी, तो श्वेता ने उसे बताया था कि वो तुम्हें लाइक करती है पर वो ये बात खुल कर नहीं बोल पा रही थी.
ये बात कह कर लवी चुप हुई और मेरी तरफ देखने लगी.

मैं लवी को देख रहा था कि मैं इससे कुछ और पूछ रहा था … और ये वो बात को लेकर कुछ क्यों नहीं कह रही है.

तभी लवी ने मुझसे आगे कहा- उस वक्त मुझको थोड़ा बुरा तो लगा था, पर जब श्वेता ने ये कहा कि उसका कोई और फ्रेंड भी नहीं है और वो मुझे भी खोना नहीं चाहती. एक तरह से वो मुझसे हेल्प मांग रही थी. तब मैंने सोचा कि यार इस बात से मुझे भी कोई प्राब्लम नहीं होनी चाहिए. बस इसी लिए मैं श्वेता की हेल्प कर रही हूँ.

अब मैंने उसे ओके बोला और उसे चूम कर धन्यवाद दिया.
कुछ पल बाद हम दोनों अलग हुए और मैं अपने घर आ गया.

काफी थकान हो रही थी तो मैं ऊपर अपने रूम में जाकर लेट गया.

सबसे पहले मैंने श्वेता को मैसेज किया.
‘हैलो श्वेता, मैं अगम हूँ.’

बस इतना लिख कर मैं सो गया.
सारी रात की चुदाई की थकान के कारण गहरी नींद आई.

मेरी जब आंख खुली तो सबसे पहले मैंने अपना फोन चैक किया.
मैंने व्हाट्सैप पर देखा तो श्वेता का हैलो का मैसेज था.
वो ऑनलाइन दिख रही थी.

मैंने उसे रिप्लाइ किया और एक स्माइली भेज दी.
उसका तुरंत हाय का मैसेज आ गया.
फिर मैं उससे सामान्य बातें करने लगा.

उसी समय मेरे पास लवी का मैसेज आया- क्या बात है बेटा … हो गई श्वेता से बात की शुरुआत?
तब मैंने उससे पूछा- तुमको कैसे पता?
लवी बोली कि मुझे और कौन बताएगा?
मैं हंस दिया.

फिर लवी ने मुझसे कहा- सुबह वाली बात याद है ना कि श्वेता के चक्कर में मुझे नहीं भूल जाना.
मैंने उससे कहा- नहीं यार, तुमको तो मैं कभी भी नहीं भूल सकता और तुम अब भी बोलो, तो मैं श्वेता से बात ना करूं?

वैसे मैंने ये बात ऐसे ही बोली थी.
वो बोली कि नहीं नहीं करो बात, बस मुझसे भी बात करते रहना.
मैंने उसे ओके बोला.

थोड़ी देर बाद मेरे दिमाग़ में फिर से ठरक चढ़ने लगी.
मैंने लवी को मैसेज किया- जान ये तो बताओ कि अब कब मिल रही हो?

लवी बोली- शाम को श्वेता के घर जाना तो है, उधर मिल लेना.
मैंने बोला- ऐसे नहीं, पूरे दिन के लिए.

वो बोली- अच्छा बच्चू, अभी मिली तो थी, मन नहीं भरा?
मैं बोला- मेरा तुमसे थोड़े ही मन भरने वाला है.

वो हंसने लगी और बोली- देखते हैं, शाम को मिलो तो सही.
मैंने तय कर लिया कि शाम को उसे लेता हुआ ही श्वेता के घर जाऊंगा.

शाम को मैं उसे लेकर श्वेता के घर जाने लगा, तब वो मेरी बाइक पर बैठ गई थी.
वो मुझसे थोड़ा दूर को होकर बैठी थी, मुझे कुछ अजीब सा लगा मगर मैंने कुछ कहा नहीं.

मैंने बाइक स्टार्ट की और जैसे ही गली से बाहर निकला तो मैंने एक झटका मारा जिससे लवी मेरे ऊपर आ गिरी.

लवी समझ गई और मुझे धौल जमाती हुई बोली- थोड़ा तो सब्र करो … गली से बाहर तो निकलो, तुमको ही पकड़ कर बैठूंगी, पर यहां किसी ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी.

मैं कुछ नहीं बोला, बस हंस दिया और बाइक चलाने लगा.

मेरी बाइक जैसे ही गली से निकली, तो लवी मुझे कसके पकड़ कर बैठ गई और उसके मम्मे मेरी पीठ में गड़ने लगे.

मैंने लवी से पूछा- अब कब मिल रही हो?
लवी ने कहा- अभी साथ ही तो हूँ!

तब मैंने कहा- ऐसे नहीं.
तो वो थोड़ा मज़ाक में बोली- और कैसे?
मैंने कहा- तुमको नहीं पता?
लवी बोली- पता है, मैं बस मज़ाक कर रही थी, मेरा भी मन कर रहा है तुम्हारे साथ रहने का.

मैंने कहा- तो अभी चलूँ?
वो आंख दबाती हुई बोली- नहीं, अभी 2-3 दिन रूको, तब देखती हूँ. अभी पिच गीली है.
मैंने उससे ओके कहा.

फिर हम श्वेता के घर पहुंच गए.

श्वेता ने गेट खोला और हम अन्दर चले गए.
मैं वहीं बैठ गया.

आज श्वेता कुछ ज़्यादा हंस कर और खुल कर बातें कर रही थी.
उससे काफी बढ़िया माहौल में बात हुई.
उसके बाद मैं और लवी घर आ गए.

घर आए ही थे कि श्वेता का मैसेज आ गया और मैं उससे बातें करने लगा.
मुझे उसने बताया कि उसे डार्क चॉकलेट बहुत पसंद है. मैं समझ गया कि ये लंड की बात कर रही है.

मैंने कहा- हां अपने यहाँ ज्यादातर डार्क कलर ही पसंद किया जाता है.
शायद वो भी मेरा इशारा समझ गई थी.
वो तब भी मुझसे खुल नहीं रही थी. मैं भी उसे धीरे धीरे ही पटरी पर ला रहा था.

मैं अगले दिन जब लवी को लेकर उसके घर गया तो उसके लिए डार्क चॉकलेट ले गया.
वो बहुत खुश हुई. हम दोनों की नजरों में बात हुई और वो लजा गई.

वो दिन भी ऐसे ही चला गया.
उससे अगले दिन जब मैं लवी के साथ श्वेता के यहां जा रहा था तो मैंने देखा लवी बहुत खुश थी.

मैंने उससे पूछा- क्या बात है, आज बहुत खुश लग रही हो?
वो बोली- कुछ नहीं, बस ऐसे ही.

मैंने कहा- पिच सूख गई?
वो हंस दी और उसने मेरी पीठ पर एक धौल जमा दी.

हम दोनों श्वेता के यहां पहुंच गए और हमारी मस्ती भरी बातें होने लगीं.
श्वेता मुझसे दिन प्रतिदिन कुछ ज़्यादा ही खुलती जा रही थी.

मैंने सोचा कि अब तो श्वेता को कल को प्रपोज़ कर ही दूँगा.

श्वेता ने लवी को एक चाभी दी तो मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया और हम दोनों वापिस आने लगे.

तब लवी ने मुझे रास्ते में बताया- मैं कल तुम्हारे साथ रहने के लिए पूरा दिन फ्री हूँ.
मैंने कहा- ओके, तो बताओ मैडम किधर मिल रही हो?

वो बोली- एक मिनट पहले मुझे घर से निजात पा लेने दो.
उसने घर पर फोन लगाया और श्वेता की बर्थडे पार्टी का बहाना बना दिया.

फोन काट कर उसने कहा- अब मैं सारा दिन श्वेता के घर रहूँगी.
मैंने उससे कहा- क्या बात है मैडम, उधर रहोगी तो फायरिंग कैसे होगी?

वो मुस्कुराने लगी.
मैंने कहा- मैं रूम बुक कर लेता हूँ.

तब लवी बोली- अरे एकदम बुद्धू हो गया … रूम की क्या ज़रूरत है?
मैं बोला- क्या मतलब?

लवी ने मुझे अपने बैग से वो चाभी निकाल कर दिखाई और बोली- ये श्वेता के घर की चाभी है. मैंने उससे ले ली है.
फिर लवी ने पूरी बात बताई कि कि श्वेता और नेहा कल बाहर जा रही हैं. उनका घर खाली रहेगा.

मैंने हंस कर कहा- क्या बात मैडम, बहुत तरक्की कर रही हो!
वो हंस दी.

मैंने कहा- तुमने श्वेता को क्या बोला कि क्यों चाहिए चाभी?
वो बोली- बोलना क्या था, श्वेता को ये तो पता ही है कि मेरा ब्वॉयफ्रेंड है. मैंने उससे यही बोला कि कल वो मुझसे मिलने आ रहा है.

मैंने उससे कहा- वाह वाह क्या बात है!
उसके बाद हम दोनों हंसते हुए अपने घर आ गए.

मैं कल के लिए बहुत उत्तेजित हो रहा था.

मैं सुबह 7 बजे उठा और तैयार हो गया.
मैंने घर पर बोला- मुझे आज एक दोस्त के यहां जाना है और शायद रात को उसी के घर रुक जाऊं.
मैं घर से निकल गया और सीधा मेडिकल शॉप पर गया.

वहां से कंडोम का बड़ा पैकेट लिया और श्वेता के घर जाने की सोचने लगा.
बस मुझे लवी के फोन आने का इंतजार था.

कुछ देर बाद मेरे पास लवी की कॉल आई कि वो रेडी हो गई है.
मैंने उससे कहा- तुम गली के बाहर जो मेडिकल शॉप है, उससे आगे वाले मोड़ पर मुझे मिलो.

लवी ने ओके बोल कर कॉल कट कर दी.
मैं वहां से आगे जाकर मोड़ पर रुक गया.

तभी लवी भी आ गई.
वो आज बहुत प्यारी लग रही थी.
उसने आज ब्लैक जींस, वाइट क्रॉप टॉप और ब्लैक जैकेट डाल रखी थी.

वो मेरे पीछे बाइक पर मुझसे चिपक कर बैठ गई और मैंने बाइक स्टार्ट की.
हम दोनों श्वेता के घर की तरफ निकल पड़े.

रास्ते में मुझे लवी ने बताया कि श्वेता और नेहा आज सुबह 5 बजे चली गई थीं और वो दोनों कल वापस आएंगी.

मैंने लवी से कहा- क्या बात है जान इसका मतलब आज का पूरा दिन अपना है?
वो मुस्कुराने लगी.

फिर लवी ने पूछा कि प्रोटेक्शन ले आए क्या?
मैं बोला कि तुम टेंशन ना लो, सब इंतजाम है.

कुछ देर में हम दोनों श्वेता के घर पहुंच गए.
लवी ने चाभी से गेट खोला.

हम दोनों अन्दर चले गए और गेट बंद कर लिए.
तब सुबह के 9:30 हो रहे थे.
हम दोनों सीधा बेडरूम में गए और बेड पर बैठ गए.

मैंने टीवी ऑन किया और गाने चला लिए.
मैं लवी के बाजू में बैठ गया और उसका हाथ पकड़ कर उससे बातें करने लगा.
उससे बातें करते करते कब हम दोनों के होंठ मिल गए, ये पता ही नहीं चला.

पहले तो मैं ऐसे ही उसके होंठ चूस रहा था, फिर 5 मिनट के बाद हम अलग हुए.

मेरा आज बहुत मन था कि लवी की जमकर चुदाई की जाए क्योंकि पिछली बार बस एक राउंड ही हुआ था और अब तो लवी की चूत भी खुल गई थी तो आज तो और भी ज़्यादा मजा आने वाला था.

मैंने लवी को खड़ा कर दिया.
लवी ने मुझे ज़ोर से हग कर लिया.

मैं ऐसे ही उसे अपनी बांहों में भरे हुए पीछे को लेकर गया और उसको दीवार से लगा दिया.
मैंने उसके दोनों हाथ भी दीवार से लगा दिए और उसे किस करने लगा.

मैं लवी के होंठ चूसने लगा और धीरे से उसकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया.
लवी की मादक आवाजें निकलने लगीं.

मैंने उसके दोनों हाथों पर किस किया.

लवी भी थोड़ा गर्म होनी शुरू हो गई थी.
उसने मुझे बेड पर धक्का दिया और मेरे ऊपर आकर मुझे किस करने लगी.
वो मेरे होंठ चूसने लगी, फिर मेरी गर्दन पर अपनी गर्म सांसें छोड़ने लगी.

मैंने कुछ करने की कोशिश की, तो उसने मुझे रोक दिया.
मैं समझ गया कि आज लवी मूड में है.

वो मेरी शर्ट के बटन खोलती हुई मेरी छाती पर किस करने लगी; मेरे सीने की घुंडियों को अपनी जीभ से कुरेदने लगी और दांतों से दबा कर हल्के हल्के काटने लगी.
उसके बाद उसने नीचे आते हुए मेरी जींस का बटन खोल दिया और मेरी जींस निकाल दी.

मेरा लम्बा लंड अंडरवियर से बाहर झांकने लगा.
अब मैंने लवी को नीचे किया और पहले उसकी जैकेट निकाली और साथ ही उसका टॉप भी निकाल दिया जिससे वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा में आ गई थी.

मैं उसे किस करने लगा, उसके मम्मों को ब्रा पर से ही मसलता और उन्हें किस करता.
साथ ही मैं उसकी गर्दन पर किस करता हुआ नीचे आने लगा.

जैसे ही मैंने उसके पेट पर किस करना शुरू किया, वो वासना से तड़पने लगी.
वो अपनी नाभि पर मेरी जीभ का स्पर्श पाते ही मचल उठी.

मैंने उसकी जींस को नीचे करके निकाल दिया.
उसकी पैंटी, जो थोड़ी गीली हो चुकी थी, उस पर एक किस किया और अपने हाथ से सहलाने लगा.

वो सिहरने लगी.
मैंने लवी को दोबारा किस करना शुरू किया और उसकी कमर पर किस करते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया.

ब्रा ढीली हुई, तो मैं उसके मम्मों को चूसने लगा और काटने लगा.
वो गर्म आहें भरे जा रही थी.

मैं अपनी जीभ फिराता हुआ नीचे आया और पहले उसकी पैंटी निकाल दी.

फिर उसकी चूत पर किस करके मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी जिससे वो बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी और मेरे सर को अपनी चूत पर दबाती हुई मादक आवाजें भरने लगी.
‘आअहह उऊहह हह …’

मैंने अपनी एक उंगली को उसकी चूत में डाला और अन्दर बाहर करने लगा.
मैं लवी से बोला- जब तेरा होने वाला हो, तो मुझे बता देना.

कुछ 3-4 मिनट के बाद लवी बोली- मेरा होने वाला है.
मैंने अपनी उंगली बाहर निकाल ली, वो मेरी तरफ आश्चर्य से देखने लगी.

उसको अभी अपनी चूत में उंगली करवाने का और मन था.

दोस्तो, मैं आपको सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूंगा कि लवी की चूत चुदाई में क्या क्या हुआ.
यह गर्ल फिंगर फ़क स्टोरी आपको कैसी लग रही है? आप मुझे मेल जरूर करें.
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गर्ल फिंगर फ़क स्टोरी का अगला भाग: पड़ोस की लड़की और उसकी सहेली की चुदाई- 2

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