दूसरी अम्मी ने अब्बू की गांड मारी- 2

शीमेल सेक्स स्टोरी में एक जवान सेक्सी लड़की ने अपने गांडू बाप को एक शीमेल यानि हीजड़े के लंड से गांड मरवाते देखा. हिजड़ा बहुत बुरा सलूक कर रहा था उसके बाप के साथ!

साथियो, मैं मानस पाटिल आपको नफीसा के अब्बू की गांड चुदाई की कहानी सुना रहा था.
कहानी के पहले भाग
मेरा अब्बा गांडू निकलाhttps://www.antarvasna3.com/voyeur/kinnar-sex-kahani/
में अब तक आपने पढ़ा था कि नफीसा के अब्बू मंसूर ने अपनी दूसरी शादी शीला नाम के एक हिजड़े से की थी, जो उसकी गांड मार कर मंसूर को खुश करता था.
उसी की गांड चुदाई को नफीसा छिप कर देख रही थी.
उसने देखा था कि उसका अब्बू मंसूर, शीला के कहने पर एक कटोरी में मूतने के बाद उसी पेशाब को पीने लगा था.

अब आगे शीमेल सेक्स स्टोरी:

अपने अब्बा को खुद का पेशाब पीते देख कर नफीसा को भी मजा आने लगा था.
उसका बाप शीला का पालतू कुत्ता बनकर एक बाजारू रंडी की तरह मूत पी रहा था.

शीला ने बाजू में रखी ऐश ट्रे में सिगरेट को बुझाया और वह मंसूर को ज़लील करते हुए गालियां देने लगी.
उसकी गालियां सुनकर नफ़ीसा को और मजा आने लगा.

नफीसा को भी लगने लगा कि कोई उसे भी इसी तरह जलील करते हुए रौंद दे, उसकी प्यासी चूत को चीर कर उसकी अनचुदी चूत को फाड़ दे.

शीला का शायद अभी मंसूर से मन नहीं भरा था, उसने मूत पी कर बैठे हुए मंसूर को खड़ा किया और उसके दोनों टट्टे अपने मुठ्ठी में भर कर कसके मसल दिए.

मंसूर दर्द के मारे तड़पने लगा, उसकी आंखों से आंसू टपकने लगे.

पर शीला को उस पर जरा भी दया नहीं आयी.
मंसूर के टट्टे निम्बू की तरह निचोड़ते हुए शीला ने पूछा- बोल मादरचोद, क्या है तू भोसड़ी के … बता तेरी क्या औकात है तेरी मालकिन के सामने … रंडी की औलाद!

वह कुछ बोलने की हालत में नहीं था पर वह अपनी मालकिन के आदेश को ठुकरा भी तो नहीं सकता था.

जैसे तैसे उसने अपने दर्द को संभालते हुए कहा- मैं एक दो कौड़ी की रंडी हूँ आपकी मालकिन, आपकी गांड चाटने वाली कुतिया हूँ. मेरी माँ आपकी रांड है और मैं आपकी नाजायज पैदाइश हूँ.

मंसूर के मुँह से ऐसी भाषा सुन कर नफ़ीसा को साफ़ पता चल गया कि उसका अब्बा एक पालतू गुलाम सुअर है. नामर्द होने के साथ साथ वह एक गांडू भी है, जिसे अपनी गांड चुदवाने में मजा आता है.

शीला उस और जलील करती जा रही थी, उसके मुँह पर बार बार थूक रही थी.

मंसूर के मुँह पर जोर जोर से चांटे पड़ने से उसका मुँह लाल हो चुका था.

अब मंसूर की शक्ल बिल्कुल एक बाजारू रंडी की तरह हो चुकी थी, जैसे कई मर्दों ने एक साथ उसके बदन को मसला हो.
उसकी लुल्ली अभी अभी मुरझाई हुई थी पर उसमें से वीर्य की कुछ बूंदें टपक रही थीं.

जोर से निचोड़े जाने की वजह से मंसूर के दोनों टट्टे सूज चुके थे.

तभी शीला ने उन्हीं टट्टों पर जोर से अपने पैर का घुटना मार दिया.
मंसूर बुरी तरह से तड़पने लगा.
उसका बुरा हाल हो चुका था पर शीला एक के बाद एक अपने घुटनों से उसके टट्टे फोड़ रही थी.

शीमेल सेक्स में अपने अब्बा का बुरा हाल देख कर नफ़ीसा और ज्यादा ख़ुश हो रही थी.
अब तो उसने अपनी सलवार ख़ुद उतार दी और वह वहीं बैठ कर अन्दर का खेल देखती हुई अपनी बुर मसलने लगी.

मंसूर तड़पते हुए नीचे ज़मीन पर छटपटा रहा था.
शीला ने वहीं मौका देखा और झट से अपनी गांड लेकर उसके मुँह पर बैठ गयी.

मंसूर की दर्द भरी आवाजें अब शीला की गांड में दब गईं और वह अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करने लगा.
पर शीला की ताकत के आगे उसकी एक ना चली.

मंसूर के टट्टे फिर से अपने मुठ्ठी में भरते हुए शीला चिल्लाई- साले, माँ की चूत तेरी भोसड़ी के … इतना क्यों मर रहा है सूअर … चल चाट मेरी गांड अब मादरचोद … वरना तेरी लुल्ली उखाड़ दूंगी!

शीला की धमकी सुनकर मंसूर चुपचाप दर्द सहन करते हुए शीला की गांड सूंघने लगा.
अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसनी जीभ को शीला की गांड के छेद पर घुमाना चालू किया.

गांड में जीभ जाते ही शीला सिसकारने लगी, उसके लंड में फिर से गुदगुदी होने लगी और वह अपने पालतू कुत्ते मंसूर को शाबाशी देते हुए आगे की तरफ झुक गयी.

झुकने की वजह से शीला की गांड फैलती चली गयी और मंसूर का पूरा मुँह उसकी गांड के नीचे दब गया.
मंसूर अब आसानी से अपनी जीभ से शीला की गांड चाटने लगा.

शीला ने भी मंसूर की मुरझाई हुई लुल्ली अपने मुँह में भर ली और जोर जोर से चूसने लगी.

भले ही मंसूर नामर्द था, पर लुल्ली चूसे जाने से उस लुल्ली में भी जान आने लगी.

जैसे जैसे शीला उसकी लुल्ली चूसती जा रही थी, वैसे वैसे मंसूर की लुल्ली भी पूरी तरह कड़ी हो चुकी थी और ये सब नफ़ीसा बाहर बैठकर देख रही थी.

अपने अब्बा की पूरी खड़ी हुई लुल्ली देख कर नफ़ीसा को पता चला कि मंसूर सच में मर्द के नाम पर धब्बा है. क्यूंकि मंसूर की खड़ी लुल्ली भी मुश्किल से तीन इंच की हो सकी थी.

नफीसा को भी लगा कि ऐसे नामर्द इंसान के साथ यही सुलूक होना चाहिए जो अन्दर शीला उसके बाप के साथ कर रही थी … बस एक गुलाम बनाकर रंडी की तरह चुदाई.
मंसूर भी शीला के लुल्ली चूसने से खुश हो रहा था.

उसने अपनी मालकिन की गांड को अपने दोनों हाथों से खोलकर लगभग अपनी पूरी जीभ गांड में घुसा दी थी.
मंसूर की खुरदरी जीभ से शीला को गांड में असीम मज़ा मिलने लगा तो उसने भी जोर जोर से अपनी गांड को मंसूर के मुँह पर रगड़ना चालू कर दिया.

शीला मंसूर का काम देख कर सिसकती हुई बोली- वाह रे मेरे मादरचोद ठुल्ले … साले सच में तू किसी बाजारू रंडी की औलाद है कुत्ते … घुसा और अन्दर अपनी जीभ सूअर की औलाद, चाट अच्छे से मेरी गांड को!

मंसूर के मुँह पर अपनी गांड रगड़ते हुए उसने फिर से लुल्ली मुँह में भरी और जोर जोर से चूसने लगी.

शीला कभी लुल्ली को तो कभी गोटों को अपने मुँह से गर्म कर रही थी.
पर मंसूर था तो आखिर एक नामर्द ही, कब तक बकरे की अम्मा ख़ैर मनाती?

शीला की दमदार चुसाई की वजह से मंसूर की लुल्ली ने जवाब दे दिया और उसने रस फेंकना चालू कर दिया.
मंसूर की लुल्ली की मलाई शीला के मुँह में ही खाली होने लगी.

शीला को इस बात का पता चलता, उसके पहले ही पूरी मलाई उसके मुँह में निकल चुकी थी.

तब शीला को इस बात पर इतना ज्यादा गुस्सा आया कि उसने मंसूर के टट्टों पर एक जोर का मुक्का पेल दिया.
अपनी गांड को मंसूर के मुँह से हटाते हुए वह मंसूर के मुँह के पास अपना मुँह लेकर गयी और सारा पानी उसके मुँह पर थूक दिया.

मंसूर के मुँह पर एक जोर का थप्पड़ लगाते हुए शीला चिल्लाई- तेरे माँ का भोसड़ा साले भड़वे, तेरी ये हिम्मत की मेरे इजाजत के बगैर तू अपना पानी निकाल दे और वह भी मेरे मुँह में? आज देख मैं तेरी क्या हालत करती हूँ रंडी के पिल्ले!

शीला ने वैसे ही मंसूर के बाल पकड़े और घसीटते हुए उसे कमरे के बाहर खींचने लगी.
यह देख कर नफ़ीसा सतर्क हुई और वह झट से अपनी सलवार उठाती हुई एक बड़े से परदे के पीछे छिप गयी.

अगले ही पल नंगी शीला ने मंसूर को कमरे से बाहर खींचा और उसकी गांड पर लात मारते हुए उसे बाथरूम की तरफ चलने का इशारा किया.
मंसूर चुपचाप रेंगते हुए शीला के पीछे पीछे चलने लगा.

पर्दे के पीछे छिपी नफ़ीसा को अपने नामर्द बाप की गांड दिखाई दी.
किसी बाजारू रंडी की तरह मंसूर की गांड का छल्ला भी पूरी तरह से खुल चुका था.

जैसे ही मंसूर और शीला बाथरूम में घुसे, वैसे नफीसा भी चुपके से वह पहुंची और ध्यान से अन्दर देखने लगी.
अन्दर जलते बल्ब के कारण उसे सब कुछ साफ़ दिखाई दे रहा था.

शीला ने मंसूर के बाल पकड़ कर उसका मुँह कमोड में दबा दिया और जोर जोर से उसकी गांड पर थप्पड़ मारने लगी.
मंसूर की गांड शीला के थप्पड़ों से लाल होने लगी.

बुरी तरह गांड लाल करने के बाद शीला ने मंसूर का मुँह कमोड से बाहर निकाला और झट से अपना लंड उसके मुँह में ठूँस दिया.

उसके बाल पकड़ कर पूरा लौड़ा मुँह में दबाते हुए शीला ने कहा- साले मादरचोद, मेरे मुँह में पानी निकाला कैसे तूने हिजड़े की औलाद … आज देख कैसे तेरी गांड का भोसड़ा बनाती हूँ मैं सूअर!

दोनों हाथों से मंसूर के बाल पकड़ते हुए शीला पूरी ताकत से लौड़ा मुँह में ठूंसने लगी.

मुँह चुदाई के कारण मंसूर का थूक शीला के लंड को गीला करने लगा और साथ ही उसके गले से गॉक-गौक जैसी आवाजें आने लगीं.

शीला का रूप देख कर एक बार तो नफीसा की रूह कांप उठी.

कैसे कोई औरत इतनी जालिम हो सकती है … यही सोचते हुए वह अपने नामर्द गांडू अब्बा की इज्जत लुटते हुए देख रही थी.

कुछ देर मंसूर का मुँह चोदने के बाद शीला ने अपना लौड़ा उसके मुँह में बाहर निकाला और पलट कर आगे की तरफ झुक गयी.
इस वजह से उसकी गदरायी हुई गांड अब मंसूर के मुँह के ठीक सामने खुल गयी.

शीला के आदेश की प्रतीक्षा किए बिना ही मंसूर ने अपना काम समझ कर अपनी जीभ से शीला की गंदी गांड को चाटना चालू कर दिया. साथ ही अपने एक हाथ से वह शीला का लौड़ा जोर जोर से हिलाने लगा.

मंसूर की इस कला से ख़ुश होकर शीला बोली- अब आया ना अपनी औकात पर बहनचोद सूअर, चल अब पूरी जीभ घुसा मेरे गांड में रंडी … चाट ले मेरी गांड पूरी अन्दर तक साफ़ कर भोसड़ी के!

मंसूर जैसे जैसे शीला की गांड में जीभ घुसाने लगा, वैसे वैसे शीला की सिसकारियां निकलने लगीं.
उसका लौड़ा अब और ज़्यादा फूलने लगा था और सुपारे से कुछ बूंदें जमीन पर गिरने लगीं.

शीला को ये पता चल चुका था कि अब उसका लौड़ा उसका साथ ज़्यादा देर तक नहीं दे सकता.
पर शीला को मंसूर की गांड मारे बिना और उसकी गांड में अपना माल निकाले बिना चैन नहीं मिलने वाला था.

मंसूर की गांड चोदने के इरादे से वह खड़ी हो गयी और उसने मंसूर को कुछ इशारा किया.

तभी मंसूर ने भी अपनी मालकिन का इशारा समझ लिया; वह झट से किसी सड़कछाप लावारिस कुतिया की तरह अपनी गांड खोलकर झुक गया.

कमोड के ठीक सामने अब मंसूर का मुँह आ चुका था.

शीला ने वही मुँह एक हाथ से कमोड में दबा दिया और दूसरे हाथ से अपना लौड़ा मंसूर की गांड पर रख दिया.

अगले ही पल उसका लंड मंसूर की गांड की गहराई में समा गया और एक बार फिर से नफ़ीसा का नामर्द अब्बा किसी रंडी की तरह चुदने लगा.

उसका मुँह कमोड के अन्दर दब चुका था.

शीला ने एक हाथ से मंसूर के बाल खींच रखे थे तो दूसरे हाथ से वह मंसूर की गांड अपने थप्पड़ों से लाल कर रही थी.

मंसूर के मुँह से किसी औरत की सिसकारियां निकलने लगीं और अब वह खुद शीला से जोर जोर चोदने का अनुरोध करने लगा.

अब मंसूर ने अपने दोनों हाथ पीछे लेकर पानी गांड खोलते हुए कहा- आआहहह मालकिन, धीरे से चोदो मेरी गांड … फाड़ दी मेरी गांड आपने मालकिन्न … आआहह स्सहह उफ्फ्फ अम्मीईईई!

अपने अब्बा के मुँह से इतनी शर्मनाक बातें सुनकर नफ़ीसा को और ज्यादा मजा आने लगा.

उसका हाथ अब जोर जोर से उसकी फुद्दी को रगड़ने लगा और उसकी फुद्दी से निकलता हुआ पानी अब उसकी जांघों से नीचे उतरने लगा.

शीला ने भी पूरी ताकत से अपना लौड़ा मंसूर की गांड में ठूंसना चालू कर दिया.

मंसूर का चेहरा अपनी तरफ घुमाते हुए वह उसके चेहरे पर थूक रही थी.
बीच बीच में शीला का हाथ नीचे जाते हुए मंसूर की लुल्ली दबोच ले रहा था.
वह जोर से अपनी मुठ्ठी से मंसूर के टट्टे निचोड़ रही थी.

जोर जोर से गांड चुदाई के कारण थप-थप की आवाजें पूरे बाथरूम में गूँज रही थीं और बाहर खड़ी नंगी नफीसा के कानों को सुकून प्रदान कर रही थीं.

शीला के आवेश से मंसूर को पता चल चुका था कि अब शीला किसी भी वक्त उसका माल मंसूर की गांड में ख़ाली कर देगी.
मंसूर ने भी खुद अपनी गांड शीला के लौड़े पर दबाना शुरू कर दिया.
उसकी कटी हुई छोटी सी लुल्ली से भी अब कुछ बूंदें निकल रही थीं, जो नीचे फर्श पर टपक रही थीं.

पिछले कुछ समय से चल रहे इस घमासान चुदाई युद्ध की समाप्ति होने वाली थी और अगले ही पल शीला के लंड से वीर्य की पिचकारियां मंसूर की गांड में उमड़ने लगीं.
झड़ने की संतुष्टि से शीला ने अपना लौड़ा अन्दर तक घुसेड़ कर रखा था और उसके वीर्य की एक एक बून्द मंसूर की गांड में खाली होने लगी.

नफीसा अपनी आंखों से ये नजारा देख कर फिर से झड़ने लगी.

सारा वीर्य मंसूर की गांड में निकालने के बाद शीला ने अपना लौड़ा बाहर खींचा तो पौंक की आवाज के साथ लंड गांड से उछल कर बाहर आ गया.

लौड़े पर लगा शीला का वीर्य और मंसूर की गांड की मलाई नफीसा को साफ़ दिखाई दे रही थी.

उसके अंदाज के परे मंसूर ने वही भिड़ा हुआ लौड़ा झट से अपने मुँह में भर लिया और अपनी मालकिन के लंड को साफ़ करने लगा.

शीला ने जो माल उसके गांड में भरा था वह भी अब खुली गांड से बाहर आते हुए फर्श पर टपकने लगा.
जैसे ही लौड़ा साफ़ हुआ तो मंसूर वह फर्श पर गिरा हुआ वीर्य भी चाटने लगा.

दो बार लगातार शीमेल सेक्स से शीला भी थकान महसूस कर रही थी और वह वहीं पर बाथरूम में बने कमोड पर बैठ गयी.

चुदाई के बाद शांत पड़े उसके लंड में अब एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी.
मतलब शीला का मूत बाहर आने को बैचेन था.

अपने पालतू रंडी मंसूर को इशारा करते हुए उसने उसे अपने पास बुलाया और झट से लौड़ा उसके मुँह में दे दिया.
मंसूर भी अब शीला का मूत पीने के लिए व्याकुल था.

शीला उसके मुँह पर थूकते हुए बोली- साले मादरचोद, ले अब मेरा मूत भी पीले हिजड़े की औलाद!

जैसे ही मंसूर ने शीला का लौड़ा मुँह में लिया, वैसे ही शीला उसके मुँह में अपना मूत भरने लगी.
मूत की धार अब सीधे मंसूर के हलक से होते हुए पेट में जाने लगी और ये सब देख कर नफ़ीसा वहां से भागकर अपने कमरे में आ गयी.
अपने नामर्द अब्बा की करतूत देख कर वह सारी रात सो नहीं पायी, पर साथ ही उसका बदन जो अब तक चुदाई से वंचित था … वह अब चुदने के लिए तड़पने लगा था.

तो दोस्तो, नफीसा की ये हकीकत मैंने पूरे मन से आपके सामने पेश की है.
आशा है कि आप सबको ये सेक्स कहानी जरूर पसंद आएगी.

अगली सेक्स कहानी में लिखूंगा कि कैसे नफ़ीसा ने भी आखिरकार अपनी जवानी एक लंड से चुदवाकर मजे लिए.

आप इस शीमेल सेक्स स्टोरी पे अपने विचार मुझे भेजें.
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