गाँव की भाभी पर दिल आ गया- 1

भाभी की नंगी गांड मैंने देखी उनकी सलवार का नाड़ा खोल कर! जब भाभी चूतड़ मटका कर चलती थी तो मेरा मन करता था कि भाभी को सड़क पर नंगी कर लूं.

दोस्तो,
मैं विवेक हरियाणा से हूं।
यह कहानी है मेरे गांव में मेरे घर के बिल्कुल पास रहने वाली रचना भाभी की।
कहानी काल्पनिक है; इसका किसी विषय वस्तु, किसी व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है।

रचना भाभी की उम्र 28 साल थी। उनकी शादी को 5 साल हो चुके थे।
भाभी देखने में बहुत गोरी मादक थी।

गली मोहल्ले में रचना भाभी की खूबसूरती के चर्चे थे।
भाभी के फिगर की बात करें तो भाभी की कमर बिल्कुल सुराही जैसी पतली थी कमर के ऊपर गोरी पीठ आगे की तरफ दो मोटे मोटे तने हुए खरबूजे जैसे मोटे स्तन थे।
सबसे खास चीज थी भाभी की मस्त मोटी सुडौल गदरायी गांड।
भाभी के चूतड़ों का साइज 38 था।

गली मोहल्ले में सब लड़के या यूं कहें कि की सभी भाभी के नाम की मुठ पेलते थे।

गांव में जब भाभी पानी लेने जाती थी, लड़के भाभी के पीछे पीछे जाकर उनके मस्त पिछवाड़े को निहारते थे।
मैं भी उनमें से एक था; भाभी की नंगी गांड देखें के लिए पागल था.

पर भाभी किसी को घास तक नहीं डालती थी।

मैंने सोच रखा था कि सिर्फ और सिर्फ रचना भाभी की चूत मारूंगा।
तब मेरी उम्र 21 साल थी।

रचना भाभी की जवानी ने मुझे पागल बना रखा था।

दिन हो या रात … मेरी आंखों के सामने सिर्फ रचना भाभी की मस्त गांड और उनके लंगड़े आम जैसे तने हुए चूचे दिखाई देते थे।

रचना भाभी बहुत गोरी चिट्टी थी।
गांव में भाभी दूसरी बहुओं से ज्यादा फैशनेबल थी।

मुझे ऐसा लगता था कि रचना भाभी जानबूझकर भारी पटियाला सलवार डालती हैं ताकि उनकी मस्त गांड और खूबसूरत लगे और सभी लड़के आहें भर भर कर बोलें- हाय! भाभी एक बार दे दे।

मैंने सोच लिया था कि एक बार रचना भाभी के ऊपर जरूर चढूंगा।

मैं भाभी के पीछे हाथ धोकर पड़ गया।
दिन हो या रात … हर वक्त भाभी जहां भी जाती, चाहे पानी लेने या चाहे खेत में … मैं भाभी के मोटे चूतड़ों की थिरकन देख कर उनके पीछे पीछे खिंचा चला जाता।

भाभी का यूं मटक मटक कर चलना मेरे लौड़े को हर वक्त तनाए रखता था।

अब भाभी को भी मेरे ऊपर शक होने लगा था।

एक दिन जब भाभी अपनी ननद शालू के साथ पानी भरकर आ रही थी, तब शालू मुझे देख कर मुस्कराई और बोली- भाभी, देख तेरा आशिक!

भाभी का हाथ उनके मुंह पर ह्ग्या और वे घूंघट आगे करके मुस्कुराने लगी।

उनकी मुस्कुराहट देख कर मैं तो पागल हो गया.

शाम को रोज मैं अपनी छत पर चढ़कर भाभी के आंगन में भाभी को काम करते देखता।

एक दिन भाभी शाम को अपने बाड़े में उपले लेने गई थी।
मैं भाभी के पीछे पीछे चल पड़ा।

भाभी अपनी चौड़ी गांड को मटकाती हुई गली से गुजर रही थी।

मैंने भाभी की आंखों में आंखें डालते हुए आंख मार दी।

भाभी गुस्से में मेरी तरफ देख कर अपने घर चली गई।

अगले दिन मैं शहर जाने के लिए बस स्टैंड पर खड़ा था, तभी भाभी के देवर और जेठ ने मेरी पिटाई कर दी।

“साले घना आशिक बने है!” यह बोलकर मेरे साथ मारपीट करने लगे।

10 दिन तक मैं चल नहीं पाया।

1 महीने के बाद जब मैं ठीक हो गया तो मैं फिर से भाभी के पीछे पड़ गया।

रचना भाभी से दो चार बार आंखें चार हुई और भाभी की ओर से ना गुस्सा ना प्यार … कुछ भी दिखाई नहीं दिया.
मैं भाभी के प्यार में पागल हो गया था।

एक दिन भाभी खेत में गई हुई थी।
मैं भाभी की ओर देख रहा था।

पहली बार भाभी ने मेरी तरफ देख कर मुस्कराई और बोली- पिटने के बाद भी नहीं सुधरा। कैसे सुधरोगे?
मैंने झट से बोला- भाभी, आपका प्यार मिल जाए तब चाहे मौत आ जाए!
भाभी जोर से हंसने लगी और बोली- पागल हो आप!

5 महीनों के बाद हमारे परिवार में शादी थी जिसकी वजह से रचना भाभी और हमारे परिवार के बीच में फिर से बातचीत शुरू हो गई।

रचना भाभी रात को संगीत कार्यक्रम में अपने ननद शालू और सास के साथ हमारे घर आई।
भाभी ने गानों पर खूब ठुमके लगाए।

मैं भाभी की आंखों में आंखें डाल कर भाभी को बार-बार इशारे कर रहा था।
भाभी जी मुझे देख देख कर जानबूझकर अपने मोटे चूतड़ों को हिला हिला कर नाच रही थी।

मैंने झट से भाभी को आंख मारी, आंख मारते ही भाभी मुस्कुराने लगी।

थोड़ी देर के बाद जहां मैं खड़ा था, भाभी वहीं आकर मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हो गई।

मेरे और भाभी के बीच बस आधे फीट का फासला था।
सभी औरतें डांस को देखने में मगन थी।

पता नहीं क्या हुआ, मैंने हिम्मत करके अपने हाथ को भाभी की गांड पर रख दिया.

भाभी एकदम से चौंकी और गुस्से से मुंह बनाते हुए मेरे हाथ झटक दिया।
परंतु वे वहां से हिली नहीं।

मैंने दोबारा से अपनी हथेली को भाभी जी ऊपर उठी हुई मांसल गांड पर रख दिया।
भाभी ने इस बार कुछ नहीं किया।

मैं धीरे-धीरे भाभी की गांड को अपने हाथों से नाप रहा था।

भाभी की गर्म गदराई गांड को मसलने से मेरा लौड़ा पूरी तरह तन चुका था।
वे सामने की ओर देखकर मुस्कुरा रही थी।

मेरा हाथ अंधेरे में था तो मुझे कोई नहीं देख सकता था।

मैंने पीछे हाथ ले जाकर भाभी की योनि को एकदम से अपनी मुट्ठी में भींच लिया।
भाभी कुछ नहीं बोली, बस सामने देखती हुई मुस्कुराने लगी जैसे उसे कुछ पता ही नहीं।

मैं भाभी की योनि को साफ महसूस कर सकता था।

मैंने धीरे से सलवार के अंदर हाथ डालने की कोशिश की तो भाभी थोड़ा सा आगे सरक गई।
थोड़ी देर के बाद भाभी फिर पीछे सरक गई।

इस बार मैंने सीधा उनके कमीज को हटाकर उनके चूतड़ों को थाम लिया।
भाभी के चूतड़ इस बार बहुत ज्यादा गर्म और टाइट थे, जैसे मैं भाभी की नंगी गांड को सहला रहा हूँ.
मेरा लन्ड बिल्कुल फुंकार रहा था।

मैं धीरे से आगे बढ़ा और भाभी को बोला- आई लव यू रचना भाभी!
भाभी बस मुस्कुरा कर रह गई।

मैंने भाभी को पटाने के लिए अपना आखिरी चाल चली।
मैं देखना चाहता कि भाभी मेरी बात को मानती है या नहीं!

मैंने भाभी के कान में कहा- भाभी, एक बार डांस कर दो ना!

मेरे इतना कहते ही भाभी झट से औरतों के बीच में चली गई और भाभी नाचने लगी.
वे मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा कर नाच रही थी, अपनी गांड को मटका रही थी।

भाभी की अदाओं ने मुझे पागल कर दिया।

कुछ देर नाचने के बाद भाभी फिर से मेरे पास आ गई।
तो मैंने फिर से भाभी की गांड पर हाथ रख दिया।

मैंने भाभी के कान में कहा- भाभी, एक बार अपनी गोरी गांड को दिखा दो ना!

भाभी जी ने आंखें तरेर कर कहा- सपने लेना छोड़ दो देवर जी!

इतना कहते ही भाभी शालू और अपनी सास के साथ अपने घर चली गई।

अगले दिन फिर से संगीत का प्रोग्राम होने वाला था.
अबकी बार यह प्रोग्राम हमारी छत पर था।

मैं बेसब्री से मेरी जान रचना भाभी का इंतजार कर रहा था।

थोड़ी देर के बाद शालू और भाभी छत पर आ गई।
आज भाभी क़यामत लग रही थी।

भाभी ने हरे रंग का पटियाला सूट पहन रखा था।
नीचे पांव में पायल, हाथों में चूड़ा, गले में मंगलसूत्र और ढेर सारे सोने के जेवर!

भाभी को देखते ही मेरा मुंह खुला का खुला रह गया।

भाभी मेरी और देख के मुस्कुराती हुई बोली- क्या हुआ? भूत देख लिया क्या!?
मैंने कहा- नहीं भाभी, भूत नहीं … हूर की परी देख ली।

थोड़ी ही देर में भाभी का नंबर आया नाचने का!

भाभी आज कयामत करने वाली थी।
उन्होंने अपने साथ लाए हुए बैग से अपनी नाभि के चारों तरफ घुंघरू वाली तागड़ी बांधी।

भाभी ने मुझसे कहा- अमित, वह छम छम बाजे तागड़ी वाला गाना लगा दो.
मैंने झट से वह गाना लगा दिया।

और गाना लगते ही भाभी झूम उठी।
आज भाभी अपनी पतली कमर की जान निकाल देने वाली थी।

भाभी के मोटे विशाल चूतड कयामत ढा रहे थे।
उनकी बालों की चोटी इधर उधर गान्ड के उपर नागिन की तरह फिर रही थी।

थोड़ी देर में नाचने के बाद मैंने भाभी को इशारा देकर छत के अपने पास कमरे में बुला लिया।
भाभी पानी पीने के बहाने नीचे आ गई।

मैं रसोई में था।
भाभी पानी पीने लगी.

तभी मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया.
भाभी बोली- क्या कर रहे हो अमित, छोड़ो मुझे!
मैं बोला- भाभी, आई लव यू!
“ओके देवर जी, अब छोड़ो मुझे. कोई आ जाएगा!” भाभी के चेहरे पर मुस्कान थी।

मैं रचना भाभी के पीछे चिपका हुआ था।
भाभी की उठी हुई गांड मेरे लन्ड से सटी हुई थी.
मेरा लिंग भाभी के चूतड़ों पर ठोकर मार रहा था।

2 मिनट ऐसे ही रहने के बाद भाभी ने मुझसे कहा- पानी तो पीने दो!
मैंने भाभी को पकड़े पकड़े ही फ्रिज की तरफ धकेल दिया।
फ्रिज का दरवाजा खोल के एक पानी की बोतल भाभी को दी।

भाभी मेरी बाहों में मेरे सहारे पानी पीने लगी।

मैंने वापस फ्रिज में ही रख दिया.

पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैंने फ्रिज से एक अंगूर का गुच्छा निकाल लिया और भाभी के होठों पर रख दिया.
भाभी मेरी आंखों में देख मुस्कराई।

मैंने इशारे से खाने को कहा।
भाभी ने एक अंगूर को अपने गुलाबी होठों से तोड़ लिया।

फिर मैंने कुछ एक अंगूर को अपने होठों में ले लिया.
इस तरह से 10 मिनट तक हम एक दूसरे की बाहों में एक एक करके कभी भाभी कभी मैं अंगूर खाते रहे।

अचानक किसी के आने की आहट हुई तो मैंने भाभी को एकदम से छोड़ दिया।
भाभी एकदम भाग कर ऊपर चली गई।

अगले 2 दिन तक शादी के कारण कुछ नहीं हुआ।

शादी के बाद सभी रिश्तेदार अपने अपने घर चले गए.

मैं भाभी को शादी में एक बार फिर पकड़ना चाहता था, पर भाभी ने कोई मौका नहीं दिया।

अगले दिन दोपहर को जब मैं घर पर अकेला था।

किसी ने डोर बेल बजाई तो मैंने देखा.

ओह माय गॉड … मेरी जान रचना भाभी दरवाजे पर खड़ी थी।

मैंने दरवाजा खोलने की बजाए अंदर से ही बोल दिया- आ जाओ!

भाभी ने दरवाजे की कुंडी लगाई और अंदर आ गई।

वे जैसे ही अंदर आई, मैंने उनको पकड़ लिया।
भाभी मुस्कुरा कर बोली- तुम्हें कुछ और काम नहीं है क्या?

मैंने कहा- भाभी, मैं आपसे प्यार करता हूं।
भाभी हंसने लगी, बोली- मुझे पता है तू कितना प्यार करता है। मेरे से अगर प्यार करता है तो मुझे छोड़!

मैंने झट से भाभी को छोड़ दिया और दूर खड़ा हो गया.

भाभी बोली- सच में प्यार करते हो क्या?
मैंने कहा- हां भाभी, आई लव यू! मैं आपके बिना नहीं जी सकता।

भाभी मुस्कुराई और मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हो गई।

उन्होंने चैन वाला कमीज पहना था।
भाभी की नंगी पीठ को देख कर मेरा मन हुआ कि मैं भाभी को पकड़ लूं।
पर भाभी ने कहा था कि मुझसे दूर होकर बात करो।

भाभी- सच बताओ क्या चाहिए? झूठ मत बोलो!
मैंने कहा- भाभी. मुझे आप चाहियें।

भाभी ने कहा- आ जाओ लाडले देवर जी अपनी लाडली भाभी के पास!

मैं झट से भाई के पास गया।

भाभी ने भी अपनी दोनों बाहें मेरी गर्दन के चारों ओर डाल के बोली- अमित तुम्हें क्या चाहिए, मुझे पता है। पर मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकती। पर तुम जो चाहते हो, उसके लिए मना भी नहीं कर सकती।

मैंने अपने दोनों होठों को भाभी की गर्दन पर रख दिया।
भाभी की सांसें गर्म हो चली थी। उनकी दोनों मोटी मोटी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी।

मैंने अपने दोनों हाथों से उनको पकड़ लिया, उनको दबाने लगा.
भाभी तेजी से सांस ले रही थी- हमें छोड़ो ना अमित … आह नहीं तो मैं मर जाऊंगी।

मैंने भाभी की पूरी की पूरी गर्दन को अपनी जीभ से चाट चाट के लाल कर दिया।
भाभी ने कहा- अभी कोई आ जाएगा, तुम फिर आ जाना। तुम कहो तो मैं अपने रूम में बुला लूंगी. रात को मैं ऊपर सोती हूं। आपके भैया रात को ड्यूटी करने जाते हैं; तब आ जाना।

पर मैं कहां मानने वाला था; मैंने कहा- नहीं भाभी, प्लीज अब मत जाओ।
भाभी ने कहा- अमित प्लीज जाने दो मुझे. तुम कहोगे ना मैं तुम्हें बुला लूँगी।

मैंने कहा- ठीक है. तो मुझे आपके दो अनमोल रत्न देखने हैं।
भाभी एकदम से मुस्कुरायी- क्या? कौन से रत्न हैं मेरे पास?

मैंने कहा- भाभी, मैं आपके पिछवाड़े पर मरता हूं. बस एक बार दिखा दो।
भाभी ने कहा- बदमाश हो तुम देवर जी। पर ठीक है, प्रॉमिस करो कि उससे आगे नहीं जाओगे।

मैंने कहा- नहीं भाभी, दिखा दो ना प्लीज।
भाभी बोली- ठीक है दिखा दूंगी, पर तंग मत करना। तुम दूसरे मर्द हो जिसको मैं अपने दो अनमोल रत्न दिखा रही हूं। इस गांड पर सिर्फ आपके भैया का हक है।
मैंने कहा- भाभी, क्या मेरा हक नहीं है?

भाभी 5 कदम आगे जाकर सामने रखी मेज पर घोड़ी बन गई और मेरी तरफ देख कर बोली- तुमने अपना हक बना लिया है अमित. तभी तो देखो मैं घोड़ी बन गई।

भाभी ने जैसे ही एक हाथ से अपने सलवार के नाड़े को खोलना चाहा.
मैंने भाभी को टोकते हुए कहा- भाभी, यह नाड़ा खोलने का सौभाग्य तो दे दो मुझे!

भाभी एकदम से मुस्कराई और बोली- हां चलो दे दिया हक! पर नाड़ा खोलने के बाद वहीं पर जाकर खड़े हो जाना। आज से दूर से दीदार कराऊंगी।

मैं धड़कते दिल से भाभी के पास गया और कांपते हाथों से भाभी का नाड़ा खोल दिया।

नाड़ा खुलते ही घोड़ी बनी भाभी के चूतड़ों के ऊपर से सलवार फिसल गई।
मैं चार कदम पीछे हट गया और भाभी की गांड को निहारने लगा।

भाभी ने नीचे से पेंटी नहीं पहन रखी थी.
उनके मोटे गदराये चूतड़ मेरे सामने थे।

Bhabhi Ki Nangi Gand

उन्होंने अपनी योनि को पूरी तरह से वैक्स किया हुआ था।
भाभी के चूतड़ ट्यूबलाइट की रोशनी में चमक रहे थे।

मैं चाहता था कि भाभी के पास जाऊं उनके दोनों चूतड़ों को चूम लूं।
मेरा लौड़ा पजामे में तंबू बना हुआ था।

मैंने कहा- भाभी पास आ जाऊं क्या?
भाभी ने कहा- सब्र रखो अमित … सब्र का फल मीठा होता है. अब जाने दो. मैं तुम्हें कल टाइम लगते ही बुला लूंगी।

इतना बोल कर भाभी ने अपनी सलवार नीचे से उठा ली और अपना नाड़ा बांधने लगी।

मैं झट से भाभी के पास गया और भाभी का नाड़ा पकड़ लिया।

मैंने भाभी से कहा- लाओ, मैं बांध देता हूं।

तब मैंने भाभी की गांड से अपने लिंग को सटा कर बड़े प्यार से भाभी को नाड़ा बांध दिया।

भाभी से बोला- भाभी, मैं चाहता हूं कि आप बिल्कुल सज संवर कर मुझे अपना प्यार दें।
उन्होंने पूछा- बोलो क्या पहनूं देवर जी के लिए?

मैंने कहा- भाभी, मैं आपको ब्लैक सूट में देखना चाहता हूं।
भाभी ने कहा- ठीक है. मैं तुम्हें बुला लूंगी. पर यह सब किसी को पता नहीं लगना चाहिए।

कहानी अगले भाग में समाप्त होगी.
आप इस भाभी की नंगी गांड पर अपने विचार जरूर बताएं मुझे!
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कहानी का अगला भाग: गाँव की भाभी पर दिल आ गया- 2

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