कंटीली माल लड़की को पटाकर चोदा- 2

न्यू GF सेक्स कहानी में मैंने एक नयी गर्लफ्रेंड पटाई. वह मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड की ख़ास सहेली थी. उसके बर्थ डे पर मैंने उसे और उसकी सहेली और अपने दोस्त को अपने घर बुलाया पार्टी के लिए!

दोस्तो, मैं आशीष एक बार फिर से अपनी सेक्स कहानी के साथ हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग
दोस्त की गर्लफ्रेंड की सहेली पर दिल आ गया
में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरे दोस्त संतोष की गर्लफ्रेंड रश्मि की सहेली सुप्रिया मुझे भा गई थी.

एक दिन संतोष ने अपने कमरे पर रश्मि और सुप्रिया के साथ एक पार्टी रखी थी जिसमें संतोष ने रश्मि की चुदाई की थी और मैंने सुप्रिया के साथ उन दोनों की चुदाई को देखा तो नहीं, पर उनकी चुदाई की आवाजें सुनी थीं.

रश्मि की चुदाई के बाद दो सहेलियां एक साथ सोने चली गई.

सुबह मैं उठ कर उन दोनों को उनके हॉस्टल तक छोड़ आया था.
उधर सुप्रिया ने मुझे अपना नंबर दे दिया था.

अब आगे न्यू GF सेक्स कहानी:

मेरे पास सुप्रिया का नंबर आ गया था तो अब हमारी बातें होने लगीं.
कुछ दिन तक तो बस सामान्य बातें हुईं.

फिर धीरे धीरे काफी नजदीकी वाली बातें होने लगीं.
हमारी बातों में रोमांस आने लगा.
कुछ कुछ बातें गंदी गंदी सी भी होने लगीं.

बीच बीच में हम दोनों उसके हॉस्टल के पीछे मिलते भी थे.
हम दोनों किस भी करते थे.

एक दिन हम किस कर रहे थे.
वह एक हाथ मेरे बालों में घुसा कर सर पकड़ कर मेरे होंठों को अपने होंठों से जोड़ कर ‘उम्म उम्म्ह्ह्ह …’ करती हुई चूसने लगी.

मैं भी उसका पूरा साथ देते हुए उसे दीवार पर चिपका कर एक हाथ से उसकी गांड को पकड़ कर मसल रहा था.
दूसरे हाथ से मैं उसकी चूचियों को मसल रहा था.

उसके एक निप्पल को अपनी दो उंगलियों से मींजते हुए उसकी चूचियों को भी दबा रहा था.
मैं उसके होंठों को चूसते हुए धीरे धीरे उसकी गर्दन पर किस करने लगा.

उसके मुँह से ‘आह्ह आउह आह्ह्ह’ निकलने लगी.
तभी किसी के आने की आहट सुनाई दी.
तो हम दोनों अलग हो गए.

मैंने उसे उसके हॉस्टल छोड़ दिया.
रात में हम दोनों ने फोन सेक्स किया.

मैं इधर अपने हाथ से लंड पकड़े था, उधर उसी समय वह भी बाथरूम में अपनी चूत में उंगली कर रही थी.

हम एक साथ स्खलित हुए.
फिर हम दोनों बातें करने लगे.

बातों ही बातों में उसने बताया कि कुछ दिन बाद 2 अक्टूबर को उसका बर्थडे है.
फिर हम दोनों काफी देर तक बात करने के बाद सो गए.

उसके बर्थडे के एक सप्ताह पहले मुझे पता चला कि मामा जी का घर के गृह प्रवेश का मुहूर्त दो अक्टूबर की सुबह का बन रहा है. उन्होंने हम सभी को बुलाया है.

उन्होंने मुझे बताया कि मां और पापा को एक तारीख को शाम को निकलना है. तुम अपना बताओ?
मैंने ‘देखूंगा.’ कह कर बात को टाल दी.

अब मैंने एक पक्की तरकीब सोची.
मैं अपने ही घर में सुप्रिया का बर्थडे मनाऊंगा.

एक अक्तूबर को जब मां ने चलने का पूछा तो मैंने बहाना बना दिया- मैं नहीं जा पाऊंगा. काम बहुत है और कल बॉस ने मीटिंग भी बुलाई है, जिसमें उपस्थित होना एकदम जरूरी है. मैं बिल्कुल नहीं आ पाऊंगा. आप दोनों जाइए.
उन्होंने जिद नहीं की.

शाम को 4 बजे वे दोनों चले गए.

मैंने संतोष को बुलाया.
फिर जब मैंने उससे कहा कि सुप्रिया का बर्थडे है और मुझे उसका बर्थडे यहीं अपने घर में मनाना है.

वह बोलने लगा- रिस्क है.
मैंने उससे कहा- रश्मि को भी यहीं ले आना.

उसने बोला- चल भाई रिस्क है, तो इश्क भी तो है.
हमारा प्लान शुरू हो गया.

रात 12 बजे मैंने सुप्रिया को बर्थडे विश किया.
वह बहुत खुश हुई.
हम दोनों ने दो घंटे तक बातें की.

मैंने उसे और रश्मि को बर्थडे पार्टी के लिए आने को कहा.
वे दोनों आने के लिए राजी हो गईं.

रात में संतोष मेरे ही घर पर ही रुक गया.

मैं आज भी सुबह जल्दी ही उठ गया था पर आज की सुबह में अजीब सी खुशी थी और शाम होने का इंतजार था.

मैंने झट से खाना बनाया.

मैं खाना खा ही रहा था कि सुप्रिया का कॉल आया.
उसने गुस्से में कहा- सुबह से कॉल क्यों नहीं किया?

मैंने कहा- मैं बिजी था.
उसने पूछा- किस काम में बिजी थे?

मैं बोला- मेरी किसी स्पेशल का आज जन्मदिन है. उसकी पार्टी में बिजी था.

वह थोड़ा मुस्कुराती हुई बोली- अच्छा जी … और वह स्पेशल कौन है?
मैं बोला- शाम को देख लेना.

फिर हम दोनों ने काफी देर तक बातें की.

जब शाम हो गई तो मैं और संतोष गिफ्ट और केक लेने बाहर चले गए.
पार्टी की सारी तैयारी करके मैं अपनी बाइक लेकर उन दोनों को लेने गया.

सुप्रिया आसमानी रंग का सूट पहनी हुई थी; एकदम कयामत लग रही थी.
उसका कमीज गहरे गले का था जिसमें से उसकी चूचियों की गहराई साफ दिख रही थी.

मैं यह दृश्य देख कर स्तब्ध रह गया था.

उसने मेरे नजदीक आकर हाथों की चूड़ियां खनकाईं, तब मैं होश में आया.

वह बोली- क्या सोच रहे हो?
मैं रश्मि के सामने कुछ नहीं बोला, बस मैंने शर्मा कर नजरें झुका लीं.

वे दोनों हंस पड़ीं.

मेरी बाइक पर सुप्रिया बीच में बैठी थी, रश्मि पीछे.
मैं उन दोनों को लेकर अपने घर पहुंचा.

रात के 9 बज चुके थे.
हमने पहले बातें की.

उसने मुझसे पूछा- गिफ्ट?
मैंने कहा- देता हूँ ना … पहले केक तो काटो!

उसने कहा- नहीं, पहले गिफ्ट … फिर केक.

मैंने उसका गिफ्ट निकाल कर उसे दिया.
संतोष भी उसके लिए गिफ्ट लाया था, उसने भी दिया.

केक काटा गया और पार्टी शुरू हुई.
सभी लोगों ने मस्ती की.

मैंने खाना बनाया था, सभी ने खाना खाया.

उसने पूछा- खाना कहां से लाए हो?
संतोष बोला- लाए नहीं, बनाया है.

वे दोनों मुँह फाड़ कर देखने लगीं.

मैंने कहा- क्या हुआ यार, इतना बुरा बना है क्या?
रश्मि बोली- अगर तुम संतोष के दोस्त नहीं होते ना … तो आज मैं तुम्हें खुद को गिफ्ट कर देती.

हम हंस पड़े.

सुप्रिया मेरे कंधे पर हाथ रखती हुई बोली- आज तो रिटर्न गिफ्ट देना ही पड़ेगा.

खाना खत्म हुआ.
हम लोग उठे.

उसने कहा- अपना कमरा दिखाओ.
हम चारों मेरे कमरे की तरफ गए, पर आए वापस दो ही.

मैं और सुप्रिया … क्योंकि मेरे कमरे पर तो संतोष ने कब्जा कर लिया.
वह उधर रश्मि के साथ लग गया था.

हम दोनों हॉल में आ गए.
सुप्रिया ने पूछा- गिफ्ट में क्या था?

‘खुद ही देख लो.’
उसने गिफ्ट खोल कर देखा, तो मस्त ब्लैक ब्रा पैंटी सैट था.
उसके साथ एक चूड़ीदार कुर्ता पजामा वाला सूट था.

वह खुश हो गई और बोली- चलो दूसरे कमरे में चलते हैं.
उसने मेरा हाथ पकड़ा और ले गई.

मुझे बेड पर बैठा कर खुद कपड़े लेकर बाथरूम में चली गई.
थोड़ी देर में वह बाहर आई, मगर तौलिया लपेटी हुई.

मैंने पूछा- ये क्या है?
उसने कहा- तुम्हारा गिफ्ट!

मैंने बोला- दिखाओ?
वह बोली- खुद देख लो.

मैंने गेट को अन्दर से लॉक किया और उसके नजदीक पहुंच कर तौलिया को खींच कर उतारा.

जैसे ही तौलिया उसके जिस्म से हटा, तो जो सामने कयामत थी.
वह किसी मक्खन से कम नहीं लग रही थी.

उसका दूधिया सफेद बदन, उस पर मेरा दिया हुआ गिफ्ट ब्लैक ब्रा पैंटी, उसे और भी खूबसूरत बना रहा था.
उसकी विशाल दूधिया चूचियां देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.

वह पूछने लगी- कैसी लग रही हूं?
मैं कुछ बोला नहीं, बस उस पर ऐसे लपक पड़ा जैसे कोई भूखा खाने पर लपकता है.

सीधा उसकी चूचियों के बीच में अपना मुँह डाल कर मैं उसकी चूचियों को दोनों हाथों से दबाने लगा.
वह आह्ह् कर उठी और मेरे सर को पकड़ लिया.

सर को ऊपर उठा कर बोली- बताओ ना … कैसी लग रही हूं मैं?
मैंने बोला- मेरे लंड को छूकर पता लगा लो.

मैं उसके होंठों को अपने होंठों में भर कर पीने लगा.
वह अपने एक हाथ को मेरे जींस के पास ले जाकर मेरे लंड को पकड़ने लगी.

मैं उसको चूमता हुआ, नीचे गर्दन पर आ गया.

अब मैं उसकी गर्दन को चूस और चाट रहा था.
उसका एक हाथ मेरे लंड को जींस के ऊपर से दबाने की कोशिश कर रहा था.

मेरा एक हाथ उसके चूतड़ों को दबा रहा था और दूसरे हाथ से मैं उसकी पीठ को पकड़ कर अपनी तरफ खींचे हुए था.

इस पोजीशन में मैं उसकी गर्दन को चूसते हुए कभी नीचे से उसकी चूत पर भी लंड भी दबा दे रहा था.
उसके मुँह से ‘आह आह्ह्ह आह …’ की सिसकारियां फूट रही थीं.

वह भी एक हाथ से मेरे बालों को पकड़ अपनी चुसाई का आनन्द ले रही थी.

उसने वैसे ही जींस का चैन खोला और मेरी चड्डी के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ कर दबाने लगी.
वह आह आह की आवाज कर रही थी.

मैंने एक हाथ से पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया.
ब्रा को मैं जैसे ही उतारने लगा तो उसने मुझे रोक लिया.

वह बोली- पहले अपने कपड़े उतारो.
मैंने अपनी शर्ट उतारी तो वह मेरी बॉडी को देख कर और कामुक हो गई.

जैसे ही मैं आगे बढ़ने लगा तो बोली- जींस भी.

मैंने जैसे ही जींस को हटाया और उसे अपने शरीर के कड़क अंग दिखाए, उसी पल उसने अपनी ब्रा निकाल कर फेंक दी.

आह … क्या मस्त चूचियां थीं … उन पर उसके हल्के काले निप्पल बहुत ही गजब के लग रहे थे.

वह आगे को आई और मेरे लंड को एक हाथ से पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींचती हुई मुझे लिपलॉक कर मेरे होंठों को चूसने लगी.
एक हाथ से वह मेरा लंड हिला रही थी.

मैं भी उसकी कमर में हाथ डाल कर उसके दोनों चूतड़ों को दबा रहा था और उसे किस में साथ दिए जा रहा था.

अब वह थोड़ी नीचे आई और मेरे निप्पल को चूमने लगी, अपने हाथ से मेरे लंड को हिलाने लगी.
मेरे मुँह से भी आआह्ह हआआ आह्हह … की आवाजें आने लगीं.

मैं अपने हाथों से उसके चूतड़ों को अभी भी पकड़े हुए था.
वह नीचे होने लगी.

मैंने उसे अभी लौड़े की तरफ जाने से रोका और उसे ऊपर उठा कर किस करने लगा.
मैं उसको अपनी बांहों में उठा कर बेड पर ले गया.

बेड पर बैठा कर मैं उसके चूचों को मुँह में भर भर कर पीने लगा.

मेरे दोनों हाथ उसके चूचों को पकड़े हुए थे.
वह अपने दोनों हाथ अपने बालों में डाले हुए थी.

मैं उसके निप्पल को हल्का काट देता.
उसकी आहें निकलने लगी.

वह बहुत तेजी से गर्म हो रही थी.
आह आह … के साथ वह मेरे सर को पकड़ कर अपने चूचियों में दबा रही थी.

फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके पेट पर अपनी जीभ को धीरे धीरे चलाते हुए उसकी नाभि को जीभ से चोदने लगा.
वह मेरा सर पकड़ कर आह आआह्ह आह्ह … कर रही थी.

मैं नीचे उसकी जांघों के जोड़ पर आ गया, अपनी जीभ लगा कर चाटने लगा.
वह और भी जोश में आहें भरने लगी.

वह पूरी तरह से चिकनी माल थी.
उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था.
मैंने उसके एक पैर को घुटने से मोड़ा और फैला दिया.

जांघ और चूत के बीच के गैप में मैंने अपनी जीभ डाली तो जैसे उसके जिस्म में करंट की लहर सी दौड़ गई.
वह चूत उठा उठा कर आहह आहह के साथ मेरी न्यू GF सेक्स का मजा लेने लगी.

सुप्रिया बोलने लगी- वाऊऊऊ यार.
मैंने अपना काम जारी रखा.

मैं उसे चुदायी का भरपूर मजा देना चाहता था.
उसका सबसे बेहतर तरीका है स्खलन.

मैंने उसकी पैंटी को खींच कर बाहर निकाल दी.
अब वह सम्पूर्ण नग्न थी और मेरे कब्जे में थी.

उसकी जवानी का थाल मेरे सामने नग्न परोसा हुआ था और मुझे उसकी नंगी जवानी भोग करना था.

दोस्तो, अगले भाग में सुप्रिया की चुदाई की कहानी को विस्तार से लिखूँगा.

आपको न्यू GF सेक्स कहानी कैसी लग रही है, प्लीज बताएं.
[email protected]

न्यू GF सेक्स कहानी का अगला भाग: कंटीली माल लड़की को पटाकर चोदा- 3

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