कमसिन लड़की की जवानी की हवस- 1

टीन स्कूल गर्ल हॉट कहानी में पढ़ें कि मुझे मालिश करना आता है. एक बार पड़ोस की एक आंटी मुझे अपने घर ले गयी, उनकी युवा बेटी के पैर में मोच आ गयी थी. मैं खुश हो गया था.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम संदीप है.
मेरी लंबाई 5 फीट 10 इंच की है. मेरा रंग सांवला है और खेल कूद करने व थोड़ा व्यायाम आदि करने की वजह से मेरा शरीर काफी गठीला है.
मेरी आयु 30 वर्ष है.

मेरी पिछली कहानी थी: दोस्त की दुल्हन को सुगहरात में चोदा

मैं भिलाई की एक प्राईवेट कम्पनी में जॉब करता हूं.
कोरोना की वजह से मुझे अपना काम छोड़कर अपने घर रायगढ़ आना पड़ गया था.

लॉकडाउन की वजह से कहीं जाने का मौका नहीं मिलता था, बस घर में ही पड़ा रहता था.
कुछ जरूरी काम से ही बाहर निकल पाता था.
चारों ओर पुलिस का सख्त पहरा सा लगा रहता था.

एक महीना हो गया था, जिंदगी काफी बोरियत भरी हो गई थी.
न कोई कमसिन लड़की दिखाई देती, न ही कोई हॉट भाभी.

जिंदगी तो बस लंड हिला-हिला कर कट रही थी.
इसी बीच मेरे मोहल्ले की एक बूढ़ी अम्मा की मौत कोरोना से हो गई.

इस घटना से पूरे मुहल्ले में दहशत का माहौल पैदा हो गया था.

मुझे बड़ा दुख हुआ था क्योंकि अम्मा ने मेरी बहुत सेवा की थी.
खेलते-कूदते जब भी मांस-पेशी में खिंचाव होता था, मैं उसी अम्मा के पास चला जाता.
अम्मा बहुत ही अच्छे से मालिश कर देतीं.

लगभग पूरा शहर उनको मालिश के लिए जानता था.
खैर … जो भी हुआ, अम्मा जाते जाते अपना कुछ गुण मुझे दे गई थीं.

अम्मा के पास मालिश करा-करा कर मैं भी मालिश के कुछ बहुत गुण सीख गया था.
यह टीन स्कूल गर्ल हॉट कहानी भी इसी गुण के कारण बनी थी.

जब एक दिन दोस्त के शरीर में खिंचाव हुआ तो वह मेरे पास आया था.
मैंने उसकी अच्छे से मालिश की और दो चार दिन बाद वह ठीक हो गया था.

यह बात मोहल्ले में फैल गई थी कि संदीप भी अच्छी मालिश करता है.

अब अम्मा के मर जाने के बाद धीरे-धीरे और भी लोग आने लगे थे.
मुझे दूसरों की मालिश में बिल्कुल मन नहीं लगता, पर क्या करें अम्मा तो अब रही नहीं थीं और लॉकडाउन में मेरे अलावा किसी के पास कोई चारा ही नहीं था.

दिन बीतते गए, ऐसा ही चलता रहा.

फिर एक दिन ऐसा भी आया, जब इसी हुनर के कारण मेरी किस्मत ही खुल गई.

उस दिन सुबह-सुबह मोहल्ले‍ की एक आंटी मेरे यहां आईं.
वह मेरी माता जी से कुछ बात कर रही थीं.

उनकी बातों से तो लगा कि वह काफी दुखी हैं.

तभी मैं वहां आ पहुंचा.
उन्होंने मुझसे कहा- मेरे बेटी नेहा कल रात से पैर में मोच के कारण परेशान है. रात भर ठीक से सो नहीं पाई. बेटा, क्या तुम घर आकर उसे देख सकते हो?

मैं आंटी की बातें सुनकर मना नहीं कर पाया और उनके साथ चल पड़ा.

उनका घर ज्या दा दूर नहीं था तो हम पैदल ही चल पड़े.

जाते-जाते मेरे मन में ख्याल आ रहा था कि नेहा कितनी बड़ी हो गई होगी.
कई सालों से मैंने उसे देखा नहीं है.
बचपन में तो बड़ी प्याीरी लगती थी, अब कैसे होगी.

मैंने आंटी जी से पूछ ही लिया- आंटी, नेहा क्या करती है?
आंटी- नेहा अभी 12 वीं कक्षा में है.

मैं मन ही मन सोचने लगा कि वाह क्या बात है. मतलब नेहा जवान हो चली है.
वैसे भी लड़कियां तो जल्दी ही जवान हो जाती हैं.

उसके दूध कितने बड़े हो गए होंगे.
क्या साइज़ की ब्रा पहनती होगी.
चूत कैसी होगी, उसकी चूत में झांटें कितनी घनी आ गई होंगी.

क्या उसने बॉयफ्रेंड बना लिया होगा, क्या कभी सेक्स.
किया भी होगा या अभी भी कुंवारी होगी.

आंटी से बातें करते-करते और नेहा के बारे में सोचते-सोचते कब नेहा का घर आ गया, पता ही नहीं चला.
नेहा अपने कमरे में लेटी थी.

आंटी नेहा का रूम दिखाते हुए साथ आ गई.
नेहा बेड पर लेटी हुई थी.

रूम में आते ही मेरी नजर सीधे नेहा की चूचियों पर गई और आंखें नेहा की मदमस्त जवानी का जायजा लेने लगीं.
उसने सफेद टी-शर्ट पहन रखी थी जिसके ऊपर से ही उसके उभरे हुए स्तन दिख रहे थे.

उसके स्तन लगभग पूरी तरह से गदरा गए थे.

उसकी चर्बी विहीन पतली कमर, पतले पतले हा‍थ-पैर, चौड़ी गांड … मतलब नेहा अपने यौवन को पूरी तरह खिला चुकी थी.

मैं नेहा के पास जाकर उसके बेड पर ही बैठ गया और उससे सवाल किया- चोट कहां आई है?
उसने कहा- बाएं पैर में घुटने के नीचे.

मैंने आंटी से कहा- सरसों का तेल हो, तो उसे गर्म करके ले आइए … नहीं तो कोई भी तेल चलेगा. बस गर्म करके ले आइए.
आंटी तेल लेने गईं.

इधर मैंने नेहा से कहा- मोच वाली जगह दिखाओ!
उसने काले कलर का लोवर पहन रखा था. उसने नीचे से ऊपर घुटने तक लोवर को खींचा.

हाय क्या. चिकनी टांग थी उसकी.
मैंने पैर को हाथ में लिया और हल्के हाथों से दबा कर उसकी चोट का जायजा लिया.

इतने में आंटी तेल लेकर आ गईं.

नेहा सीधी लेटी हुई थी.
मैंने अपने हाथों में तेल लिया और नेहा के पैरों में ऊपर से नीचे लगाते हुए पैर के तलवे तक आ गया.

सच में बड़े ही चिकने पैर थे उसके … बिल्कुल मखमली.

जवान लड़की के स्पर्श से मेरा लंड अब आकार लेने लगा था.
आखिर कई महीनों बाद किसी जवान लड़की का शरीर छूने का मौका मिला था.
बहुत मजा आ रहा था.

एक ओर संयम भी रखना जरूरी था क्यों कि आंटी भी बगल में बैठ मालिश देख रही थीं.
आंटी खड़ा लंड देख लेतीं तो कांड हो जाता.

कुछ देर सीधा मालिश करने के बाद मैंने नेहा को उलटा होने को कहा और पैर की दूसरी तरफ भी खूब मालिश की.

नेहा की नजरें दूसरी तरफ थीं, शायद उसे दर्द महसूस हो रहा था.
आंटी यह सब बड़े गौर से देख थीं जैसे मैं उसकी बेटी को खा ही जाऊंगा.

इस तरह मालिश खत्म हुई.
आंटी ने कहा- नेहा कब तक ठीक हो जाएगी?

वैसे तो दो-तीन दिन की ही मालिश काफी होती है, पर मैंने पांच-छह दिन बता दिए.

घर आकर मैं बस नेहा के ही बारे में सोचता रहा कि कैसे भी करके नेहा को चोदना ही है. ऐसी जवानी बड़ी नसीब से ही मिलती है.

आखिर कितने दिन हो चले थे, चुदाई का मौका ही नहीं मिल पा रहा था.

पहले कितनी चुदाई करता था, पर जबसे लॉकडाउन हुआ है … लंड तो जैसे खड़ा होना ही भूल गया है.

अब इस तेल मालिश को कैसे भी करके चुदाई मालिश में बदलना ही पड़ेगा.

जब नहाने गया तो बस नेहा के बारे में सोच-सोच कर लगातार दो बार मुठ मारी, तब जाकर चैन मिला.

उसके बाद दिन भर बस तेल मालिश वाली पोर्न मूवी देखता रहा और नेहा को मेरे साथ चुदाई के लिए लेटे होने की कल्पना करता रहा.

शाम को मैं फिर से नेहा की मालिश करने गया. सुबह की ही तरह नेहा की मालिश शुरू कर दी, बहुत मजा आ रहा था.
उस वक्त और भी मजा आ सकता था अगर आंटी बगल में न बैठी होतीं.

मैं इस बार भी सेक्स अपील वाला स्पर्श नहीं कर पाया, बस सामान्य मालिश करके चला गया.
ऐसा ही दो दिन और चला.

मैं मन ही मन सोचता कि ऐसा ही चलता रहा तो कुछ भी हाथ नहीं लगेगा. नेहा ठीक भी हो जाएगी और मैं बस हिलाता ही रह जाऊंगा. कुछ न कुछ तो करना पड़ेगा.

चौथे दिन सुबह फिर मालिश के लिए गया और बेल बजाई.
आंटी ने दरवाजा खोला.

मैंने दरवाजे पर ही पूछ लिया- नेहा की तबियत कैसी है?
उन्होंने बताया कि नेहा कह रही है कि दर्द तो बिल्कुल भी कम नहीं हुआ.

मुझे शक हुआ कि कहीं कुछ तो गड़बड़ है. नहीं तो इतनी मालिश में तो अच्छे अच्छे ठीक हो जाते हैं. पर नेहा का दर्द कम क्यों नहीं हुआ!
रोज की तरह आंटी आज तेल लेकर आईं और वहां से चली गईं.

वे अपने काम में व्यस्त हो गईं.
शायद उनको अब मुझ पर भरोसा हो चला था कि लड़का मेरी बेटी के साथ कुछ गलत नहीं करेगा.

अब मेरी भी आंटी के साथ बनने लगी थी.
जब भी मैं मालिश के लिए आता, आंटी चाय जरूर पिलातीं और हम दोनों इधर उधर की खूब बातें करते.

उस दिन कमरे में मैं और नेहा थे.
मैंने नेहा से पूछा- दर्द कैसा है?
उसने कहा- दर्द कम नहीं हो रहा है.

फिर मैंने दर्द वाले जगह पर हाथ से थोड़ा दबा कर चेक किया.
सब ठीक ही लग रहा था.

मैंने नेहा की आंखों में झांकते हुए कहा- सब तो ठीक लग रहा है, फिर तुम्हारा दर्द अब तक कैसे नहीं गया?
उसने मेरी इस बात को सुनकर नजरें फेर लीं.

मैंने फिर से कहा- मुझे खुलकर बताओगी नहीं, तो इलाज कैसे होगा?
उसने कहा- दर्द घुटने के नीचे नहीं घुटने के ऊपर है!
मैंने कहा- फिर मुझे पहले क्यों नहीं बताया?

उसने कहा- मम्मी बैठी थीं और मुझे अपनी जांघ दिखाने में थोड़ी शर्म भी आ रही थी.

मैंने उसका थोड़ा हौसला बढ़ाते हुए कहा- शर्माओगी तो दर्द कैसे जाएगा … और फिर ये जांघ ही तो है, कोई और ज्यादा अंदरूनी चोट थोड़ी ही लगी है.

वह समझ गई कि मैं चूत के लिए कह रहा हूँ. वह कुछ नहीं बोली.

उस दिन मैंने उसे हल्की सी मसाज ही देकर काम खत्म कर दिया.

घर आकर मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ कि अब नेहा की जांघ को छूने का मौका मिलेगा.
मतलब कमसिन जवानी को भोगने में एक कदम और करीब.

फिर मन में ख्याल आया कि जब नेहा को घुटने के ऊपर दर्द था तो मेरे घुटने के नीचे मालिश करने पर नेहा अपना मुँह क्यों फेर ले रही थी और बेडशीट को क्यों पकड़ लेती थी.
क्या उसने ऐसा उत्तेजनावश किया था?
जरूर कभी किसी मर्द ने टच नहीं किया होगा, तभी तो अपने आपको संभाल नहीं पा रही होगी.
आखिर खिलता हुआ यौवन था, मर्द के स्पर्श को कैसे झेल पाता.

उस दिन शाम को नेहा कमाल की लग रही थी, उसने आज हल्के गुलाबी कलर का शॉर्टस पहना हुआ था.
आज उसके हॉट और सेक्सी पैर मुझे और ज्यादा उत्तेजित कर रहे थे.
आंटी गर्म तेल लाईं और वहां से चली गईं.

आज फिर से मालिश के वक्ता नेहा के हाव-भाव परखने का मौका था.

मैंने जैसे ही नेहा की जांघ को छुआ, नेहा सिहर गई. मैंने उसकी जांघ में अच्छे से तेल लगाया और हल्कें हाथों से मालिश शुरू कर दी.

एक तो दर्द ऊपर से मेरा सेक्स अपील वाला टच.

मैं लगातार सेक्सी मालिश करता गया.
कभी-कभी तो मैं अपना हाथ नेहा के शॉर्टस के अन्दर तक ले जाता.
नेहा की आंखें बंद थीं.

जब-जब मैं अपने हाथ नेहा के शॉर्टस के अन्दर ऊपरी जांघ तक ले जाता, वह गहरी सांस लेती और अपने होंठों को अपने ही दांत से काट लेती.

मैं ये सब बड़े गौर से देख रहा था.
मुझे नेहा की उत्तेजना भरी मालिश करने में बहुत मजा आ रहा था.
ऐसा लगा कि अभी चोद दूं … पर आंटी भी घर में ही थीं, तो कुछ नहीं किया.

नेहा में हवस की चिंगारी लग चुकी थी जो उसके चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रही थी.
आधा घंटा बाद मालिश खत्म हुई.

मैंने हाल-चाल जानने के लिए नेहा से उसका मोबाईल नम्बर मांगा.
तो उसने कहा- मेरे पास मोबाईल नहीं है.
फिर उसने अपनी मम्मी का नम्बर दे दिया.

मैंने थोड़ा फ्रेंडली होने के लिए मालिश के बाद बातचीत शुरू की, हमारे बीच अच्छें माहौल में बातें हुईं.

मैंने नेहा से स्कूल, क्लास फ्रेंड्स और घर के बारे में पूछा … फिर अपने घर आ गया.

रात को लगभग 12 बजे जब मैं सोने जा रहा था तो आंटी के नम्बर से मैसेज आया- हैलो.
मैंने उत्तर दिया- हाय आंटी!
उधर से जबाव आया- मैं नेहा हूं!

अरे वाह … लड़की खुद मैसेज कर रही है. ये सोच कर मन में गुदगुदी होने लगी.

मैंने कहा- हाय नेहा, अभी तक सोई नहीं?
उसने कहा- दिन में तो सोती ही रहती हूं … रात को कहां से नींद आएगी.
मैंने हम्म कहा.

उसने कहा- सॉरी अगर डिस्टर्ब कर दिया हो तो!
मैंने कहा- कोई बात नहीं … और बताओ नेहा … कैसा लग रहा है?

उसने कहा- बहुत बढ़िया, पर अभी भी थोड़ा दर्द है.
मैंने कहा- कोई बात नहीं, जल्दी ही ठीक हो जाओगी.

वह कुछ नहीं बोली.
मैं- नेहा, कुछ अपने बारे में बताओ.

उसने तुरंत ही बड़े प्यार से अपने बारे में सब कुछ बताना शुरू कर दिया. मुझे ऐसा लगा कि ये खुद ही सब कुछ बताने के मूड में थी.

मैंने भी उसे कुरेद कुरेद कर गहराई तक पूछना शुरू किया.

कुछ ही देर में वह मुझसे कुछ ज्यादा ही खुल गई थी.

मैं- दिन कैसा रहा आज?
नेहा- मालिश को छोड़ कर पूरा दिन बोरिंग था.

मैं- क्यों मालिश में ऐसा क्या था, जो तुम्हें इतना अच्छा लगा?
नेहा- पता नहीं जब आप मालिश कर रहे थे, तो बहुत अच्छा लग रहा था. लग रहा था जैसे ये मालिश खत्म ही ना हो. मैं बस लेटी रहूं और आप मालिश करते जाओ.
नेहा की इन सब बातों को सुन मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ कि लड़की हवस के मायाजाल में फंसती जा रही है.

मैं- अच्छा तो कल तैयार रहना, कल मैं और अच्छे से मालिश करूंगा!
नेहा- ठीक है.

मैं- तुम्हारे मम्मी पापा क्या करते हैं और हां तुम्हारे पापा तो अब तक दिखे ही नहीं!

नेहा- मम्मी सुबह घर का काम करती हैं, फिर आपके जाने के बाद बाजार जाती हैं. बाजार से एक-दो घंटे में आकर खाना बनाती हैं. फिर दिन भर टीवी देखती हैं. शाम को आपके जाने के बाद खाना बना कर और खाकर सो जाती हैं. पापा तो दूसरे शहर में हैं, उनकी उधर ड्यूटी है.

पूछने पर पता चला कि उसके पापा पुलिस में थे.

मैं- तो तुम अभी क्या कर रही थीं?
नेहा- बस फ्रेंड के साथ चैट कर रही थी.

मैंने जानने की इच्छा् से थोड़ी चुटकी लेते हुए पूछा- किससे … फ्रेंड या बायफ्रेंड?

नेहा थोड़ा इठलाती हुई बोली- मेरा कोई बायफ्रेंड नहीं है ओके … मैं इन सबमें नहीं पड़ती.
मैं हंस दिया.

नेहा- आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैं- नहीं.

नेहा- झूठ मत बोलो, आप इतने हैंडसम हो, कैसे नहीं होगी!
मैं- थी, पर ब्रेकअप हो गया. अभी सिंगल ही हूं.

इस प्रकार मैं अपनी प्रेम कहानी बताने लगा.
हम थोड़ा और फ्रेंडली हो चले थे.
उसने मुझसे एक-एक कर सब कुछ जानना चाहा, तो उसे मैं कॉल पर ही अपनी गर्लफ्रेंड के साथ हुई वासना की कहानी सुनाने लगा.

मैंने कहा- कैसी लगी मेरी सेक्स कहानी?
उसने कुछ नहीं कहा.

फिर मैंने हैलो-हैलो नेहा … नेहा हैलो … काफी बार कहा.
पर शायद वह सो गई थी या सोने का नाटक कर रही थी. पता नहीं उसने मेरी सेक्स स्टोरी सुनी या नहीं.

दोस्तो, कहानी के अगले भाग में मैं आपको बताऊंगा कि किस तरह से नेहा की चूत चोदने को मिली.

अब तक की टीन स्कूल गर्ल हॉट कहानी पर आप अपने विचार मुझे जरूर बताएं.

लेखक के आग्रह पर इमेल आईडी नहीं दिया गया है.

टीन स्कूल गर्ल हॉट कहानी का अगला भाग: कमसिन लड़की की जवानी की हवस- 2

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