ऑनलाइन चुदाई के चक्कर में खड़े लंड पर धोखा- 1

रंडी के साथ बैड सेक्स करके मुझे गुजारा करना पडा जब एक लड़की ने ऑनलाइन दोस्ती करके मुझे सेक्स का मजा लेने दिलली बुलाया और दगा दे दिया.

सलाम दोस्तो, मेरा नाम मुहम्मद जैद पठान है.
मैं लखनऊ, उत्तरप्रदेश का रहने वाला हूँ, उम्र 35 वर्ष है.
मैं पेशे से एक ग्रॅफिक डिजायनर हूँ.

यह मेरी पिछले साल की रंडी के साथ बैड सेक्स की कहानी है, जो मेरे साथ 3 अप्रैल 2022 में घटित हुई थी.

मेरी बात दिल्ली की एक शादीशुदा महिला अलीशा से एक वेबसाइट पर फरवरी 2022 से चैट के जरिए होने लगी थी.
उसने स्वयं मुझे पहले मैसेज किया था.

उसके बाद मैंने उसको अपनी हैंगआउट्स आईडी दी और हम हैंगआउट्स पर चैट करने लगे.
वह बहुत गर्म बातें करती थी.

हमने एक दूसरे से न्यूड पिक्स भी एक्सचेंज किए.
साली बहुत गदराई औरत थी.

उसने कहा था कि उसको बड़ा लंड बहुत पसंद है.
हम काफ़ी दिनों तक चैट करते रहे और मैंने उसको पहले दिन ही मिलने के बारे में पूछ लिया था तो वह सहर्ष तैयार भी हो गयी थी.

मैंने उससे कहा- तीन अप्रैल को मेरा दिल्ली में नेटवर्क मार्केटिंग का सेमिनार है, तो उस दिन ही मिलते हैं.
उसने हां कह दिया.

मैंने उसी दिन पूरे उत्साह के साथ हजरत गंज के रिजर्वेशन सेंटर जाकर रात की ट्रेन में अपना लखनऊ से दिल्ली का रिजर्वेशन करवा लिया.
दो अप्रैल की रात का जाने का और तीन अप्रैल की रात की वापसी का.

मैंने वापस आकर उसको इसके बारे में चैट पर बताया.
तो वह खुश हुई मगर शिकायती लहज़े में बोली- कम से कम एक रात तो रुको!

मैंने तुरंत वापसी का तीन तारीख का रिजर्वेशन कैंसिल करवा कर चार का करवा लिया और उसको सूचित कर दिया.
वह खुश हो गयी.

उसने चैट के दौरान मुझे यह भी बताया था कि वह मनीष नाम के अपने ऑफिस के जूनियर कुलीग और अपने बॉस से भी बहुत बार चुद चुकी है.

मेरे निकलने से हफ़्ता भर पहले उसने यह भी बताया कि वह अपने फैमिली डॉक्टर से भी चुदवा चुकी है और वो भी उसको पहली बार में ही सिड्यूस करके चोदने को तैयार हो गया था.

इससे मुझे कुछ शक हुआ और मैंने पूछा भी उससे!
पर वह बोली कि जब एक औरत, किसी गैर मर्द को सिड्यूस करे, तो वह ना नहीं बोल सकता.

इस पर मैंने सोचा कि हो सकता है, ये सच बोल रही हो.
इसी तरह हमारी गर्म चैट चलती रही और जाने का दिन भी आ गया.

दो अप्रैल को मैंने नहा धोकर अपनी पैकिंग कर ली और शाम के साढ़े आठ बजे चारबाग रेलवे स्टेशन के लिए निकल पड़ा.
मेरी ट्रेन रात दस बजे की थी.

मैंने स्टेशन पहुंच कर कुछ जरूरी सामान की खरीदारी की और प्लॅटफॉर्म पर आ गया.
ट्रेन साढ़े नौ बजे स्टेशन पर लगी और मैं अपनी बोगी में जाकर अपनी बर्थ के नीचे वाली सीट पर बैठ गया.

ठीक दस बजे इंजन ने सीटी दी और ट्रेन चल पड़ी.
दो लोगों से रास्ते में बोगी में कुछ देर बात हुई और फिर हम सो गए.

सुबह साढ़े छह बजे मैं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंच गया और अजमेरी गेट साइड से बाहर आकर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर पांच के सामने उसको चैट पर मैसेज किया.

पर वह पिछली रात से अब तक ऑफलाइन थी.

सुबह दस बजे तक मैंने इंतजार किया मगर वह ऑफलाइन ही रही.

इस बीच सुबह साढ़े सात बजे मेरा दिमाग खराब हुआ तो मैं जीबी रोड चला गया.

उधर एक अंजान लड़के ने मुझसे बात शुरू की.
उसने पूछा- आप चौंसठ नंबर पर जा रहे हो क्या?

मैंने हां बोला, तो वह बोला कि मैं भी वहीं जा रहा हूँ.
मुझे लगा कि चौंसठ नंबर में बढ़िया माल होंगे.

फिर बावन नंबर कोठे के सामने आकर उसने मुझसे कहा- मेरे दोस्त ने यही बताया था कि यह ही बावन बटे चौंसठ नंबर है.
मैं बोला- नहीं, चौंसठ नंबर आगे है.

तो वह बोला- अरे आओ यार, इसी में चलो … चौंसठ नंबर वाला माल यहीं मिलेगा.
तभी एक लड़का और आया और बोला- चौंसठ नंबर बंद हो गया है, वो लॉक्डाउन से पहले था. अब उसको ही यहीं शिफ्ट कर दिया है.

हालांकि मैं उस वक्त जीबी रोड में कई बार रंडी चोदने आ चुका था, जब मैं नोएडा से ग्रेजुएशन कर रहा था.
मगर आज सात साल बाद आया था तो इन दो मादरचोदों की चालबाज़ी समझ नहीं पाया और पहले लड़के के साथ बावन नंबर कोठे में चला गया.

वहां दो अधेड़ उम्र की औरतें अन्दर एक छोटे हॉल में खड़ी थीं.
उनमें से एक ने कहा- चल अन्दर चल.

तो मैंने उत्तर दिया- नहीं, अभी मैं ऐसे ही आया था. मैं शाम को आऊंगा.
मगर उस औरत ने मुझे जबरदस्ती पकड़ कर एक छोटे केबिन में धकेल दिया.

फिर जो लड़का मेरे साथ कस्टमर बनकर आया था, वह भी आ गया और मुझसे बोला- चल चैकिंग करवा.
मैं समझ गया कि यह भोसड़ी वाला यहां का दलाल है.

मैंने कहा- भाई जाने दो मुझे प्लीज, मेरे पास कुछ नहीं है.
तो वह गुर्रा कर बोला- सीधा खड़ा रह … और शराफत से चैकिंग करा ले … तब जाने दूँगा.

मैं खड़ा हो गया और उसने मेरी जेबें चैक कीं और मेरा पर्स निकाल कर उसमें से सौ रुपए ले लिए.
फिर बैग के आगे वाले खाने पर लगी चेन की चाभी मांगी.

मैंने दे दी.

चाभी को लेकर उसने चेन खोली और अन्दर से मेरा एक बड़ा पर्स निकालकर उसमें रखे दो हजार रुपयों में से हजार ले लिए.

फिर वो मुस्कुरा कर बोला- चल … ऐश कर!
यह कह कर वो बाहर जाने लगा.

मैंने कहा- ओ भाई, सुनना जरा!
वह पीछे मुड़ा, तब मैंने बोला कि भाई मैं दूसरे तबके का हूँ, आप लोगों को इस बात से कोई दिक्कत तो नहीं है?

तो वह हंस कर बोला- यार यहां ठुकाई होती है बस उससे कोई फर्क नहीं पड़ता.
मैंने कहा- भाई मैंने सोचा ईमानदारी से बता दूं.

ये मैंने इसलिए कहा था कि शायद ये मेरी जात का हो और मुझे कुछ पैसे वापस कर दे. मगर कुछ फायदा नहीं हुआ.

वह चला गया और एक बड़ी चुचियों वाली मगर गंदी सी शक्ल की औरत अन्दर आ गई.
उसने केबिन का दरवाजा बंद कर दिया और अपनी सलवार खोल कर नीचे से नंगी हो गई.

उधर ट्रेन की बर्थ जितने एक छोटे से बिस्तर पर टांग फैला कर लेट गयी.

वह मुझसे बोली- खोल रे!
मैंने भी बेमन से अपनी लोवर नीचे की और अंडरवियर नीचे करके उसके ऊपर चढ़ गया.

मैंने उस रंडी की चूचियां दबाते हुए उसकी गर्दन पर किस करनी शुरू की.
तो उसने चिल्लाकर मुझे झटक दिया और दो सस्ते सरकारी कंडोम निकाल कर मेरे लंड पर चढ़ाने वास्ते अपने हाथ आगे बढ़ाए.

मैंने अपना बढ़िया क्वालिटी का कामसूत्र सुपरथिन कंडोम लगाना चाहा तो उसने मना कर दिया.
वह बोली- अपना बर्बाद मत कर … यही लगा ले!

उसने जबरन एक के बाद एक करके दो कंडोम मेरे लंड पर चढ़ा दिए और फिर से टांगें फैलाकर लेट गयी.

मैंने उसके ऊपर आकर अपने लंड का निशाना उसकी क्लीन शेव्ड चूत पर लगाया.
तो उसने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़कर निशाने पर लगा दिया.

मैंने धीरे धीरे लंड उसकी चूत में प्रवेश करा दिया और उसकी चूचियां पकड़ लीं.
तो उसने मुझे थप्पड़ मारकर कहा- बहनचोद चूचियां मत पकड़.

मैंने अपने दोनों हाथ उसके चूचों के दोनों तरफ टिकाकर धीरे धीरे धक्के मारने चालू किए.
पांच मिनट बाद मैं उस साली को जोर जोर से पेलने लगा, तो उसने अपनी टांगें कसकर मेरी कमर पर लपेट लीं और मुझे इतना टाइट जकड़ कर पकड़ लिया कि मेरे लिए धक्के मारना नामुमकिन हो गया.

मैंने उसको टांगें जकड़ने से मना किया तो साली रांड बोली- तो धीरे धीरे चोद.
मुझे बेहद गुस्सा आ रहा था कि एक तो साला लुट गया ऊपर से ये हरामी औरत चुदने में नखरे पेल रही है.

मैंने कुछ देर तो धीरे धीरे ही धक्के मारे मगर फिर से तेज तेज चोदने लगा.
हम दोनों की सांसें तेज चल रही थीं.

उसने कहा- मेरे मुँह पर सांसें मत छोड़!
मैंने उसको फुसफुसा कर बोला- तेरी सांसों को महसूस करने दे.

ये कह कर मैं उसकी नाक के पास अपनी नाक ले गया, तो उसने फिर से मुझे थप्पड़ मार कर पीछे धकेल दिया.
मैंने होंठ चूमने चाहे, तो उसने गुस्से से मुझे देखा और अपने ऊपर से धकेलती हुई बोली- चल उठ, भाग यहां से भोसड़ी के!

मैंने किसी तरह मिन्नतें करके उसको मनाया, तब जाकर मानी.

मैं हचक कर साली को पेलने लगा,.
तो उसने फिर से अपनी टांगों की पकड़ मेरी कमर और गांड पर सख़्त कर दीं.

दो निरोध लगे होने की वजह से चूत लंड को महसूस ही नहीं हो रही थी.

खैर … किसी तरह आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं उसकी बुर में डिस्चार्ज हो गया और लंड बाहर निकालकर उसके ऊपर से उठ गया.
हम दोनों अपनी सांसों को नियंत्रित करने लगे.

वह भी उठ गयी और अपनी सलवार पहन कर बाहर चली गई.

मैंने भी अपनी अंडरवियर और लोवर पहना, जूते पहने और अपना बैग कंधे पर टांगकर और जूते चप्पल वाला थैला हाथ में पकड़ कर केबिन से बाहर निकल आया.

मैं कोठे से बाहर जाने लगा, तो सामने वो हरामी लौंडा दिखाई दिया.
मैंने एक नफरत भरी नजर उस दलाल पर डाली, जिसने मुझे यहां धोखे से लाकर फंसाया था.

बाहर आकर मैं बेहद गुस्से में था और अपनी बेवकूफी को कोसते हुए स्टेशन की ओर जाने वाली सड़क पर चलने लगा.

अभी तक अलीशा का कोई मैसेज नहीं आया था, जिससे मेरा गुस्सा और बढ़ गया.

मैंने स्टेशन पर आकर मेट्रो स्टेशन के सामने दस बजे तक इंतजार किया और जब उसका कोई मैसेज नहीं आया तो भारी कदमों से स्टेशन के पास डी बी गुप्ता रोड, पहाड़ गंज की ओर चल पड़ा.

फ़्लाई ओवर से होते हुए मैं डी बी गुप्ता रोड के बाईं तरफ मौजूद एक टूरिस्ट लॉज में गया और एक दिन के लिए सिंगल रूम का दाम पूछा.
मैनेजर ने मुझसे पूछा- एसी या नॉनएसी?
मेरे नॉन एसी कहने पर उसने कहा- आठ सौ रुपए.

मैं मुड़ कर लॉज से बाहर जाने को हुआ तो गार्ड मेरे पीछे भागा भागा आया और मुझे वापस रिसेप्शन के पास बुलाया.
मैं गया, तो मैनेजर ने पूछा- कितने दिनों के लिए रूम चाहिए?
मैंने उत्तर दिया- बस आज के लिए, कल मेरी ट्रेन है.

फिर उसने पूछा- आप कितने तक में चाह रहे हैं?
मैंने कहा- पांच सौ तक में.

उसने पूछा- चौथी मंज़िल पर चलेगा?
मैंने हामी भर दी क्योंकि जीबी रोड पर लुटने के बाद अब मेरे पास सिर्फ़ एक हजार रुपए बचे थे.

फिर मैनेजर ने रजिस्टर में मेरी एंट्री करवाने के बाद पांच सौ रुपए लेकर मुझे कमरे की चाभी दे दी.
मैं अपना सामान लेकर ऊपर चढ़ने लगा. पीछे पीछे बेलबॉय भी था.

बेलबॉय ने चाभी मुझसे लेकर रूम खोला और अन्दर चाभी के सॉकेट में चाभी लगा कर लाइट और पंखा चालू कर दिया.
फिर वह मेरी आईडी की फोटोकॉपी लेकर चला गया.

मैंने अपना सामान व्यवस्थित करके रूम अन्दर से बंद किया और बाथरूम में जाकर ब्रशकर के नहाया और नए धुले हुए कपड़े पहन कर सोचने लगा कि आख़िर बात क्या है,
अलीशा ऑनलाइन क्यों नहीं आ रही है!

अभी मैं अपने विचारों में खोया हुआ ही था कि अचानक अलीशा का मैसेज आया- हाय.
मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

मैंने भेजा- कहां थी यार. .. ऑनलाइन क्यों नहीं आई कल से!
उसने बोला कि छह बजे तक वो व्यस्त है.
मुझे फिर शक हुआ कि आज तो सनडे है, तब ये किधर व्यस्त है, मगर मैंने इस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया.

फिर करीब पंद्रह मिनट हमारी बातें हुईं.

पहले तो वह बोली कि शाम को छह बजे के बाद मेरे लॉज में आएगी चुदाई करने, मगर जब मैंने कहा कि लॉज वाले नहीं मानेंगे, तो वह घर पर मिलने को तैयार हो गयी.

मैंने उसको पंजाबी बाग मेट्रो स्टेशन के बाहर कार पार्किंग में आने को बोल दिया और उसने भी हामी भर दी.
उसके बाद हमने अपनी बात ख़त्म की.

मैं सफर से थक गया था, तो सो गया.
शाम चार बजे मेरी नींद खुली और मैंने उसको मैसेज किया कि मैं लॉज से निकल रहा हूँ.
मगर वह अभी तक ऑफलाइन थी.

मैं कमरा लॉक करके नीचे आया और लॉज से बाहर आकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की ओर निकल पड़ा.

करीब पंद्रह मिनट बाद मैं नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर चार के बाहर था.

मैं अन्दर गया और जाकर टिकट काउंटर पर पंजाबीबाग जाने की जानकारी ली.
स्टाफ ने मुझे बताया कि आपको तीन बार मेट्रो ट्रेन चेंज करनी पड़ेगी. पहले रेड लाइन से राजीव चौक तक जाओ, फिर राजीव चौक से ब्लूलाइन से कीर्तिनगर जाओ और फिर कीर्तिनगर से ग्रीनलाइन से पंजाबी बाग.

मैंने उससे कहा- राजीव चौक का एक टोकन दे दो.
तो उसने बताया कि पूरा पंजाबी बाग तक का ले सकते हो आप.

मैंने बीस रुपए देकर पंजाबी बाग का टोकन ले लिया और जाकर प्लॅटफॉर्म नंबर दो से नई दिल्ली से राजीव चौक के लिए मेट्रो पकड़ ली.

कुछ ही मिनटों में मैं राजीव चौक स्टेशन पहुंच गया और फिर वहां से कीर्तिनगर और कीर्तिनगर से पंजाबी बाग पहुंचने तक समय शाम का सवा पांच हो चुका था.

पंजाबी बाग मेट्रो स्टेशन से बाहर आकर मैं इस स्टेशन के गेट नंबर एक से बाहर आया और उसके बोर्ड के सामने अपनी एक सेल्फी क्लिक करके अलीशा को भेज दी और लिखा- डार्लिंग मैं पहुंच गया हूँ, तुम कहां हो?
परंतु वह अभी भी ऑफलाइन थी और उसका कोई जवाब नहीं आया.

मैं खड़ा खड़ा इंतजार करता रहा और सात बज गए.
तो मैंने फिर से मैसेज किया- कहां हो यार, मैं कितनी देर से इंतजार कर रहा हूँ?
मगर वो ऑनलाइन आई ही नहीं.

इस तरह सात चालीस हो गये.
तो मैंने एक और मैसेज करके पूछा कि वह कहां है.
मगर नतीजा वही रहा.
वो ऑनलाइन नहीं आई.

दोस्तो, कहानी के अगले भाग में आपको इसके आगे का वाकिया सुनाऊंगा कि उस लड़की ने मेरे साथ क्या किया था. आपको अभी तक की रंडी के साथ बैड सेक्स की कहानी को पढ़कर कैसा लगा और आप कुछ कहना चाहेंगे.
मुझे मेल करें.
[email protected]

रंडी के साथ बैड सेक्स की कहानी का अगला भाग: ऑनलाइन चुदाई के चक्कर में खड़े लंड पर धोखा- 2

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