काकी की नानी बनने की इच्छा पूरी की- 1

हॉट सेक्स देसी इंडियन गर्ल के साथ करने की तमन्ना मेरे दिल में तब पैदा हो गयी जब मेरे यहाँ काम करने वाली मजदूरन ने दूसरी मजदूरन की बेटी की जवानी के बारे में बताया.

नमस्कार भाइयो और उनकी बहनो,
मैं मानस पाटिल फिर से हाजिर हूँ एक नई कहानी के साथ!
यह मेरे पिछली कहानी
काकी की गांड चुदाई https://www.antarvasna3.com/anal-gand-chudai-female/desi-bai-sex-kahani/
से आगे की घटना है.

जैसे मैंने बताया कि एक दिन में मैंने हमारे खेतों में मजदूरी करने वाली सक्कू और शोभा काकी को एक दिन चोदा.
अपनी उम्र से बड़ी दो दो औरतों का बदन मैंने मेरी वासना मिटाने के लिए इस्तमाल किया.

उस दिन के बाद मुझे जब भी मौका मिलता, मैं कभी सक्कू के साथ तो कभी शोभा काकी के साथ हमबिस्तर होता रहा.
उन दोनों ने भी मेरे जवान लौड़े से चुदवाने में कभी मना नहीं किया.

एक बार सक्कू किसी काम से हफ़्ते भर के लिए अपने मायके गयी हुई थी और मैं शोभा काकी की प्रतीक्षा कर रहा था.

तीन दिन हमको कोई मौका नहीं मिला था तो मैं और शोभा दोनों अपनी वासना की भूख मिटाने के लिए तड़प रहे थे.

और फिर एक दिन हमें बढ़िया मौक़ा मिल ही गया.

भारी बारिश के कारण सारे मजदूर अपने अपने घरों में दुबक कर बैठे थे.
पर खेतों की रखवाली करना भी आवश्यक था.

तो मैंने पिताजी से कहकर शोभा काकी को भी खेतों की हवेली पर मेरे साथ आने के लिए मना लिया.

मौक़े का पूरा फ़ायदा उठाते हुए मैंने और शोभा काकी ने जमकर चुदाई का खेल खेला.
काकी को भी अब अपनी गांड मेरे लौड़े से चुदवाने में बड़ा मज़ा आता.

अब तो वह ख़ुद मेरे लौड़े को अपने फ़टे पुराने भोसड़े में लेकर उसे चिपचिपा करती और मजे से अपनी गांड मेरे सामने खोल देती.

मैंने एक दिन उनके कच्छी का नाप देखा जिस पर 110 cm लिखा हुआ था.
मतलब काकी की गांड 42 – 44 इंच बड़ी थी.

इतनी बड़ी गांड देख कर गाँव के आधे से ज़्यादा मर्द अपनी धोती के ऊपर से अपना मूसल लौड़ा सहलाते पर काकी की बड़ी गांड पूरे गाँव में सिर्फ दो लोग इस्तमाल कर रहे थे.

चुदवाते हुए काकी अपनी गांड मेरे लौड़े पर दबाकर बोली- आआह ह छोटे मालिक, फाड़ दो जल्दी … बड़ी आग लगी है मेरी गांड में … चोदो अपनी रंडी काकी की गांड!

शोभा काकी 45 की उम्र पार कर चुकी थी पर साली इतनी बड़ी हवसखोर थी कि बाजारू रंडियाँ इस छिनाल के सामने शरमा जायें.

मैं भी तीन दिन की सारी कसर निकालते हुए काकी की गांड पेलता रहा, निप्पल मेरे उंगलियों से मरोड़ते हुए मैं शोभा को सड़क छाप लावारिस कुतिया की तरह चोदे जा रहा था.
काकी भी अव्वल दर्जे की रंडी की तरह आअ ह्ह उफ्फ अम्माह करती हुई मेरा काला लौड़ा अपनी गुदाज़ गांड में लेकर चुदवाती रही.
और मैंने भी मेरे लौड़े की सारी मलाई उसकी गांड में निकाल दी.

ख़ैर, एक लम्बे चुदाई युद्ध के बाद काकी ने ख़ुद की गांड से निकला हुआ मेरा लौड़ा चूस चूस कर मेरे लंड को साफ़ कर दिया.

बारिश के मौसम में चुदाई का मजा लेने के बाद मैं काकी के नंगे बदन को अपनी बाहों में लेकर सहला रहा था.
तो उसने भी मेरे लंड को अपने कोमल हाथों में ले रखा था.

मेरा सीना चूमते हुए अचानक काकी बोली- मालिक, मुझे आपसे कुछ बात करनी है, अगर आप की अनुमति हो तो क्या हम अभी उस बारे में बात कर सकते हैं?

सच कहूं तो मुझे लगा कि वह साली पैसे की बात करेगी.
इसलिए मैंने बिना कुछ बोले सिर्फ ‘हम्म’ से उसे अनुमति दे दी.

बिस्तर पर लेती काकी अब मेरे बग़ल में आकर बैठ आ गयी.
मेरा एक हाथ अपने सर पर रखते हुए बोली- पर छोटे मालिक, आप को मेरी कसम … यह बात आप किसी से नहीं करोगे?

ऐसे अचानक क़सम दिलाने से मुझे उसकी बात थोड़ी गंभीर लगी.
मैंने अपना हाथ उसके सर से हटाकर कहा- अरे काकी, मुझ पर विश्वास नहीं है क्या? तू बोल तो सही क्या बात है?

शोभा काकी ने चिंतित होकर कहा- आप किसी ऐसे डाक्टर को जानते है जो मर्दों का इलाज करता हो? कुछ जरूरी काम है.
मैंने कुतूहलता से पूछा- अब यह क्या नया चक्कर है काकी? अब इस उम्र में काका का इलाज करवाओगी? मेरे लंड से मज़ा नहीं आता क्या?

शरमाती हुई काकी बोली- अरे नहीं मेरे छोटे शेर, तुम्हारे मामाजी और तुम दोनों के लंड की याद में मेरी गांड और चूत दिन रात तड़पती हैं.

मैंने फिर से प्रश्नवाचक मुद्रा से पूछा- फिर क्या बात है, तुमको क्यों चाहिए मर्दों का डाक्टर?
इस बार शोभा काकी और गंभीर स्वर पर धीमे से बोली- वो तनु का मरद …

बस इतना बोल कर वह चुप हो गयी.

पर इतने में ही मुझे पता चला कि काकी की बेटी तनया (जो मेरे मामाजी के लंड से हुई काकी की बेटी है) का पति, जिसका नाम अमित है, वो साला नामर्द निकला.

मैंने जैसे जैसे पूछना चालू किया तो काकी ने बताया- शादी को 3 साल से ऊपर हो गए पर अभी तक तनु की उल्टियाँ नहीं हुई.
तब मैंने काकी को डांटते हुए पूछा- फिर उस भोसड़ी के अमित से ख़ुद बोल ना अपना इलाज करवाने, मेरे से क्यों पूछ रही है?

काकी ने उदासी भरे स्वर में कहा- अरे मालिक, उसे तो लगता है तनु ही बाँझ है, ऊपर से उसकी माँ उसे भड़काती है कि तनु से तलाक लेकर किसी और से शादी कर!

मैंने फिर से पूछा- अरे, पर डाक्टर के पास जायेगी तो मरीज़ को भी साथ लेकर जाना पड़ेगा न?”

काकी बोली- इसीलिए तो मालिक … मुझे कोई ऐसा डाक्टर चाहिए जो बस दवा दे दे, बाकी तनु देख लेगी!

उसका दिमाग तो शातिर निकला पर मेरे पास ऐसा कोई जान पहचान का डाक्टर तो था नहीं जिससे मैं काकी और तनु की कोई मदद कर सकूं.

खैर उस दिन तो काकी बस मुझे तनु की अच्छाइयां और अपने दामाद की बुराइयाँ सुनाती रही.
दो दिन के बाद सक्कू भी अपने मायके से लौट आयी.

अपने नामर्द पति से परेशान सक्कू आते ही मेरे गले मिली और सीधा मेरा लौड़ा बाहर निकाल कर मुँह में लेने लगी.
उसने सुबह सुबह मेरे लौड़े पर जम के प्यार बरसाया.
मैंने भी उसे बाजारू रंडी की तरह चोदते हुए मेरे और शोभा काकी की बातें बता दी.

दूसरे दिन जब सक्कू फिर से मेरे पास आयी तो वह चुदाई के मूड में नहीं दिखी, बस मुझे चूमते हुए बोली- आज आपके लिए और एक चूत का बंदोबस्त करना है मालिक, रुको जरा उस रंडी शोभा को आने दो!

कुछ देर में काकी भी आ गयी.

उसने सक्कू से पूछा- बोल सक्कू, क्या कहने के लिए बुलाया तूने इतने सुबह सुबह?
सक्कू ने काकी को बैठने के लिए कहा और बोली- देख शोभा, तनु जैसे तेरी बेटी है वैसे ही वो मेरे लिए है. और मैं भी यह नहीं चाहती कि उसका घर टूटे. इसलिए मैं कुछ सुझाव देना चाहती हूँ. अगर तुझे बुरा लगे तो बता देना.

आज तक सक्कू ने काकी को सिर्फ रंडी, कुतिया, छिनाल जैसी गालियां ही दी थी.
पर आज पहली बार वह काकी के साथ प्यार से बात कर रही थी.
इस बात पर मुझे और काकी को बड़ी हैरानी हुई.

काकी ने भी गुस्से में मुझ से कहा- आप पर भरोसा करके मैंने आप से बात की थी पर आपने ये बात सक्कू को क्यों बताई?
इस पर सक्कू ने ख़ुद आगे आकर कहा- देख काकी, हम तीनों में कोई परदा नहीं है. और मुझ पर विश्वास कर … तेरे घर की बात हम तीनों के अलावा किसी और के कानों तक नहीं जायेगी.

सक्कू के आश्वासन से काकी ने भी अपने गुस्से को शांत करते हुए कहा- ठीक है सक्कू, बोल तू क्या बताना चाहती है? अगर तेरे पास कोई रास्ता है मेरी तनु की जिंदगी बनाने का … तो मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ!

काकी की पीठ सहलाते हुए सक्कू बोली- देख शोभा, बात सिर्फ बच्चा पैदा करने की नहीं है. चूँकि हम दोनों औरतें हैं. हमें पता है कि नामर्द पति के कारण कैसे एक औरत पूरी जिंदगी बदन की आग से तड़प तड़प कर मर जाती है. और इसीलिए मेरा सुझाव यह है कि तू तनु को एक बार छोटे मालिक के साथ सोने के लिए मना ले!

सक्कू के बोल सुनते ही काकी के साथ साथ मैं भी हिल गया.
वैसे तो मुझे तो उसकी बात मतलब हॉट सेक्स देसी इंडियन गर्ल की चुदाई से ख़ुशी हुई … पर शोभा काकी ग़ुस्से से लाल हो गयी.

सक्कू क़े बग़ल से खड़ी होते हुए वह उस पर चिल्लाने लग़ी, सक्कू क़ो माँ बहन क़ी गालियाँ देते हुए वो अपना ग़ुस्सा सक्कू पर निकाल रही थी.

तो सक्कू ने भी काकी क़ो ज़वाब देते हुए कहा- ठीक है, ज़ा फ़िर क़र ले अपने मन क़ी! जब तेरा दामाद आएगा ना तनु क़ो तलाक़ देने … तब हमारे पास मत आना. समझी? पूरा गाँव देखेगा तमाशा … तब तुझे अक़ल आएगी!

काकी से बस इतना कहकर सक्कू मेरे पास आक़र बोली- छोटे मालिक़, आप ही बोलो, इसमें हर्ज ही क्या है. घर क़ी बात घर में रहेगी और बेटी क़ा घर भी उजड़ने से बच जाएगा. पर इस छिनाल क़ो कौन समझाये?

मैं भी सक्कू क़ी बात शांत दिमाग से सोचने लगा.
बात तो उसकी सोलह आने सच थी.
पर क्या क़ाकी इस काम के लिए तैयार हो जाएगी?
यह सोच कर मैं चुप रहा.

सक्कू की बातें काकी को बहुत बुरी लगी, हम दोनों को देखे बिना ही वह कमरे से बाहर चली गयी.

पर सक्कू मेरे पास आकर मुझे सारी बातें समझाने लगी.
सक्कू के अनुसार वह असल में मेरे मामाजी की बेटी थी. और वैसे लोग आज भी मामाजी के बेटी से शादी करते ही है.

मैं भी सक्कू की बातें ध्यान से सुनने लगा, जैसे जैसे वह बताती गयी मुझे उसकी बातों में तथ्य दिखाई देने लगा.

ख़ैर, बात आयी गयी हो गयी.

पर शोभा काकी ने मुझसे और सक्कू से बात करना बिलकुल बंद कर दिया.
वह बस खेतों में आकर अपना काम करके चली जाती.

इसी गरमागरमी में पूरा हफ्ता निकल गया और अचानक उस हफ्ते से काकी ने खेतों पर आना भी बंद कर दिया.

पूछताछ करने पर पता चला कि वह मुंबई गयी है अपने बेटी के पास!

मैंने भी ज़्यादा भाव ना देते हुए शोभा काकी को उसके हाल पर छोड़ देने की ठान ली.

एक शाम को मैं जब मजदूरों के जाने के बाद अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था तो किसी ने दरवाजा खटखटाया.

मुझे तो पहले लगा कि मेरा नौकर हरिया होगा तो मैंने अंदर आने की अनुमति दे दी.

जैसे ही दरवाजा खुला तो मैं हैरान हो गया.
शोभा काकी अपने बेटी तनया के साथ मुझसे मिलने आयी थी.
और अब उसके चेहरे पर कोई गुस्सा भी नहीं था.

मैंने तनया और काकी को अंदर आने का निमंत्रण देते हुए उनको सामने लगे कुर्सियों पर बैठने के लिए कहा.

तनु थोड़ी शरमाती हुई मेरे सामने आकर बैठ गयी.
पर दोनों बिल्कुल चुप थी.

कमरे की ख़ामोशी भंग करते हुए मैंने कहा- क्यों काकी, कहा चली गयी थी इतने दिन बिना बतायें? सब ठीक तो है ना?
काकी ने भी मुस्कुराते हुए कहा- माफ़ करना छोटे मालिक, वो कुछ परेशानियाँ थी तो मुझे तुरंत तनु के पास मुंबई जाना पड़ा और उसी चक्कर में आपको बताना भूल गयी.

मैंने जानबूझकर सहानभूति दिखाते हुए कहा- अरे, ऐसी क्या मुश्किल थी? मुझे बता देती, ये तनया है ना तेरी बेटी?
काकी ने भी तनया के तरफ़ देख कर कहा- जी छोटे मालिक, ये तनु ही है, पिछले हफ़्ते इसकी सास ने इस पर हाथ उठाया और घर से निकालने की धमकी दी तो तनु ने मुझे बुला लिया था.

इतना कहकर काकी का मुँह रोने जैसा हो गया.
काकी का हाल देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैं उठकर उनके पास जाते हुए काकी की पीठ सहलाते हुए उसे ढाढस देने लगा.

आज बड़े दिनों के मैं तनया को इतने करीब से देख रहा था.
वह भी सहम कर अपने माँ का हाथ पकड़ कर गर्दन झुकाये बैठी थी.

काकी और तनु को पानी पिला कर मैंने उनको शांत किया और जानबूझकर तनु के पति अमित और उसकी माँ की बुराई करने लगा.

मैंने अपना गुस्सा दिखाते हुए कहा- काकी, अब उनकी हिम्मत कुछ ज़्यादा ही बढ़ चुकी है. अब तो हमें पुलिस के पास जाना ही पड़ेगा। आज तनु पर हाथ उठाया है, कल ना जाने क्या कर देगी.
काकी ने डरते हुए कहा- नहीं नहीं मालिक़, पुलिस के पास गए तो तनु का घर बर्बाद हो जायेगा. और बदनामी होगी वो अलग से!

तब काकी को डाँटते हुए मैं बोला- तो क्या तनु को उन दरिंदों के पास रहने भेजेगी तू, दिमाग तो ठिकाने पर है तेरा काकी?

मेरे डांटने से काकी की आंसू निकल गए तो तनु ने उसको शांत करते हुए कहा- पाटिल जी, इसीलिए तो हम आपके पास आये हैं. क्यूँकि आप पढ़े लिखे हैं, समझदार हैं. और तो और हमारे अपने हैं.

तनया को देख कर मैंने उसके बात का जवाब देते हुए कहा- वो सब तो ठीक है तनु … पर इसमें मैं क्या कर सकता हूँ? यह तुम्हारे और अमित के बीच की बातें हैं. इस मामले में मैं क्या मदद कर सकता हूँ?

तनु ने शरमाकर अपनी गर्दन झुकाई और झट से कहा- देखो जी, मम्मी और मैं हम दोनों परेशान है. आपने और सक्कू मौसी ने जो मम्मी को सुझाव दिया था वो मम्मी ने मुझे बता दिया है.

अब तो मेरा दिल अंदर से तेज धड़कने लगा, थोड़ा डर भी लगा कि कहीं यह जाकर मेरे पिताजी को ना बता दे.
इसलिए बात को संभालने के लिए मैंने कहा- देख तनया, वो मेरा नहीं, सक्कू का सुझाव था. और मुझे नहीं लगता कि काकी इस बात से ख़ुश है. भूल जाओ वो सब! तुम किसी अच्छे डाक्टर से मिलो, शायद वो कुछ कर सके!

मेरी बात ख़त्म होते ही तनु धीरे से बोली- जी, हम वही बताने आये हैं, मुझे मंजूर है!

तनु के बोल मेरे कानों पर ऐसे पड़े कि जैसे मैं सपना देख रहा हूँ.
क्या सच में कोई औरत अपने बेटी को गैर मर्द के साथ सोने का सुझाव दे सकती है?
और तो और … अब तो तनु भी इस बात के लिए तैयार है.
यह सुनकर तो मैं अंदर ही अंदर ख़ुश भी रहा था.

पर थोड़ा नख़रा दिखाते हुए मैं बोला- अरे तनया, वो तो सक्कू कुछ भी बोलती है. मैं ऐसे कैसे तुम्हारे साथ, मतलब ये कैसे हो सकता है?

मेरे नख़रे देख हॉट सेक्स देसी इंडियन गर्ल तनु अपने जग़ह से उठकर खड़ी हुई और बोली- तो क्या हुआ? मैं औरत नहीं हूँ क्या? अगर आप सक्कू और मम्मी के साथ सो सकते हो तो मेरे साथ सोने में क्या दिक़्क़त है आपको?

अब मैं और काकी तनु के ऐसे सीधे सवाल पर उसे आश्चर्य से घूरने लगे.
पर बिना रुके वो बोली- हां, मुझे सब पता है, और उस हरामी के बच्चे की माँ बनने से अच्छा तो मैं आपके जैसे मर्द का बच्चा पैदा करूँ.

मैंने भी अब ज़्यादा विरोध करना ठीक नहीं समझा.
पर फिर भी थोड़े अकड़ में बोला- ठीक है, अगर तुझे माँ ही बनाना है तो मैं तैयार हूँ. पर क्या काकी को ये बात अच्छी लगेगी?

काकी को देखते हुए तनु ने कहा- मम्मी से क्या पूछना? आपके नीचे टांगें खोलकर चुदने से पहले इसने मुझसे पूछा था क्या?

तनु के तेवर देख कर मैं भी जोश में आ गया, काकी की तरफ देख कर मैंने तनु को बोला- ठीक है, तुझे इतनी ही आग है तो परसों रात को आ जाना हवेली पर. और हां मेरी एक शर्त है, अगर मंजूर है तो बोल?

काकी ने मुझे देख कर पूछा- कौन सी शर्त छोटे मालिक? हमारे पास तो जो भी है वो आपका है, अब क्या दे सकते हैं?

तनु और काकी को देखते हुए मैं बोला- देख काकी, आज यह मेरा बच्चा लेकर कहीं कल मुझे ही न धमकी दे कि मेरी जायदाद इसके बच्चे के नाम कर दूँ. इसीलिए अगर मुझे तनु के साथ सोना पड़ेगा तो मैं ये सब तेरे और सक्कू के सामने ही करूँगा. बोल मंजूर है?

मेरी शर्त सुनकर दोनों थोड़ी असहज हुई.
काकी तो मुझ पर फिर से चिल्लाने लगी.
जो स्वाभाविक बात थी.

मैंने भी अकड़ दिखते हुए उनको ऐसा दिखाया कि ज़रूरत मुझे नहीं, तुम दोनों की है.
और इस बात पर ठंडे दिमाग से सोचने को कहा.

अगला भाग आने तक मेरी इस हॉट सेक्स देसी इंडियन गर्ल पर अपने विचार मुझे बताएं.
मानस पाटिल
[email protected]

हॉट सेक्स देसी इंडियन गर्ल की कहानी का अगला भाग: काकी की नानी बनने की इच्छा पूरी की- 2

About Antarvasna

Check Also

कमसिन कच्ची कली मेरे बिस्तर पर फ़ूल बनी

हैलो दोस्तो, मैं आरुष इलाहाबाद का रहने वाला हूँ। सबसे पहले मेरे चाहने वालों को …